शेखावत से शुरू शेखावाटी पर खत्म!

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न्यूज़ डेस्क, अविनाश मिश्रा

नई दिल्ली।। 74 दिनों तक लगातार चले वसुंधरा राजे और अमित शाह का अंतर्द्वद्व आज राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पद पर राज्यसभा सांसद मदन लाल सैनी के नियुक्ति के साथ ही पटाक्षेप हो गया. पार्टी कार्यालय के एक बयान मदन लाल सैनी की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू होता है. के साथ ही पिछले 2 महीने से दिल्ली में डेरा डाले वसुंधरा गुट के विधायक और मंत्रियों ने राहत की सांस ली. पूर्व भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी के इस्तीफे के साथ शुरू हुआ ये विवाद अब राजनीति रूप से थम सा गया है.

वसुंधरा के आगे एक बार फिर झुका पार्टी हाईकमान

राजनीतिक विश्लेषकों का माने तो सैनी का नियुक्ति पार्टी हाईकमान का एक बार फिर वसुंधरा के आगे घुटने टेकने जैसा लग रहा है. क्योंकि पार्टी अध्यक्ष अमित शाह केंद्रीय राज्य मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत को अध्यक्ष बनाकर राज्य की राजनीति पर अपना वर्चस्व कायम करना चाहते थे. लेकिन वसुंधरा इसे पहले ही भांप गई. और तकरीबन दो बैठक बेनतीजा निकलने के बाद पार्टी हाईकमान को उसके सामने झुकना पड़ा.

क्या अशोक गहलोत का काट निकलेगा सैनी?

पार्टी ने ओबीसी वोटरों को रिझाने के लिए अंततः वसुंधरा द्वारा नामित मदन लाल सैनी के नाम पर मुहर लगा दी. सैनी झुंझुनूं जिले से आते हैं. पार्टी उनके चेहरे को लेकर ओबीसी समुदाय के बीच जाएगी. इतना ही सरकार से नाराज़ माली समुदाय को भी मनाने का प्रयास करेगी. राजनीति जानकारों का कहना है कि ये समुदाय पहले एक साथ पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस महासचिव (संगठन) अशोक गहलोत के साथ खड़ा होता था. भाजपा ने सैनी की नियुक्ति कर ओबीसी वोट बैंक में सेंध लगा दिया है

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