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मुरादाबाद : पीतल कारीगरों की स्थिति अब भी बदतर, क्या दिल्ली की सड़कों में फंस गया है PM मोदी का ‘विकास’?

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कोमल बड़ोदेकर | मुरादाबाद

देश में इन दिनों लोकसभा चुनाव चल रहे हैं। चुनावी मौसम में कई खबरें ऐसी सामने आती हैं जिन्हें देखकर, पढ़कर या सुनकर हम भोंहे उठा लेते हैं और सोचते हैं कि ऐसा भी कुछ भी इस देश में। ऐसी ही एक खबर उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद शहर से सामने आई हैं, जहां लोकसभा चुनाव के दौरान ग्राउंड रिपोर्ट की टीम देश-दुनियां में पीतल कारीगरों से उनसे बातचीत करने पहुंची।

रायसीना हिल से निकला विकास दिल्ली के जाम में फंस गया है –
इस दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आएं। एक ओर जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और विकास की बात कर रहे हैं वहीं दूसरी ओर इन कारीगरों से मिलकर लगता है कि प्रधानमंत्री मोदी का विकास रायसीना हिल से निकल कर दिल्ली की सड़कों में लगने वाले ट्रेफिक जाम में कहीं फंसकर रह गया है।

मोदी सरकार से उम्मीद थी लेकिन ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं –
हांलाकि ये आलम सिर्फ प्रधानमंत्री मोदी के दौर में ही नहीं था। इससे पहले कांग्रेस के दौर में भी इन कारीगरों की यही स्थिति थी, लेकिन ‘सबका साथ-सबका विकास’ नारा बुलंद कर सत्ता में आई मोदी सरकार से लोगों को एक नई उम्मीद थी, लेकिन अब ये कारीगर भी अपने आप एक बार फिर ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

अपने सांसद से नाराज हैं पीतल कारीगर –
वर्तमान में मुरादाबाद संसदीय क्षेत्र से बीजेपी से कुंवर सर्वेश कुमार सांसद हैं। यहां पीतल कारोबारी उनसे खासे नाराज नजर आएं। लोगों का कहना है कि वे यहां जीत के बाद एक बार भी नहीं आए। वहीं समाजवादी पार्टी के युवा नेता सैयद मसदूल हसन बताते हैं कि मुरादाबात का इतिहास 400 साल पुराना है। देश दुनिया में मुरादाबाद पीतल कारीगरी के लिए मशहूर है लेकिन कारीगरों की हालत बद से बदतर हो गई है।

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फहीम भाई को अब सरकार से कोई उम्मीद नहीं –
बीते 25 सालों से पीतल पर नक्काशी कर रहे कारीगर फहीम भाई कहते हैं कि हम दिन भर में 12 से 14 घंटे काम करते हैं और मेहनताना सिर्फ 250 रुपये से 300 रुपये तक मिलता है। अपने इलाके में हो रहे चुनाव के बारे में कहते हैं बिजली की समस्या से पीछले कई सालों से जूझ रहे हैं, बिजली कभी कट जाती है कब आती है कब जाती है कोई ठिकाना। अब सरकार से भी कोई उम्मीद नहीं है।

महंगाई कई गुना बड़ी, लेकिन मेहनताना नहीं बढ़ा –
55 वर्षीय मोहम्मद आसीफ बचपन से कारीगरी कर रहे हैं। यह उनका पुश्तैनी काम है। वे कहते हैं कि पीढ़ी दर पीढ़ी हम यही काम करते आ रहे हैं। मुझे कारीगरी विरासत में मिली है, शुरू में तो काफी मजा आता था लेकिन 200 रुपये से 250 रुपे तक मिलने वाली दिहाड़ी से घर खर्च निकालना अब मुश्किल हो गया है। महंगाई पहले से कई गुना बढ़ी है लेकिन हमारी मजदूरी में कोई खास बदलाव नहीं आया।

बीते 5 साल में 14,000 करोड़ से घटकर 7,000 करोड़ हुआ टर्न ओवर-
एक आंकड़े के मुताबिक, 2.5 लाख से ज्यादा कारीगर पीतल उद्योग से जुड़े हैं। एक वक्त में इसका रिकॉर्ड टर्न ओवर 36 करोड़ रुपये दर्ज किया गया था। मसदूल हसन आरोप लगाते हुए कहते हैं मोदी सरकार की नीतियों ने न सिर्फ देश के अन्य उद्योगों बल्की पीतल उद्योग की भी कमर तोड़ दी है। बीते पांच सालों में पीतल उद्योग का टर्नओवर 14 हजार करोड़ रुपये से घटकर 7000 करोड़ रुपये पर आकर सिमट गया है।

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चुनाव की वर्तमान स्थिति –
बता दें कि यहां से वर्तमान में बीजेपी से कुंवर सर्वेश कुमार सांसद है। इस बार सपा-बसपा का गठजोड़ है। यहां से गठबंधन की स्थिति के चलते दिग्गज नेता डॉ. एसटी हसन मजबूत स्थिति में नजर आ रहे हैं। वहीं कांग्रेस ने इस बार इमरान प्रतापगढ़ी पर दाव खेला है।

राजनीतिक जानकार कह रहे हैं कि कांग्रेस और गठबंधन के दोनों उम्मीदवार मुस्लिम हैं जिससे सीधे तौर पर बीजेपी को फायदा होता नजर आ रहा है। वर्तमान में यहां 19 लाख 50 हजार से ज्यादा वोटर्स है। इनमें से 8 लाख 50 हजार वोटर्स शहरी आबादी वाले हैं। यहां 23 अप्रैल को वोटिंग होनी है।