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मध्य प्रदेश उपचुनाव: शिवराज ने कसा कांग्रेस पर शिकंजा, सीबीआई बढ़ा सकती है दिग्विजय की टेंशन!

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Suyash Bhatt | Bhopal

मध्य प्रदेश में वर्तमान में पदस्थ भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने वाले उपचुनावों से पहले पूर्व सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों सहित पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से लेकर अन्य मंत्रियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार एवं लेन-देन ट्रांसफर उद्योग आदि मामलों को लेकर कई बड़े खुलासे कर सकती है। इसके अलावा कुछ ऐसे मामले हैं जिनमें सीधे-सीधे बड़े नेताओं के समर्थकों के विरुद्ध एफआईआर करने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है।

भारतीय जनता पार्टी के सूत्रों एवं संगठन के पदाधिकारियों की मानें तो भाजपा के खिलाफ जितनी तेजी के साथ कांग्रेसी आक्रमक होकर चुनावों में रणनीति तैयार कर रही है उतनी ही ताकत के साथ भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस की सरकार में हुए भ्रष्टाचार एवं अन्य अपराधिक मामलों से जुड़े हुए लगभग दर्जनभर पूर्व मंत्रियों के ऊपर शिकंजा कसने के साथ-साथ कुछ ऐसे खुलासे भविष्य में करना जाएगी जिससे जनता के बीच कांग्रेस से जुड़े हुए समर्थकों एवं उपचुनाव में भाजपा से सामना करने की क्षमता शर्मिंदगी की स्थिति में पहुंच जाए।

सनसनीखेज मामलों में एफआईआर के संकेत
सूत्रों की मानें तो वर्तमान भारतीय जनता पार्टी की सरकार में वरिष्ठ प्रशासनिक पदों पर बैठे हुए अधिकारियों की ओर से इस मामले में पूरी तैयारी कर ली गई है कि कांग्रेस की सरकार में जो ट्रांसफर उद्योग चलाए गए थे उसके अंतर्गत कई सबूत या तो दिग्विजय विरोधियों के द्वारा सामने लाए गए हैं अथवा जो कांग्रेश के विधायकों ने भाजपा की सरकार बनाने में सहयोग किया है उनके द्वारा प्रस्तुत कर दिए गए हैं।

इसी क्रम में ग्वालियर से जुड़े हुए लोकसभा का चुनाव लड़ चुके दिग्विजय सिंह के बेहद करीबी अशोक सिंह के विरुद्ध एफआइआर करने की तैयारी भी लगभग पूरी कर ली गई है। जानकारी के अनुसार दिग्विजय सिंह के साथ-साथ उनके कई समर्थकों द्वारा ट्रांसफर उद्योग से जुड़े होने के मामले में सबूत एवं अन्य तकनीकी प्रकार के गवाही उपलब्ध हो चुके हैं जिनका खुलासा आने वाले समय में होगा। कुल मिलाकर आने वाले उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी 1 साल से अधिक चलने वाली कांग्रेस की सरकार एवं उसके मुख्यमंत्री कमलनाथ के विरुद्ध महा भ्रष्टाचारी होने का सबूत आक्रामक तरीके से जनता के बीच रखेगी।

पूर्व मंत्री उमंग सिंगार के आरोपों से दिग्विजय सिंह को घेरने की तैयारी
इस बात में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कांग्रेस की सरकार में जिस गति के साथ ट्रांसफर उद्योग चला गया था एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के द्वारा जिस तरह समानांतर सरकार कांग्रेस की सरकार में सामने आई थी उस से व्यथित होकर कई विधायकों एवं कई मंत्रियों ने दिग्विजय सिंह के विरुद्ध उस समय मोर्चा खोल दिया था। इसी तरह का उनके विरुद्ध मोर्चा खोलने के मामले में नाम उमंग सिंगार का राष्ट्रीय स्तर पर चर्चित रहा था।

उस समय उमंग सिंगार ने खुलकर दिग्विजय सिंह के विरुद्ध भ्रष्टाचार करने एवं रिश्वतखोरी के साथ-साथ ट्रांसफर उद्योग चलाने में पैसा कमाने का आरोप लगाया था। इस बात की शिकायत राष्ट्रीय स्तर तक सोनिया गांधी एवं राहुल गांधी के समक्ष भी रखी गई थी परंतु किसी भी प्रकार की कार्रवाई सामने ना आने के बाद कमलनाथ की ओर से उमंग सिंगार को एवं संगठन की कई बड़े नेताओं की ओर से शांत कर दिया गया था।

लेकिन सूत्र बताते हैं कि उमंग सिंगार से लेकर कई पूर्व मंत्री जिन्होंने इस्तीफा दे दिया था एवं भाजपा की सरकार बनाने में प्रदेश में मदद की थी उनके पास दिग्विजय सिंह जी से जुड़े हुए दर्जनों सबूत मौजूद है। भाजपा सरकार से जुड़े हुए कई लोग बताते हैं कि इन्हीं सबूतों एवं तकनीकी किस्म के प्रकरणों को संभवत सीबीआई जांच तक ले जाया जा सकता है। एवं इन्हीं के आधार पर मुकदमा भी कायम कराया जा सकता है।

रामेश्वर शर्मा ने की सीबीआई जाँच की मांग
एक तरफ जहां भिंड में पूर्व विधायक और भाजपा नेता रसाल सिंह ने कांग्रेस सरकार में अपेक्स बैंक में अशोक सिंह को प्रशासक नियुक्त किए जाने को गंभीर आरोप लगाए है। इसके लिए रसाल सिंह ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, सहकारिता मंत्री डॉ. गोविंद सिंह, अपैक्स बैंक के प्रशासक अशोक सिंह सहित अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने के लिए बीते रविवार आवेदन भी दिया है।

वहीं दूसरी तरफ हुज़ूर विधान सभा से विधायक एवं भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष रामेश्वर शर्मा ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर पूर्व कैबिनेट मंत्री उमंग सिंगार द्वारा दिग्विजय सिंह पर लगाए गए गंभीर आरोपों की सीबीआई जाँच कराएं जाने की मांग की है।विधायक रामेश्वर शर्मा ने बताया कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के वन मंत्री उमंग सिंगार द्वारा 3 सितंबर 2019 को पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर अवैध शराब-रेत का धंधा करने, ट्रांसफर उद्योग चलाने एवं सरकार को ब्लैकमेल कर नीति निर्धारण करने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।