मध्य प्रदेश उपचुनाव की पूरी कमान कमलनाथ ने संभाल रखी है

Madhya Pradesh bypolls : अपनी साख बचाने के लिए फूंक-फूंक कर क़दम रख रहे कमलनाथ

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Madhya Pradesh bypolls : मध्य प्रदेश में लंबे समय से कमलनाथ और शिवराज के बीच सियासी जंग जारी है। मध्य प्रदेश में 27 विधनासभा क्षेत्रों में होने वाला उपचुनाव कमलनाथ की साख का चुनाव होगा। उपचुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने सभी 27 सीटों पर 29 नवंबर से पहले वोटिंग करा लेने का संदेश दिया है । यही कारण है कि दोनों राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।

मध्य प्रदेश में आगामी उपचुनाव कमलमाथ की साख बचाने का एक सुनहरा अवसर होगा। दोनो सियासी दल भाजपा और कांग्रेस के लिए ये उपचुनाव करो या मरो वाली स्थिति पैदा करेगा। कमलनाथ सत्ता से बेदखल होने के बाद और शिवराज की पैंतरे बाज़ी के चलते कोई भी ग़लती नहीं करना चाहते हैं। इस लिए कलमनाथ अधिकतर फैसले ख़ुद ही ले रहे हैं और बड़ी होशियारी से फूंक-फूंकर क़दम रख रहे हैं।

पार्टियों की स्थिति पर ग़ौर करें तो सतही तौर पर बीजेपी में कांग्रेस के मुकाबले असंतोष कहीं ज्यादा नज़र आ रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि 25 विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी को उन लोगों को उम्मीदवार बनाना पड़ रहा है जो पिछले दिनों कांग्रेस छोड़कर पार्टी में शामिल हुए हैं। इस स्थिति ने ही पार्टी में असंतोष के बीज बोए हैं। उधर कमलनाथ इसी असंतोष का फायदा उठाने की पूरी कोशिश में लगे हुए हैं। इसके साथ ही कमलनाथ सिंधिया पर लगातार ज़ुबानी हमले कर रहे रहैं।

मध्य प्रदेश उपचुनाव: क्या भारी विरोध के बावजूद अपनी साख बचा पाएंगे सिंधिया?

वहीं सिंधिया भी कमलनाथ पर लगातार हमलावर हैं। ग्वालियर के दो दिवसीय दौरे पर गए पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के संभावित दौरे को लेकर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश की जनता उनका पंद्रह माह का शो देख चुकी है पता नहीं अब कौन सा शो करने वाले हैं।

बीते मार्च-अप्रैल के बीच मध्य प्रदेश में पिछले दो हफ्तों तक चली राजनीतिक रस्साकशी का अंत होने के बाद कमलनाथ ने प्रेस कॉन्फ़्रेंस कर इस्तीफा दे दिया था। प्रदेश में 15 महीने तक सत्ता में बने रहने के बाद सत्ता से बेदखल होना कमलनाथ की साख पर एक गहरी चोट जैसा था। अपना इस्तीफा देते हुए कमलनाथ ने कहा था कि-

प्रदेश की जनता ने मुझे पांच साल सरकार चलाने का बहुमत दिया था लेकिन बीजेपी ने प्रदेश की जनता के साथ धोखा किया। बीजेपी शुरू से कहती आ रही है कि ये सरकार सिर्फ़ 15 दिन चलेगी।

कमलनाथ की 15 दिन की भविष्यवाणी तो काम न आई। अब उपचुनाव में अगर कमलनाथ सरकार को दोबारा से सत्ता में लाने में कामयाब न हुए तो मध्य प्रदेश में कांग्रेस का किला कमज़ोर होता ही चला जाएगा। यही वजह है कि कमलनाथ इस उपचुनाव में कोई भी ग़लती नहीं करना चाहते।

पहली बार संघ के आगे नतमस्तक हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया

वहींं चुनावी सरगर्मियों के बीच मध्य प्रदेश उपचुनाव (Madhya Pradesh bypolls) को लेकर चुनाव आयोग ने कहा है कि सभी 27 सीटों पर 29 नवंबर से पहले वोटिंग करा ली जाएगी। इलेक्शन कमीशन ने शुक्रवार को बड़ी घोषणा करते हुए कहा है कि, बिहार विधानसभा चुनाव के साथ ही उपचुनाव भी करवाए जाएंगे। चुनाव आयोग ने कहा कि, देश भर में 64 ऐसी विधानसभा सीट है जहां उपचुनाव होने हैं इसमें मध्य प्रदेश की 27 विधानसभा सीटें भी शामिल हैं।

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