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बीजेपी-सिंधिया के बीच ‘हनीमून पीरियड’ में ही शुरू हुई तू-तू मैं-मैं, टूटने की कगार पर गठबंधन!

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Ground Report News Desk | New Delhi

साल के शुरूआती दिनों में मध्य प्रदेश की सियासत उस वक्त गरमा गई थी जब अचानक दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छोड़ अपनी राइवल पार्टी बीजेपी का दामन थाम लिया था। ये सभी के लिए चौकाने वाली बात थी क्योंकि शायद ही ऐसा कोई पल या मौका न था जब अपने राजनीतिक बयानों में ज्योतिरादित्य सिंधिया भाजपा और उसके दिग्गज नेताओं को धूल न चटा देते हो। लेकिन कांग्रेस की ओर से तमाम कोशिशों के बाद भी जब बात नहीं बनी तो अंत में बागी सिंधिया ने बीजेपी का दामन थाम ही लिया।

अभी बीजेपी से गठबंधन को जुम्मा-जुम्मा चार दिन भी नहीं हुए हैं कि राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज़ हो गई है कि ये गठबंधन ज्यादा नहीं चल पाएगा। मध्य प्रदेश में 24 सीटों पर सितंबर में होने वाले उपचुनाव से पहले तक भी टिक पाएगा या नहीं इस पर भी संशय बरकरार है। राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, इस चुनाव में सबसे ज्यादा दबाव सिंधिया खेमे के 22 विधायकों और बीजेपी पर होगा क्योंकि लोगों ने कांग्रेस को चुना था लेकिन उन्होंने बाद में बीजेपी ज्वाइन कर ली।

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इस मामले में मध्य प्रदेश की बिजनेस राजधानी माने जाने वाले इंदौर शहर के एक अखबार इंदौरन समाचार ने खबर प्रकाशित करते हुए कहा है कि दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया और बीजेपी के बीच गठबंधन टूटने की कगार पर। हनीमून पीरियड्स में ही सिंधिया और भाजपा के बीच तू-तू-मैं-मैं।

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इतना ही नहीं इस खबर में यह भी कहा गया है कि, बड़ी उम्मीदों से पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा से नाता जोड़ा था लेकिन 2 महीने के भीतर ही इनमें तल्खियां बढ़नी शुरू हो गई है। ज्योतिरादित्य सिंधिया के भारी दबाव के बाद भी शिवराज मंत्री मंडल में अभी तक सिंधिया खेमें के विधायकों को जगह नहीं मिल पाई है।

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बता दें कि मध्य प्रदेश में दो महीने पहले कांग्रेस छोड़ने के बाद सिंधिया समर्थक 22 बागी विधायकों ने भी कांग्रेस को अलविदा कह दिया था। जिसके बाद अब इन सीटों पर जल्द ही उपचुनाव होने हैं। वहीं 2 अन्य सीटें पहले से ही खाली थी। इन सीटों पर जून के अंत में चुनाव में होना था लेकिन कोरोना को देखते हुए अब चुनाव सिंतबर अंत तक होने की उम्मीद है।

वहीं इस बात की भी खबर है कि कांग्रेस के बागी विधायकों के चलते बीजेपी में अंदरुनी कलह बढ़ती जा रही है। बीजेपी में शामिल होने के बाद कांग्रेस के इन विधायकों के चलते बीजेपी के जमीनी नेताओं के भविष्य पर भी संकट मंडराने लगा है। बीजेपी में बगावत के सुर उस वक्त चर्चा का विषय बन गए थे जब बीजेपी के पूर्व मंत्री दीपक जोशी ने पार्टी आलाअधिकारियों से कहा था कि अगर उनके बारे में विचार नहीं किया गया तो वे बीजेपी छोड़ अन्य विकल्प पर चर्चा करेंगे।

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गौरतलब है कि, मध्य प्रदेश की जौरा विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक बनवारीलाल शर्मा और आगर विधानसभा सीट बीजेपी विधायक मनोहर ऊंटवाल के निधन होने के चलते खाली है। वहीं बीते दिनों प्रदेश में हुए बड़े राजनीतिक फेरबदल के बाद दिग्गज नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया खेमे के 19 और तीन अन्य विधायकों समेत कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफे मंजूर होने के बाद रिक्त सीटों की संख्या बढ़कर 24 हो गई है। पहले इन पर जून में चुनाव होना थे लेकिन कोरोना के चलते अब चुनाव सिंतबर माह में होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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