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मोदी सरकार के कृषि कानून और CM शिवराज के मंडी एक्ट से किसानों को भारी नुकसान: कुणाल चौधरी

Madhya Pradesh By Elections 2020 Congress MLA Kunal Choudhary on Farmers Bill and Mandi act BJP shivraj and modi sarkar
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केंद्र की बीजेपी सरकार द्वारा किसनों और कांग्रेस पार्टी के निरंतर विरोध के बाद भी हाल ही में मनमाने तरीके से संसद में तीन कृषि विधेयक पारित किए और राष्ट्रपति ने मंजूरी के बाद अब यह कानून बन गए। जिसके साथ ही अब देशभर में कृषि क्षेत्र में निजीकरण शुरू हो चूका है। इसका असर अब मध्य प्रदेश में भी दिखना शुरू हो चूका है। मध्य प्रदेश यूथ कांग्रेस अध्यक्ष और कालापीपल से कांग्रेस के विधायक कुणाल चौधरी ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन काले कृषि कानून और मध्य प्रदेश सरकार के मंडी एक्ट की वजह से किसानों को भारी नुकसान होना शुरू हो रहा है। कुणाल चौधरी ने कहा कि बीजेपी सरकार के काले कानूनों के खिलाफ मध्य प्रदेश की कृषि उपज मंडियों में कर्मचारियों की हड़ताल से नीलामी प्रक्रिया बंद है, जिसकी वजह से व्यापारी किसानों के खेत पर जाकर यानि सड़क व गली-मोहल्लों में उपज की नीलामी कर रहा है।

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कुणाल चौधरी ने कहा कि, इन किसान विरोधी कानूनों की वजह से आज मंदसौर में किसान को 4 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक बिकने वाली सोयाबीन के दाम कम से कम 1500 से 2500 रुपए के बीच दिए जा रहे हैं, यानी किसान को सीधे आधे से भी कम पैसा मिल रहा और अब किसानों की मजबूरी है कि उसे नई फसल की तैयारी करना है, वहीं पहले ही किसान क़र्ज़ में डूबा हुआ है और बेमौसम हुई बारिश की वजह से अधिकांश किसानों को खेतों में कड़ी हुई सोयाबीन समेत एनी फसल पूरी तरह चौपट होगई है। और उसके मुआवजा भी सरकार नहीं दे रही है। ऐसी स्तिथि में उसे बाजार से लिया कर्ज भी चुकाना है। कुणाल चौधरी ने कहा कि अतिवृष्टि में कुछ बचा नहीं मक्का कपास सोयाबीन की फसलें बुरी तरह बर्बाद हुईं और RBC 6/4 के तहत राहत राशि भी अब तक राज्य सरकार द्वारा दी नहीं गयी। उपर से म।प्र की शासकीय मंडी बंद हैं क्योंकि मॉडल एक्ट के विरोध में कर्मचारी हड़ताल पे हैं।

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सरकार ये बताए की जब नए कृषि कानून लागू होने के बाद आज सरकारी मंडी बंद होने से ये हाल है तो किस मुँह से निजी मंडी में ऊंचे दाम का ढोल पीटा गया ? कहां हैं निजी मंडी और वो व्यापारी जो खेत से खरीदने वाले थे?? खुले आम किसान लुट रहा है सरकार का हस्तक्षेप कहां है ?? सरकार चुनाव में व्यस्त है मगर किसान बेचारा त्रस्त है। कुणाल चौधरी ने कहा की अब कहां है, प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर और प्रधान मंत्री जी की वह दलील के किसानों की फसलें समर्थन मूल्य से ऊपर बिकेंगी और इस कानून से एमसीपी कोई खतरा नहीं है। यदि ऐसा है तो किसानों को कम से कम समर्थन मूल्य ही दिलवा दें।

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कुणाल चौधरी ने कहा कि सरकार ने किसानों के सवलों को नज़रंदाज़ करते हुए कृषि कानूनों पर केवल कोरा जूठ बोला और अब किसान उसका परिणाम भुगत रहे हैं। कुणाल चौधरी ने कहा की हड़ताल की वजह से मंडियों में कोई खरीद नहीं हो रही है और बहार व्यापारी किसानों की मजबूरी का फ़ायदा उठाने में लगे हुए हैं। और पौने दामों पर सोयाबीन व मक्का उपज की खरीदी कर रहे हैं। इधर, खेतों में सोयाबीन मक्का की कटाई शुरू हो गई है। मंडी बंद होने का असर यह हुआ कि किसानों को सोयाबीन एवं मक्का के दाम समर्थन मूल्य से 30 फीसदी तक कम मिल रहे हैं।

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वहीं मंडी कर्मचारी व अधिकारी मंडी खुलने के इंतजार में हैं ताकि वह किसानों को नीलामी के माध्यम से उनकी उपज का उचित दाम दिला सकें। विधायक कुणाल चौधरी ने कहा की प्रशासनिक शिकंजा नहीं होने से व्यापारी मनमाफिक दाम पर खरीदी कर रहे हैं और नए मॉडल एक्ट से व्यापारी स्वतंत्र हो गया है। इसकी वजह से वह मंडी नहीं खुलने के बाद भी मंडी से बाहर किसानों की उपज के दाम उनकी मर्जी के हिसाब से तय कर रहे है। कुणाल चौधरी ने कहा अब इसका किसान कुछ नहीं कर सकते। क्योंकि सरकार ने सभी अधिकार मंडी प्रशासन से छीन लिए है।

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कुणाल चौधरी ने आगे कहा कि कोरोना वायरस के चलते सोयाबीन की फलियों में इल्लियां लग गई हैं। जब फसल कटने को आई तब बारिश से फलियों के दानों में अनुकरण आ गया। उन्होंने कहा कि नए मॉडल एक्ट में खलिहान और खेत में एवं मंडी से बाहर भी उपज के लिए किसान स्वतंत्र है। उपज का अच्छा रेट एवं दाम मंडी के अंदर ही मिल सकता है। जहां किसान की फसल की सुरक्षा भी रहेगी, वही अच्छे दाम भी मिलेगी। जबकि शासन ने सोयाबीन का समर्थन मूल्य 3860 रुपए व मक्के का 1860 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित कर रखा है। व्यापारी सोयाबीन के साथ मक्का भी कम दामों में खरीद रही है। वह किसानों को 700 रुपए क्विंटल तक के दाम दे रहा है, जबकि किसान इस भाव में बेचने को तैयार नहीं है।

कांग्रेस विधायक कुणाल चौधरी ने कहा की कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी जी, राहुल गाँधी जी और प्रियंका गाँधी समेत सभी कांग्रेस के नेताओं ने इन सभी विधेयकों का खूब विरोध किया लेकिन सरकार नहीं मानी और आज उसका परिणाम यह है की देशभर में किसान सड़कों पर आज्ञा है। उसेक भरण भोषण के उपर बड़ा संकट आ गया है। कुणाल चौधरी ने कहा कि हमारे आदरणीय नेता राहुल गाँधी जी तीन दिनों से पंजाब में हैं और किसानों के बीच हैं। उनके प्रदर्शन में शामिल होकर उनके दर्द को समझ रहे हैं, लेकिनं उसके बाद भी यह गूंगी बहरी सरकार सिर्फ अपने चंद उद्योगपतियों की मदद करने के लिए किसानों को प्रताड़ित कर रही है।

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कुणाल चौधरी ने इस दौरान यह भी कहा की मध्य प्रदेश में लोकतंत्र की हत्या करते हुए पैसे के बल पर कांग्रेस की चुनी हुई सरकार को गिराया गया था। और सरकार गिराने में सरकार द्वारा बड़े बड़े उद्योगपतियों से पैसे लिए गए थे। वहीं अब उस पैसे को वसूलने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह द्वारा यह मंडी एक्ट लाया गया जिसमें अब व्यापारियों का हस्तक्षेप बड़ गया है और उन्हें मुनाफा हो रहा है। जबकि प्रदेश का किसान प्रताड़ित हो रहा है।

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