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मज़दूरों के वापस घर लौटने से भारतीय अर्थव्यवस्था को हो सकता है 3 लाख करोड़ से ज़्यादा का नुक़सान !

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Ground Report | News Desk

लॉकडाउन की वजह से दूसरे राज्यों में फंसे लोगों को घर वापस लाने के लिए विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं। राज्यों की मांग पर केंद्र सरकार ने ट्रेन से मज़दूरों और दूसरे लोगों को वापस लाने की अनुमति दी है। हज़ारों मज़दूर पैदल ही अपने-अपने घरों को लौट रहे हैं । कोई 1500 किलोमीटर पैदल जा रहा है तो कोई 1000 किलोमीटर । मज़दूरों की घर वापसी शहरों की आर्थिक स्थिति को बेपटरी कर देगी ।

पीएचडी चैम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के मुताबिक़ कोरोना महामारी व लॉकडाउन के बीच लाखों मजदूरों की घर वापसी से भारतीय अर्थव्यवस्था को तीन लाख करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो सकता है। प्रवासी मजदूरों का योगदान देश के सभी उद्योगों में है। उनकी घर वापसी से फौरी तौर पर सभी उद्योगों जिनमें मैन्युफैक्चरिंग से लेकर रियल एस्टेट और कंसट्रक्शन शामिल हैं, को करीब 25 से 30 फीसदी का नुकसान उठाना होगा।

आर्थिक मामले के विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना वायरस (Coronavirus) के संक्रमण को रोकने के लिए देशभर में की गई बंदी (लॉकडाउन) से अर्थव्यवस्था को 120 अरब डॉलर यानी तकरीबन नौ लाख करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है। यह भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के चार फीसदी के बराबर है। बता दें कि भारत में 2011 जनगणना के मुताबिक 45 करोड़ यानी कुल जनसंख्या का करीब 37 फीसदी इंटरनल माइग्रेंट है..यानी वो लोग जो एक राज्य से दूसरे राज्य में पलायन करते है रोजी रोटी के लिए।

कोरोना संकटके बीच आर्थिक संकट बड़ी चुनौती

लॉकडाउन से ठप औद्योगिक गतिविधियों के बीच लगातार प्रवासी मजदूरों के घर वापसी से उद्योग जगत के चेहरे पर उदासी छाई हुई है। उद्योग जगत का कहना है कि प्रवासी मजदूरों के भरोसे ही औद्योगिक गतिविधियां चलती हैं। अगर वे ही वापस लौट जाएंगे तो फिर कारखानों में काम कैसे होगा। इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर बुरी तरह प्रभावित होगा। इससे सड़क बनाने और हाइवे के विकास के काम में अड़चन आएगी। स्मार्ट सिटी के प्रोजेक्ट लटक जाएंगे। आने वाले मानसून के सीजन के चलते जून से निर्माण कार्यों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा।

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वहीं आज WHO ने साफ कहा कि सिर्फ लॉकडाउन करने से कुछ नहीं होगा। ‘लोगों को घर पर रहने के लिए कहना और उनकी आवाजाही को बंद कर देने से वक्त हासिल होगा, जिससे हेल्थ सिस्टम पर दबाव घटेगा… लेकिन अपने आप में इससे महामारी ख़त्म नहीं होगी। WHO के मुताबिक इससे निपटने के लिए सरकारों को बड़ी सामाजिक और आर्थिक कदम उठाने होंगे।

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