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मध्य प्रदेश उपचुनाव से पहले शिवराज को बड़ा झटका, बीजेपी नेता सिकरवार कांग्रेस में शामिल

मध्य प्रदेश उपचुनाव : अशोक दांगी ने फिर थामा अपने कार्यकर्ताओं संग कांग्रेस का दामन
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मध्य प्रदेश उपचुनाव से पहले मुख्यंत्री शिवराज सिंह चौहान को बड़ा झटका लगा है। ग्वालियर के दिग्गज भाजपा नेता डॉ.सतीश सिकरवार बीजेपी का दामन छोड़ कांग्रेस में शामिल हो गए हैं। सतीश सिकरवार ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के निवास पर मुलाकात कर अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ भेंट कर कांग्रेस मे शामिल हो गए हैं। इस दौरान पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने तिरंगा दुपट्टा पहनाकर सतीश सिकरवार का स्वागत किया और कार्यकर्ताओं को कांग्रेस में शामिल होने पर उन्हें बधाई और शुभकामनाएं दीं।

बीजेपी छोड़ सतीश सिकरवार का यूं अचानक कांग्रेस शामिल में होना ज्योतिरादित्य सिंधिया और शिवराज सिंह चौहान के लिए किसी झटके से कम नहीं है। क्योंकि सिकरवार की ग्वालियर बीजेपी में अच्छी-खासी पैंठ हैं और यहां जनता और कार्यकर्ता पर उनकी पकड़ मजबूत है। अब कांग्रेस में शामिल होने पर इसका फायदा कमलनाथ को होगा।

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बता दें कि इससे पहले मध्यप्रदेश के शिवपुरी जिले की करेरा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके प्रागी लाल जाटव ने 2 दर्जन से अधिक बड़े नेताओं के साथ कांग्रेस की सदस्यता ली थी। पूर्व सीएम कमलनाथ से मिलने के बाद पूर्व विधानसभा अध्यक्ष नर्मदाप्रसाद प्रजापति, पूर्व मंत्री पीसी शर्मा, सज्जन वर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष रामनिवास रावत सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने बसपा नेताओं को कांग्रेस की सदस्यता दिलाई थी।

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बसपा से डबरा की तीन बार नगर पालिका अध्यक्ष, महासचिव, जिला अध्यक्ष रहीं सत्यप्रकाशी परसेणीयां, महामंत्री भाजपा केशव बघेल, फेरणसिंघ कुशवाह, रामेश्वर परिहार पार्षद बसपा, सुरेश पाल, नरेश प्रजापति, रामावतार सिंह, बाबूलाल गौर, अशोक कुशवाह, बुदनी से अमन सूर्यवंशी, रामेश्वर परिहार, दिनेश खटीक समेत कई नेता कांग्रेस की सदस्यता ले चुके हैं।

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बता दें कि, 15 महीनों में सत्ता बेदखल होने वाली कांग्रेस मध्य प्रदेश उपचुनाव (MP by-elections) में सभी 27 सीटों को जीतने का दावा कर रही है। कांग्रेस के कुछ नेताओं और पार्टी के राणनीतिकारों से मिल रही ख़बरों की माने तो कांग्रेस पार्टी का सारा फोकस 12 से 15 उन सीटों पर है जिसमें उसे आसानी से फतह मिलने की उम्मीद है और कांग्रेस का इन सीटों पर दबदबा बना रहा है।

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जिन 27 सीटों पर चुनाव होने हैं उनमें से 22 ऐसी सीटें हैं जिसके विधायक कांग्रेस छोड़कर सिंधिया के साथ भाजपा में शामिल हुए थे। इसकी वजह से सरकार गिरी थी और कमलनाथ मुख्यमंत्री से पूर्व सीएम हो गए थे। कांग्रेस और कमलनाथ के पास उपचुनावों में खोने के लिए कुछ नहीं है, पर पाने के लिए बहुत कुछ है।

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पार्टियों की स्थिति पर ग़ौर करें तो सतही तौर पर बीजेपी में कांग्रेस के मुकाबले असंतोष कहीं ज्यादा नज़र आ रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि 25 विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी को उन लोगों को उम्मीदवार बनाना पड़ रहा है जो पिछले दिनों कांग्रेस छोड़कर पार्टी में शामिल हुए हैं। इस स्थिति ने ही पार्टी में असंतोष के बीज बोए हैं। उधर कमलनाथ इसी असंतोष का फायदा उठाने की पूरी कोशिश में लगे हुए हैं। इसके साथ ही कमलनाथ सिंधिया पर लगातार ज़ुबानी हमले कर रहे रहैं।

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