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मध्य प्रदेश उपचुनाव: ग्वालियर-चंबल में जिसने जातियों को साध लिया, बाजी उसकी!

दिग्विजय बोले- बीजेपी चुनाव अधिकारियों के दम पर जीतना चाहती है उपचुनाव
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मध्य प्रदेश में जिन 27 सीटों पर उपचुनाव होना है उसमें ग्वालियर चंबल की 16 सीटों पर जिसने जातियों को साध लिया वो चुनाव जीत जाएगा। राजनैतिक विशेषज्ञों का कहा है कि ग्वालियर-चंबल में एक भी सीट ऐसी नहीं है, जहां बात जाति के बिना होती हो। इस बार भी जातिगत समीकरणों को देखते हुए टिकट बांटे जाएंगे। क्षेत्र में छोटी-छोटी जातियों के साथ ही ठाकुर, गुर्जर, ब्राह्मण, ओबीसी, अनुसूचित जातियों के प्रत्याशियों के बीच वोटों का ध्रुवीकरण करने की कोशिशें की जाएगी।

ग्वालियर-चंबल से 76 हज़ार कांग्रेस कार्यकर्ता हुए बीजेपी में शामिल

हांलाकि, साल 2013 में मध्य प्रदेश के चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा था कि कोई भी राजनैतिक दल, नेता धर्म, जाति व भाषा के आधार पर वोट नहीं मांग सकता। चुनाव में धर्म का इस्तेमाल करना गैर कानूनी है। चुनाव के दौरान धर्म-जाति के आधार पर वोट नहीं मांगे जाने चाहिए। लेकिन चुनाव के दौरान जाति के आधार पर उम्मीदवारों को टिकट दिए जाने की परंपरा बीते लंबे वक्त से चली आ रही है। इसे सही नही माना जाना चाहिए और जाति, धर्म, सम्प्रदाय, भाषा के आधार चुनाव नहीं जीते जा सकते।

मध्य प्रदेश उपचुनाव: ग्वालियर-चंबल संभाग की वो 16 सीटें जिन पर होना है उपचुनाव

अंचल में ठाकुरों की आबादी को देखते हुए तोमर, राजपूत, भदौरिया, सिकरवार जैसे उपनाम वाले प्रत्याशी मैदान में लड़ते हैं। वहीं ओबीसी के वोटों को ध्यान में करते हुए यादव, बघेल, लोधी, रावत, किरार, मीणा आदि जातियों को लड़ाया जाएगा। दोनों ही दलों वैश्य समुदाय से एक-एक प्रत्याशी को टिकट दे सकते है।

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ग्वालिय-चंबल की वो 16 सीटें जिन पर चुनाव होना है
मेहगांव, गोहद, ग्वालियर, लश्कर पूर्व, डबरा, मुरैना, जोरा, दिमनी, अंबाह, सुमावली, भांडेर, पोहरी, करेरा, मुंगावली, अशोक नगर, बमोरी। वहीं अगर प्रत्याशियों की बात करें तो 16 में से 15 सीटों पर बीजेपी के नाम लगभग तय है। वहीं कांग्रेस जातिगत समीकरण को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशियों का चयन करेगी।

क्या बीजेपी के नेताओं में असंतोष का फायदा उठा पाएगी कांग्रेस ?

बीजेपी-कांग्रेस-बीएसपी सहित कई दल इस चुनावी मैदान में
27 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए चुनाव आयोग की सक्रियता को देखते हुए बीजेपी और कांग्रेस सहित तीसरे मोर्च ने भी मध्य प्रदेश की जनता के बीच अपनी राजनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। बीएसपी ने भी इन उपचुनाव में सभी 27 सीटों पर अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया है। बुहजन समाज पार्टी ने सभी 27 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है। वहीं दल-बदल के चलते जमीनी स्तर पर बीजेपी में कलह की स्थिति बरकरार है। बीजेपी कार्यकर्ता इस बात से नाराज है कि कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए विधायकों को टिकट क्यों।

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पहली बार 27 सीटों पर उपचुनाव
मध्य प्रदेश की राजनीति के इतिहास में ये पहला मौका है कि जब एक साथ सबसे ज्यादा 27 विधानसभा सीटों पर उप चुनाव हो रहे हैं। इनमें से अधिकतर सीटें ग्वालियर-चंबल संभाग की हैं। सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद 25 विधायकों ने कांग्रेस दामन छोड़ दिया था। इसके बाद कांग्रेस के पास अब सिर्फ 89 विधायक हैं। बीएसपी के पास 2, समाजवादी पार्टी के पास -1 जबकी प्रदेश में 4 ऐसे भी विधायक हैं जो निर्दलीय विधायक हैं। वहीं बीजेपी के पास वर्तमान में 107 विधायक हैं। मध्य प्रदेश में सरकार बनाने के लिए जादूई आंकड़ा 116 है। ऐसे में बीजेपी को सिर्फ 9 विधायकों की जरूरत है।

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