ज्योतिरादित्य सिंधिया व उनके सचिव पर चुनाव के टिकट बेचने का आरोप !

मध्य प्रदेश उपचुनाव का रिजल्ट तय करेगा सिंधिया गद्दार हैं या खुद्दार!

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मध्य प्रदेश में 27 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में शिवराज सरकार और ज्योतिरादित्य सिंधिया का राजनैतिक भविष्य टिका हुआ है। कहने को तो ये चुनाव भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीच होगा, लेकिन केन्द्र में अगर कोई होगा तो वे होंगे ज्यातिरादित्य सिंधिया, न कि मौजूदा मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और न ही पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ। 27 सीटों में से 22 सीटें ऐसी हैं जिनके विधायकों ने सिंधिया के समर्थन में कांग्रेस से इस्तीफा दिया था, जिससे 15 वर्षों बाद कांग्रेस के हाथ आई सत्ता उससे छिन गई है।

Sachin Tripathi | Bhopal

ऐसे में इन सभी प्रत्याशियों की जीत की सारी जिम्मेदारी सिंधिया पर है वैसे तो इनमें से 16 सीटें ऐसी हैं जो ग्वालियर और चम्बल से आती हैं, जहां सिंधिया का अच्छा खासा प्रभाव है। ऐसे में इन उपचुनाओं के परिणाम यह तय करेंगे कि सिंधिया गद्दार हैं या खुद्दार। अनुकूल परिणाम आने पर जहां भाजपा में जाने के सिंधिया के फैसले पर जनता की मुहर लग जाएगी, और भाजपा में उनका कद और बढ़ जाएगा, वहीं परिणाम विपरीत आने से राष्ट्रीय नेता की उनकी छवि क्षेत्रीय नेता तक सीमित होकर रह जाएगी और आने वाले समय में उनके लिए भाजपा में एडजस्ट होना आसान नहीं होगा।

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कुल मिलाकर उपचुनाव भले ही दो राजनौतिक दलों के बीच होने जा रहा है, इसमें एक की सरकार बन सकती है और दूसरे की सरकार गिर सकती हो लेकिन चुनाव परिणामों से एक नेता विशेष के भविष्य का फैसला जरूर होगा। वैसे भी उपचुनाव न तो भाजपा के लिए आसान है और न ही कांग्रेस के लिए, जहां-जहां उपचुनाव होने जा रहे हैं वे सभी क्षेत्र कांगे्रस के गढ़ रहे पर अब परिस्थितियां बदली हैं। 2018 के चुनाव में ग्वालियर-चंबल की 34 में 26 सीटें दिलवाने वाले सिंधिया अब भाजपा के साथ खड़े हैं और यहां की 16 सीटों पर उपचुनाव होने जा रहा है। इसके अलावा मालवा-निमाड़ की 7, भोपाल, सागर और शहडोल संभाग की एक-एक सीट पर चुनाव होंगे।

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बसपा की होगी अहम भूमिका
प्रदेश में होने जा रहे उपचुनाव में सीधे तैर पर भले ही भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला होता नजर आ रहा हो पर सच्चाई यह है कि दोनों दलों की हार और जीत में अहम भूमिका बसपा की होगी। अमूमन उपचुनाव से दूरी बनाए रखने वाली बहुजन समाज पार्टी ने उपचुनाव में सभी 27 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने का फैसला किया है। इन 27 सीटों में आधे से ज्यादा सीटें उन इलाकों में हैं, जहां बीएसपी का अच्छा खासा दखल है। कभी इन जगहों की सीटों पर बसपा उम्मीदवार विजयी रहे हैं, तो कभी दूसरे और तीसरे नंबर पर।

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उपचुनाव के दौरान बसपा भले ही यहां कोई सीट न जीत पाए, लेकिन नुकसान करने की स्थित में वह अवश्य रहेगी ,बसपा के लड़ने से अगर किसी को नुकसान होगा तो वह है कांग्रेस। राजस्थान के घटनाक्र्रम के बाद से बसपा और कांगेस के रिश्तों में राष्ट्रीय स्तर पर खटास आई है, जिसके बाद से यह तय माना जा रहा है कि कांग्रेस को नुकसान पहुंचाने के लिए बसपा उपचुनावों में अपने प्रत्याशी जरूर उतारेगी। अगर बसपा उपचुनाव में अपने प्रत्याशी उतार देती है तो कांग्रेस के लिए राह कठिन हो जाएगी और इसका सबसे ज्यादा फायदा सत्तारूढ़ दल भाजपा और कांग्रेस से भाजपा में आए ज्योतिरादित्य सिंधिया को होगा, जो भाजपा में आने के अपने फैसले को सही ठहराने की कोशिश में लगे हुए हैं।

मध्य प्रदेश की वो 27 सीटें जिन पर चुनाव होना है
मध्य प्रदेश में जौरा और आगर सीटों पर उपचुनाव की तिथि 6 माह के पार हो चुकी है। वहीं 10 मार्च को कांग्रेस के 22 विधायक इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल हो गए थे। 10 मार्च से 10 अगस्त तक 6 महीने पूरे हो चुके हैं। नियमों के मुताबिक, चुनाव 6 महीने के अंदर कराना जरूरी होता है। राज्य की नेपानगर, बड़ामलहरा, डबरा, बदवावर, भांडेर, बमौरी, मेहगांव, गोहद, सुरखी, ग्वालियर, मुरैना, दिमनी, ग्वालियर पूर्व, करेरा, हाटपिपल्या, सुमावली, अनूपपुर, सांची, अशोकनगर, पोहरी, अंबाह, सांवेर, मुंगावली, सुवासरा, जौरा, आगर-मालवा , मान्धाता विधानसभा सीटों पर चुनाव होना है।

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