चुनाव आयोग का बड़ा फैसला, तय समय पर होंगे मध्यप्रदेश में उपचुनाव

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चुनाव आयोग ने मध्यप्रदेश की 27 विधानसभा सीटों में होने वाले विधानसभा के उपचुनाव तय समय पर करवाने का फैसला लिया है। हालांकि अभी तरीखों को लेकर कोई फैसला नहीं लिया गया है। अगले दो माह में होने वाले मध्यप्रदेश उपचुनाव को लेकर चुनाव आयोग का यह बड़ा फैसला है। पहले राज्य चुनाव आयोग ने इस संबंध में कानून मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा था। जिसमें कहा गया था कि कोरोना की वजह से सितंबर में विधानसभा और लोकसभा के होने वाले उपचुनाव न कराए जाएं।

राज्य चुनाव आयोग द्वारा चुनाव स्थगन के प्रस्ताव पर कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा था कि भाजपा हार के डर से चुनाव स्थगित करवाना चाहती है। कांग्रेस ने राज्य में मतपत्रों से चुनाव कराने की मांग की है। इस पर गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि उपचुनाव में ईवीएम के बदले मतपत्रों से मतदान की कमलनाथ जी की मांग सिर्फ कांग्रेस की हताशा है। बटन दबाने से अगर कोरोना फैलने का डर है तो क्या मुहर लगाने से ये डर खत्म हो जाएगा?

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27 सीटों पर होना है उपचुनाव

मप्र में जौरा और आगर सीटों पर उपचुनाव की तिथि 6 माह के पार चली गई है। वहीं 10 मार्च को कांग्रेस के 22 विधायक इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए थे। 10 मार्च से 10 अगस्त तक 6 महीने पूरे हो रहे हैं। चुनाव 6 महीने के अंदर कराना जरूरी होता है। राज्य की नेपानगर, बड़ामलहरा, डबरा, बदवावर, भांडेर, बमौरी, मेहगांव, गोहद, सुरखी, ग्वालियर, मुरैना, दिमनी, ग्वालियर पूर्व, करेरा, हाटपिपल्या, सुमावली, अनूपपुर, सांची, अशोकनगर, पोहरी, अंबाह, सांवेर, मुंगावली, सुवासरा, जौरा, आगर-मालवा , मान्धाता विधानसभा सीटों पर चुनाव होना है।

कोरोना के बीच चुनाव पड़ेगा महंगा

देश में कोरोना संकट की वजह से चुनाव कराना मतदाताओं के जीवन को खतरे में डालने जैसा होगा। इसमें वोटिंग प्रतिशत कम रहने का भी अनुमान है। साथ ही महामारी के बीच 26 विधानसभा के चुनाव कराए जाने पर 50 करोड़ का अतिरिक्त खर्चा आएगा। प्रदेश में होने वाले इस मिनी विधानसभा उपचुनाव को लेकर चुनाव आयोग भी चिंतित है। इन सीटों पर सामान्य परिस्थितियों में चुनाव कराया जाता तो 21 करोड़ रुपए का खर्च आता, लेकिन कोविड-19 से बचाव के सभी उपाय करने की वजह से यह खर्च 71 करोड़ रुपए आएगा, यानी 50 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्चा। प्रत्येक सीट पर चुनाव खर्च 2 करोड़ 73 लाख रुपए आएगा।

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कब तक टलेगा चुनाव

नवंबर माह में बिहार में भी विधानसभा चुनाव होने हैं, बिहार भी कोरोनावायरस की चपेट में है तेजस्वी यादव समेत विपक्षी दल चुनावों को टालने की मांग कर रहे हैं। वही बीजेपी और नीतीश कुमार चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं। ऐसे में सवाल यही है कि क्या कोरोनावायरस की बढ़ती रफ्तार के बीच चुनाव जरुरी है? क्या चुनाव बूथों पर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ चुनाव करवा पाना चुनाव आयोग के बस में है? अगर चुनाव के दौरान जनता घरों से नहीं निकली तो क्या यह लोकतंत्र का अपमान नहीं होगा?

Written by Suyash Bhatt, He is a journalist based in Bhopal Madhya Pradesh.

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