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Madhya Pradesh By-elections : क्या ख़रीद-फरोख़्त की राजनीति करके उपचुनाव जीत पाएगी बीजेपी ?

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Madhya Pradesh By-elections : मध्य प्रदेश में लंबे समय से सियासी उठा-पठक जारी है। मध्य प्रदेश में 27 विधनासभा क्षेत्रों में होने वाला उपचुनाव बीजेपी और कांग्रेस के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा के तौर पर होने वाला है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि ख़रीद-फरोख़्त की राजनीति करने वाली बीजेपी क्या मध्य प्रदेश में कमलनाथ का सियासी भविष्य संकट में डाल देगी या शिवराज फिर सत्ता से बाहर हो जाएंगे। यही कारण है कि दोनों राजनीतिक दलों ने अपनी चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार गिरे लगभग 6 माह का समय गुज़र चुका है। बीजेपी का ख़रीद-फरोख़्त का खेल मध्य प्रदेश में चर्चा का बिंदू बना रहा है। सत्ता पर काबिज़ शिवराज और सिंधिया का भाजपा में शामिल होना क्या कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती है या कांग्रेस के लिय फायदेमंद, ये आगामी उपचुनाव में सबके सामने होगा।

मध्य प्रदेश के कमलनाथ ने कांग्रेस के सांसद दिग्विजय सिंह के विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोपों को सही ठहराया था। कमलनाथ ने कहा था कि विधायक ही बता रहे हैं कि उन्हें इतना पैसा दिया जा रहा है। वहीं, राज्य की भारतीय जनता पार्टी ने पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के आरोपों को खारिज कर दिया। उन पर झूठ बोलने का आरोप भी लगाया था।

कांग्रेस के 22 विधायकों के इस्तीफे देने के बाद विधायक ख़रीद-फरोख़्त का मामला ज़ोरो पर था। कमलनाथ ने उनकी सरकार गिराने के पीछे केंद्र पर आरोप लागए थे। वर्तमान केंद्रीय गृहमंत्री और पूर्व बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पर मध्य प्रदेश में सरकार गिराने का आरोप भी लगते रहे हैं। अब सवाल ये है कि क्या मध्य प्रदेश में आगामी उपचुनाव में ख़रीद-फरोख्त की राजनीति करने वाली बीजेपी उपचुनाव में कांग्रेस की राह को और मुश्किल बना देगी या फिर भाजपा को सत्ता के बेदखली का मुंह देखना पड़ेगा।

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Madhya Pradesh bypolls : अपनी साख बचाने के लिए फूंक-फूंक कर क़दम रख रहे कमलनाथ

230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में 25 सदस्यों के इस्तीफे और दो की असामयिक निधन के बाद सदस्यों की संख्या घट कर 203 हो गई है। वहीं भाजपा के पास मौजूदा बहुमत से तीन ज्यादा 106 विधायक हैं।

चूंकि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इनमें से ज्यादातर सीटों पर बड़ी जीत हासिल की थी, इसलिए माना जा रहा है कि इस उपचुनाव में भी वह भाजपा को यहां पर कड़ी टक्कर देगी। अपने सहयोगियों के साथ इस समय 99 पर टिकी कांग्रेस को अगर 27 में 16-17 सीटें भी मिल जाती हैं, तो मध्यप्रदेश में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।

ज्योतिरादित्य सिंधिया का फैक्टर उपचुनाव में कितना असर डालेगा, यह इस मामले का सबसे बड़ा पेंच है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि सिंधिया उपचुनाव में भाजपा को बड़ा फायदा पहुंचाने की स्थिति में नहीं हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ एक जबरदस्त लहर थी, जिसका फायदा कांग्रेस को मिला था।

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वहीं चुनावी सरगर्मियों के बीच मध्य प्रदेश उपचुनाव (Madhya Pradesh By-elections) को लेकर चुनाव आयोग ने कहा है कि सभी 27 सीटों पर 29 नवंबर से पहले वोटिंग करा ली जाएगी। इलेक्शन कमीशन ने शुक्रवार को बड़ी घोषणा करते हुए कहा है कि, बिहार विधानसभा चुनाव के साथ ही उपचुनाव भी करवाए जाएंगे। चुनाव आयोग ने कहा कि, देश भर में 64 ऐसी विधानसभा सीट है जहां उपचुनाव होने हैं इसमें मध्य प्रदेश की 27 विधानसभा सीटें भी शामिल हैं।

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