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Madhya Pradesh By-Elections 2020: कैसा है ग्वालियर सीट का राजनीतिक समीकरण, समझें एक क्लिक में

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Madhya Pradesh By Elections 2020 || Gwalior Assembly By Elections 2020 || Gwalior Seat || 230 विधानसभा सीटों वाले मध्य प्रदेश में ग्वालियर निर्वाचन क्षेत्र एक प्रमुख और राजनीतिक महत्व रखता है। दो लाख 77 हज़ार से भी अधिक मतदाताओं से निहित ये क्षेत्र एक बार फिर चुनावी संग्राम की ओर अग्रसर हो चुका है। साल 2018 में हुए चुनाव में कांग्रेस के प्रद्युम्न सिंह तोमर ने जीत दर्ज की लेकिन 15 महीने बाद ही ज्योतिरादित्य सिंधिया के बागी तेवरों के बाद प्रदेश में राजनीतिक हलचल के बाद तोमर भी कांग्रेस छोड़ भाजपा में शामिल हो गए। इसके चलते दो से भी कम के अंतर में ग्वालियर की जनता को एक बार फिर अपने प्रतिनिधित्वकर्ता को चुनना है। मौका है प्रदेश की 28 सीटों पर उपचुनाव का और उनमें से एक सीट है ग्वालियर। इस बार कमलनाथ ने सुनील शर्मा को कांग्रेस के टिकट से ग्वालियर सीट प्रत्याशी बनाया है।

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ग्वालियर विधान सभा क्षेत्र का इतिहास :
यह निर्वाचन क्षेत्र वर्ष 1951 में अस्तित्व में आया था, जो की तत्कालीन राज्य मध्य भारत की 79 विधानसभा क्षेत्रों में से एक था। ग्वालियर, इंदौर और मालवा की रियासतों ने मिलकर 75 सदस्यीय विधान सभा का गठन 1948 में किया था। जिसमे से की 40 प्रतिनिधि ग्वालियर राज्य के थे, 20 इंदौर के और बाकी 15 अन्य छोटी रियासतों से थे। इस सभा का पहला अधिवेशन भी मार्च, 1952 में ग्वालियर में हुआ था। मध्य प्रदेश राज्य के गठन के बाद से ये क्षेत्र कुछ वक़्त तक तो हिन्दू महासभा और जनता पार्टी के अंतग्रत रहा पर 1980 के बाद से यहां पर कांग्रेस और भाजपा का शासन आता-जाता रहा और किसी अन्य दल को यहां पर काबिज होने का मौका नहीं मिला।

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कुछ महत्वपूर्ण आंकड़े :
ग्वालियर (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 15) ग्वालियर जिले में स्थित 6 विधानसभा क्षेत्रों में से एक है। ग्वालियर को एक शहरी सीट के प्रारूप में देखा जाता है, इस निर्वाचन क्षेत्र में ग्वालियर नगर निगम के वार्ड संख्या 1 से 18 और 30 से 33 तक आते हैं। ये ग्वालियर लोक सभा क्षेत्र के अंदर आने वाली 8 विधानसभा सीटों में से एक है। वर्ष 2013 में 61 % वोटिंग दर्ज की गई थी तो वहीं 2018 के चुनाव में 63% का वोटिंग दर दर्ज़ की गई। इस वोटिंग के साथ ही कांग्रेस के प्रद्युम्न सिंह तोमर को ग्वालिय विधानसभा की जनता ने अपना सिरमौर चुना। लेकिन अब प्रद्युम्न सिंह तोमर उन बागी विधायकों में से हैं जो कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हो गए हैं। वहीं महामारी को देखते हुए, मतदाताओं के बीच सोशल डिस्टैन्सिंग बनाये रखने के लिए इस बार पोलिंग स्टेशन की संख्या बढ़ाकर 300 से ज्यादा है। ग्वालियर सीट पर तकरीबन 1,50,700 से भी अधिक पुरुष और 1,27,300 से अधिक महिला वोटर हैं।

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क्या कहता है चुनाव का रुझान :
1980 के दशक से ही ग्वालियर की सीट पे कांग्रेस और भाजपा के बीच में भिड़ंत नज़र आयी है। पिछले चार चुनाव में दो बार भाजपा को जीत मिली है तो वही दो बार कांग्रेस को पर इस बार के चुनाव की परिस्थिति अलग है क्योंकि दोनों बार कांग्रेस को जीत दिलवाने वाले प्रद्युम्न सिंह तोमर इसी वर्ष मार्च में भाजपा में शामिल हो गए है। कांग्रेस ने इस भार ग्वालियर सीट की कमान सुनील शर्मा को दी है। हालांकि इस बार ये देखने लायक होगा की जनता किसको चुनती है – अपने जननेता को या फिर अपनी पार्टी को। सिंधिया के भाजपा के खेमे में चले जाने से, भाजपा को स्थिरता तो मिली ही है, पर चुनावी मंच में ये कितना सफल कामयाब होते है ये भी एक प्रश्न का विषय बन चुका है।

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हाल ही में हुई सिंधिया की रैली में उनको काफी विरोध का सामना पड़ा था। लोगो ने काले कपडे दिखा कर और गद्दार के नारे लगते हुए उनके रोड शो को रोकने का प्रयास भी किया था। तो वही कांग्रेस भी यही चाहेगी की उसे एक बार फिर से मध्य प्रदेश की सत्ता मिले। 15 साल बाद मिली राज्य में सत्ता को मात्र 15 महीने में गवा देने से उन्हें सियासी स्तर पे काफी धक्का तो लगा ही और साथ साथ में आलोचनाओं का भी शिकार होना पड़ा।

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