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कोरोना में लूट: अंतिम संस्कार करवाना भी हुआ महंगा, कीमतें पांच गुना तक बढ़ी

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कोरोना महामारी (corona pandemic) की वजह से अब अंतिम संस्कार (cremation) करना भी बहुत महंगा (costly) हो गया है। लोगों को घाट तक ले जाने के लिए भी बोलियां लग रही हैं। अंतिम संस्कार (cremation) में लगने वाले समान के दोगुने-चौगुने दाम (cost) लगाए जा रहे हैं। हाल ऐसा है कि इस नाजुक स्थिति में जितना लूट सको लूट लो। इन घाटों पर हर चीज के दाम मनमाने तरीके से बिक रहे हैं। खास बात यह है कि इनके लिए अब तक कोई गाइडलाइन नहीं है। लकड़ी से लेकर अर्थी तक सभी की कीमतें तीन से पांच गुना तक बढ़ गई है।

क्या हो रहा घाटों में अंतिम संस्कार के नाम पर?
हर रोज कोरोना संक्रमण (corona virus) से सैकड़ों मौत हो रही है। श्मशान घाट में जहां 1 दिन में मुश्किल से 4 या 5 डेड बॉडी (dead body) आती थी, वहीं कोरोना काल में अंतिम संस्कार (cremation) के लिए लोगों को लाइन लगानी पड़ रही है। लोगों को टोकन (token) दिए जा रहें हैं, की जब आपका नम्बर आएगा तब तक का इंतजार कीजिये। परिजनों को कभी 2-3घंटे तो कभी पूरे दिन भी इन्तेजार करना पड़ रहा है। अंतिम संस्कार कराने वालों की संख्या बढ़ जाने के कारण लकड़ी व अन्य दूसरे समान की कमी की वजह से उनका भी रेट (rate) बहुत बढ़ गया है।अंतिम संस्कार के नाम पर लोगों को लूटा जा रहा है।

कितने की मिल रही हैं लकड़ियाँ और बाकी समान?

अंतिम संस्कार (cremation) के लिए लायी जाने वाली लकड़ियों के दाम (cost) भी अब आसमान छू रहे हैं। एक शव के अंतिम संस्कार (cremation) में 4 क्विंटल (quintal) लकड़ी लगती हैं। पिछले कुछ महीनों तक ये लकड़ी 500 रुपए क्विंटल (quintal) मिलती थी पर अब इसके दाम 900 रुपए से भी ज्यादा कर दिए गए हैं। लकड़ी के अलावा शक्कर, घी, अर्थी के लिए बाँस, मखाना, शहद, कफन, फूल, रार, कपूर यह सब सामान भी बहुत महंगा (costly) कर दिया है। अर्थी के लिए बांस पहले 100रुपए में मिलता था अब इसका रेट 200रुपए हो गया है। कफन जो शव को ढकने मात्र एक कपड़ा है, इसका रेट 100 रुपए हो गया है।

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कपूर पहले 50ग्राम 110रुपए का मिलता था पर अब इसकी कीमत 125 से 140 रुपए हो गई है। वहीं बूरा 40 रुपए किलो की जगह 50 रुपए किलो मिल रहा है। मखाना और घी के दाम में कोई बदलाव नहीं आया है। शक्कर 50 से 80 रुपए की कर दी गयी है।

क्यों महंगाई के लिए सरकार ने कोई गाइडलाइन नहीं बनाई है
कोरोना महामारी (corona pandemic) की रोकथाम के लिए सरकार ने गाइडलाइन (guideline) कई बनाई हैं, लेकिन इस दौर में बढ़ती महंगाई और लूट को रोकने के लिए सरकार ने कोई आदेश नहीं निकाला है। हर जगह लोग मजबूरी का फायदा उठाकर एक-दूसरे को लूट रहे हैं। सामान  की कालाबाजारी कर रहें हैं, जिसपर सरकार का बस बिल्कुल नहीं है। और अभी तक ना ही सरकार ने इसके खिलाफ कोई एक्शन लिया है।

कैसे मिलेगी राहत कोरोना महामारी में महंगाई से?
महंगाई के नाम पर हो रही कालाबाजारी (black-marketing) को कम करने के लिए सरकार को सख्त कदम उठाने पड़ेंगे, तभी थोड़ी राहत के आसार हैं। इस कठिन समय में हर कोई परेशानी का सामना कर रहा है। मौत का आंकड़ा इतना बढ़ गया है कि हर सामान की किल्लत हो रही है। कालाबाजारी (black-marketing) रोकने के लिए सरकार को चीज़ों की आपूर्ति बढ़ानी होगी।

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स्थिति कब तक सामान्य हो सकती है?
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, अब कोरोना की तीसरी लहर आने वाली है, जिससे स्थिति और खराब हो जाएगी। अंतिम संस्कार (cremation) के सामान की कालाबाजारी (black-marketing) या महँगाई कम करने के लिए डेथ रेट (death rate) को रोकना पड़ेगा। उसके लिए सरकार को जल्द से जल्द कोई ऐसा फैसला लेना होगा जो स्थिति को सामान्य करने में मदद कर सके। सरकार को मेडिकल इक्युपमेंट (medical equipment) और सपोर्ट सिस्टम (support system) की उपलब्धता (availability) जरूरत के अनुसार (according) सुनिश्चित करनी पड़ेगी।

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