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मध्य प्रदेश उपचुनाव : एक क्लिक में समझें नेपानगर विधानसभा सीट का चुनावी समीकरण

मध्य प्रदेश उपचुनाव : एक क्लिक में समझें नेपानगर विधानसभा सीट का चुनावी समीकरण
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नेपानगर मध्य प्रदेश राज्य के 230 विधानसभाओं में से एक महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्र है। नेपानगर साथ ही में खंडवा लोकसभा निर्वाचन का भी हिस्सा हैं तथा यह अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीट है। नेपानगर कुल मिलाकर 2,35,117 मतदाताओं से निहीत है। 2018 में 77.51%, 2013 में 78.51 और 2008 में 70.09 वोटिंग दर्ज किए गए थे।  2018 में नेपानगर विधानसभा क्षेत्र में सुनीता देवी कास्डेकर ने 46.69% मतों से जीत दर्ज की थी।

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दरअसल 1998 के बाद लगातार बीजेपी सरकार होने के बाद कांग्रेस 2018 में सत्ता में आई थी। हालांकि ज्योतिरादित्य सिंधिया के इस्तीफा देने के बाद सुनीता देवी कास्डेकर ने भी 2020 को कांग्रेस को अलविदा कर बीजेपी के खेमे में शामिल हो गई थी। जिसके कारणवश एक बार फिर नेपानगर मतदाताओं को प्रतिनिधित्वकर्ता चुनाव होने जा रहा है।

नेपानगर विधानसभा क्षेत्र का इतिहास

नेपानगर मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिला में स्थित है। दरअसल नेपानगर अखबारी कागज बनाने और नेपा मिल्स लिमिटेड के लिए काफी प्रचलित है। नेपा लिमिटेड भारत में कागज बनाने वाला सार्वजनिक क्षेत्र का अग्रणी उद्यम है। यह वर्ष 1948 में स्थापित किया गया था। 1949 में मध्य प्रदेश की सरकार ने इसका प्रबंधन अपने हाथ में ले लिया था और 1959 केंद्र सरकार के अंतर्गत सार्वजनिक उद्यम बना। अप्रैल 1956 मैं 30000 टन प्रतिवर्ष संस्थापित क्षमता के साथ उत्पादन शुरू हुआ था।

सिलाई की लकड़ी और बांस मुख्य कच्चा माल था जो की नेपानगर कि चारों ओर के जंगलों में भरमार मात्रा में उपलब्ध था। सन् 1967 में मिल ने विस्तारीकरण का कार्यक्रम शुरू किया जिसके बाद वर्ष 1978 एवं 1989 में सन संस्थापित क्षमता बढ़कर 88000 टन प्रतिवर्ष हो गई। वर्तमान में कंपनी द्रद्दी कागजों को बुनियादी कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल कर  रही है। इसी वजह से वह उत्पादन लागत को भी कम करने में सफल हो पाए।

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कम्पनी ने प्रथम बार में 42 जी.एस.एम. के अखबारी कागज सभी अंतर्राष्ट्रीय मानदण्डों जैसे की क्षमता, अपारदर्षिता, सरफेस स्मूथनेस, चमक इत्यादि के अनुसार प्रस्तुत किए थे। इसके अलावा हाल ही में पुराने अखबार और ओवरयीशु अकबर का इस्तेमाल कर आर्थिक कागजों का निर्माण की भी शुरुआत की गई है। ताकि निचले स्तर के बाजार की आवष्यकता का प्रबंधन कम कीमत पर किया जा सके और कम चमक होने के बावजूद गुणवत्ता के मापदंडों को बनाए रखा जा सके।  2018 में नेपानगर स्थित नेपा पेपर मिल के जीर्णोद्धार के लिए 469 करोड़ का पैकेज भी मंजूर किया गया था।

 उपचुनाव के लिए प्रत्याशियों के नाम

बीजेपी की ओर से नेपानगर विधानसभा क्षेत्र चुनाव के लिए सुमित्रा देवी कास्डेकर खड़ी हुई है। सुनीता देवी कास्डेकर ने 2018 में कांग्रेस के अधीन जीत हासिल की थी। हालांकि उन्होंने 10 जुलाई 2020 को कांग्रेस को इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हो गई थी। कांग्रेस की ओर से इस बार रामकिशन पटेल प्रत्याशी के रूप में खड़े हुए हैं। रामकिशन पटेल 2013 में भी बीजेपी के प्रत्याशी राजेंद्र श्यामलाल दादू के खिलाफ खड़े हुए थे मगर 22178 मतदान से वह हार गए थे। वही राजेंद्र श्यामलाल दादू ने 87,224 मतों से जीत दर्ज की थी। वहीं बीएसपी ने भल सिंह पटेल को प्रत्याशी चुना है।

2018 चुनाव में कौन जीता था ये सीट ?

2018 चुनाव मे कांग्रेस की प्रत्याशी सुमित्रा देवी कास्डेकर बीजेपी प्रत्याशी मंजू राजेंद्र दादू के विरुद्ध खड़ी हुई थी और जीत भी हासिल की थी। उन्होंने मंजू राजेंद्र दादू को 84056 मतदान से हराते हुए  जीत हासिल की थी।

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कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने नेपानगर विधानसभा क्षेत्र में 5 बार जीत हासिल की है। अबकी बार किसकी सरकार जीत हासिल करती है यह देखना रोचक होगा। 1977 में जनता पार्टी के मोहन मिश्रा विधायक थे। वहीं 1980 और 1985 में लगातार के  तनवंत सिंह खीर विधायक थे। हालांकि 1998 के बाद लगातार बीजेपी की सरकार राज कर रही थी, पर 2018 में फिर एक बार कांग्रेस को जीत मिली थी। मगर ज्योति आदित्य सिंधिया की राजनीति उथल-पुथल के कारण कांग्रेस सरकार सत्ता स्तर से फिर एक बार गिर गई थी।

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