बड़ी संख्या में बीजेपी और आप कार्यकर्ता कांग्रेस में हुए शामिल

Madhya Pradesh by Elections 2020 : क्या इस चुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया का निपटना तय ?

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Madhya Pradesh by Elections 2020 : ज्योतिरादित्य सिंधिया का फैक्टर उपचुनाव में कितना असर डालेगा, यह इस मामले का सबसे बड़ा पेंच है। स्थानीय नेताओं का कहना है कि सिंधिया उपचुनाव में भाजपा को बड़ा फायदा पहुंचाने की स्थिति में नहीं हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा के खिलाफ एक जबरदस्त लहर थी, जिसका फायदा कांग्रेस को मिला था।

मध्य प्रदेश में सियासी सर-गर्मियां तेज़ हो चुकीं हैं। प्रदेश में 27 विधनासभा क्षेत्रों में होने वाला उपचुनाव बीजेपी और कांग्रेस के लिए एक बड़ी अग्निपरीक्षा के तौर पर होने वाला है। मगर इसके साथ ही इस चुनाव को काफी दिलचस्प बनाने वाला ज्योतिरादित्य सिंधिया फैक्टर है। सिंधिया की साख दांव पर लगी हुई है। वहीं कमलनाथ का राजनीतिक भविष्य भी इस चुनाव पर टिका सा लग रहा है।

पार्टियों की स्थिति पर ग़ौर करें तो सतही तौर पर बीजेपी में कांग्रेस के मुकाबले असंतोष कहीं ज्यादा नज़र आ रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि 25 विधानसभा क्षेत्रों में बीजेपी को उन लोगों को उम्मीदवार बनाना पड़ रहा है जो पिछले दिनों कांग्रेस छोड़कर पार्टी में शामिल हुए हैं। इस स्थिति ने ही पार्टी में असंतोष के बीज बोए हैं। उधर कमलनाथ इसी असंतोष का फायदा उठाने की पूरी कोशिश में लगे हुए हैं। इसके साथ ही कमलनाथ सिंधिया पर लगातार ज़ुबानी हमले कर रहे रहैं।

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वहीं सिंधिया भी कमलनाथ पर लगातार हमलावर हैं। ग्वालियर के दो दिवसीय दौरे पर गए पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के संभावित दौरे को लेकर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने कहा है कि प्रदेश की जनता उनका पंद्रह माह का शो देख चुकी है पता नहीं अब कौन सा शो करने वाले हैं।

मध्य प्रदेश उपचुनाव में ज्योतिरादित्य सिंधिया की साख ही नहीं बल्की राजनीतिक करियर भी दांव पर लगा है। कांग्रेस से भाजपा में शामिल होलने के बाद भले ही सिंधिया राज्यसभा सासंद बना दिए गए हों लेकिन रास्ता अभी लंबा है। कहा ये भी जा रहा है कि ये चुनाव न सिर्फ सिंधिया की साख का है बल्की इससे उनका राजनीतिक भविष्य भी तय होगा।

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कांग्रेस छोडने के बाद सिंधिया पहले ही अपने इलाके में जनता का भारी विरोध झे लरे हैं। लोगों का कहना है कि हमने बीजेपी से तंग आकर ही कांग्रेस को चुना था लेकिन महाराजा की ये गद्दारी बर्दाश्त नहीं। अब तो सब एक ही है क्या बीजेपी क्या कांग्रेस। समझ नहीं आता कौन कब किस पार्टी में शामिल हो जाए।

चर्चा तो ये भी है कि कदम-कदम पर अपने गुरूर, अंहकार और मान-सम्मान की बात करने वाले सिंधिया इस चुनाव अपने कट्टर विरोधियों से भी बड़ी ही विनम्रता से मिलकर उनका मनमुटाव दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। मामला इंदौर का है जहां उनके सबसे करीबी और विश्वसनीय माने जाने वाले कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट सांवेर सीट से उपचुनाव लड़ रहे हैं और सिंधिया सिलावट के लिए जीत का रोडमेप तैयार कर रहे हैं।

230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में 25 सदस्यों के इस्तीफे और दो की असामयिक निधन के बाद सदस्यों की संख्या घट कर 203 हो गई है। वहीं भाजपा के पास मौजूदा बहुमत से तीन ज्यादा 106 विधायक हैं।

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चूंकि पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इनमें से ज्यादातर सीटों पर बड़ी जीत हासिल की थी, इसलिए माना जा रहा है कि इस उपचुनाव में भी वह भाजपा को यहां पर कड़ी टक्कर देगी। अपने सहयोगियों के साथ इस समय 99 पर टिकी कांग्रेस को अगर 27 में 16-17 सीटें भी मिल जाती हैं, तो मध्यप्रदेश में एक बार फिर बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है।

वहीं चुनावी सरगर्मियों के बीच मध्य प्रदेश उपचुनाव (Madhya Pradesh by Elections 2020) को लेकर चुनाव आयोग ने कहा है कि सभी 27 सीटों पर 29 नवंबर से पहले वोटिंग करा ली जाएगी। इलेक्शन कमीशन ने शुक्रवार को बड़ी घोषणा करते हुए कहा है कि, बिहार विधानसभा चुनाव के साथ ही उपचुनाव भी करवाए जाएंगे। चुनाव आयोग ने कहा कि, देश भर में 64 ऐसी विधानसभा सीट है जहां उपचुनाव होने हैं इसमें मध्य प्रदेश की 27 विधानसभा सीटें भी शामिल हैं।

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