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मुरैना की अंबाह सीट से किन्नर नेहा की दावेदारी ने बढ़ाई शिवराज-सिंधिया की टेंशन, कमलनाथ भी मुश्किल में

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मध्य प्रदेश उपचुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिंधिया की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले बीएसपी ने सभी सीटों पर अपने प्रत्याशियों की घोषणा की। इसके बाद अब निर्दलीय विधायक भी मैदान में हैं। खबर है कि मुरैना की एक सीट से एक किन्नर ने चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। इसके बाद कांग्रेस बीजेपी और बीएसपी सहित अन्य दलों में हलचल तेज हो गई है। मुरैना जिले की अंबाह विधानसभा सीट से किन्नर नेहा ने अपनी दावेदारी पेश कर दी है।

मध्य प्रदेश उपचुनाव में अंबाह विधानसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार किन्नर नेहा ने चुनाव प्रचार शुरू कर दिया है। अंबाह सीट से कांग्रेस के टिकट से सत्यप्रकाश सखवार मैदान में हैं तो वहीं बीजेपी के संभावित उम्मीदवार कमलेश जाटव तो वहीं बीएसपी से भानूप्रताप सिंह सखवार मैदान में हैं। किन्नर नेहा के इस सीट से दावेदारी के बाद साफ है कि कहीं न कहीं वोटों का ध्रुविकरण होगा और नुकसान तीनों ही पार्टी को होगा। मुरैना जिले की अंबाह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों में से एक हैं।

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अंबाह सीट से कांग्रेस उम्मीदवार सत्यप्रकाश और बीजेपी के संभावित उम्मीदवार कमलेश जाटव के लिए मुश्किलें इसलिए भी बढ़ गई हैं कि किन्नर नेहा बेड़िया समाज से ताल्लुक रखती हैं और इस इलाके में इस समाज के मतदाताओं की संख्या अधिक है। पिछली बार साल 2018 में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भी किन्नर नेहा इस सीट से चुनाव लड़ चुकी हैं और इस दौरान वे दूसरे नंबर पर रहीं थीं और कांग्रेस उम्मीदवार कमलेश जाटव से महज साढ़े सात हजार वोटों से हार गईं थीं।

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लेकिन कमलेश सिंधिया गुट के उन बागी उम्मीदवारों में से एक हैं जो कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। जिसके चलते इलाके में उन्हें भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा है। जिसका फायदा कांग्रेस उम्मीदवार सत्यप्रकाश सखवार और किन्नर नेहा और बीएसपी के भानुप्रताप उठा सकते हैं। बता दें कि चुनाव आयोग ने तारीखों का ऐलान करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश की सभी 28 सीटों पर उपचुनाव के लिए 3 नवंबर को वोटिंग होगी और 10 नवंबर को नतीजे घोषित किए जाएंगे।

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