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मध्य प्रदेश उपचुनाव: पहली बार आमने-सामने होंगे सिंधिया-पायलट, कमलनाथ ने सौंपी अहम जिम्मेदारी

Madhya Pradesh by-elections 2020: Jyotiraditya Scindia-Sachin Pilot will be face-to-face for the first time, Kamal Nath handed over important responsibility
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मध्य प्रदेश में 28 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव में कांग्रेस सचिन पायलट को उपचुनाव प्रचार में उतारने की तैयारी कर रही है। ये पहला मौका होगा जब सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिाय आमने सामने होंगे। सचिन पायलट को मध्य प्रदेश में चुनाव प्रचार में उतारने के पीछे कांग्रेस की कोई सोची-समझी रणनीति हो सकती है हांलाकि पायलट को अभी मैदान में उतारने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है लेकिन चर्चा है कि कांग्रेस सिंधिया के गढ़ ग्वालियर चंबल में सचिन को चुनाव प्रचार के लिए अहम जिम्मेदारी सौंप सकती है।

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बता दें कि कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो चुके राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट दोनों बहुत अच्छे दोस्त रहे हैं। बीते दिनों राजस्थान में अपनी ही सरकार के खिलाफ बगावती तेवर दिखाने वाले पायलट के समर्थन में सिंधिया ने भी जमकर बयानबाजी की थी। बता दें कि मध्य प्रदेश में जिन 28 सीटों पर विधानसभा के उपचुनाव होने हैं, उनमें से अधिकतर सीटें ग्वालियर-चंबल इलाके की हैं, जिसे सिंधिया का प्रभाव क्षेत्र वाला माना जाता है।

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इस साल मार्च में सिंधिया के बगावती तेवरों के बाद कांग्रेस छोड़ने के बाद उनके समर्थक 22 विधायकों ने भी कांग्रेस छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया था। ग्वालियर चंबल की जिन 16 सीटों पर उपचुनाव होना है उसमें से अधिकतर इलाका राजस्थान की सीमा से सटा हुआ है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि पायलट इन इलाकों में बेहतर साबित हो सकते हैं। इस मामले में सचिन पायलट ने बताया कि मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने उनसे उपचुनाव में प्रचार करने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि, वे पार्टी के लिए निश्चित रूप से यह काम करेंगे।

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वहीं बीजेपी में शामिल हुए सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया को कदम-कदम पर विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ रहा है। चंबल की 16 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के दौरान रैलियां कर रहे सिंधिया का न सिर्फ कांग्रेस कार्यकर्ता विरोध कर रहे हैं बल्कि बीजेपी में उन्हें लेकर अंदरुनी कलह बनी हुई है। क्योंकि कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए 22 बागी विधायकों के बाद बीजेपी के अपने उम्मीदवार और क्षेत्र के कद्दावर नेताओं के राजनीतिक भविष्य पर तलवार लटक चुकी है।

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देखना होगा कि इस उपचुनाव में शिवराज-सिंधिया फैक्टर कितना सार्थक साबित होता है और कमलनाथ की रणनीति क्या रंग लाती है। चुनाव आयोग पहले ही साफ कर चुका है कि मध्य प्रदेश में उपचुनाव बिहार चुनाव के साथ ही होंगे। चुनाव आयोग ने कहा है कि नवंबर से पहले-पहले चुनाव होंगे हांलाकि तारीख की घोषणा अभी नहीं की गई है लेकिन उम्मीद जताई जा रही है कि मध्य प्रदेश में 15 नवंबर तक उपचुनाव हो सकते हैं।

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