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लोकसभा चुनाव 2019 से पहले अमित शाह ने दिए बीजेपी-शिवसेना में टूट के संकेत

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मुंबई, 23 जुलाई। बीजेपी और शिवसेना का सालों पुराना गठबंधन अब खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। शिवसेना तो कई बार लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने के संकेत भी दे चुकी है, लेकिन इस बार प्रतिक्रिया बीजेपी की ओर से आई है। अमित शाह ने पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा की हमें महाराष्ट्र में 2019 लोकसभा चुनाव अकेले लड़ने के लिए तैयार रहना होगा।

अब तक बीजेपी शिवसेना के सभी तेवर बर्दाश्त कर रही थी लेकिन अविश्वास प्रस्ताव के दौरान शिवसेना का गैरहाज़िर रहना पार्टी आलाकमान को नागवार गुज़रा है। अमित शाह के इस संदेश से यह साफ हो गया है कि अब यह गठबंधन ज़्यादा दिन नहीं चलने वाला है और दोनो ही पार्टी के नेता इस बात को मन ही मन स्वीकार भी कर चुके हैं।

केंद्र में बीजेपी की पूर्ण बहुमत में सरकार बनने के बाद से ही शिवसेना और भाजपा के रिश्ते नासाज़ रहे हैं। शिवसेना कई बार भाजपा पर एनडीए के सहयोगियों की अनदेखी के आरोप लगाती रही है। मोदी सरकार की नीतियों का भी शिवसेना ने खुल कर विरोध किया है।

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नोटबंदी हो या जीएसटी, हर मुद्दे पर शिवसेना विपक्ष के साथ खड़ी दिखाई दी। अपने मुखपत्र सामना के माध्यम से शिवसेना ने
बीजेपी पर तीखे प्रहार भी किए हैं। हाल ही में जब संसद में राहुल ने मोदी को गले लगाया तो शिवसेना ने इसे भाजपा के लिए झटका करार दिया ।

शिवसेना और बीजेपी के बीच तल्खियां विधानसभा चुनावों में सीटों के बंटवारे को लेकर भी हुईं थी। तब भी उद्धव ठाकरे को मनाने में बीजेपी ने ज़मीन आसमान एक कर दिए थे और अंत में शिवसेना को मनाने में कामयाब हो गई थी। लेकिन इस बार भाजपा सभी आस छोड़ती हुई दिखाई दे रही है।

उद्धव ठाकरे राज्य की 48 लोकसभा सीटों में से 22 पर चुनाव लड़ना चाहते हैं और बाकि 26 बीजेपी के लिए छोड़ना चाहते हैं। 2014 में भाजपा ने 24 सीटों पर लड़कर 23 और शिवसेना ने 20 सीटों पर लड़कर 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी। वोट शेयर के लिहाज़ से देखें तो 2014 में भाजपा को 27.3 फीसदी और शिवसेना को 20.6 फीसदी वोट हासिल हुए थे।

दोनों पार्टियां अगर अकेले लड़ती हैं और कांग्रेस-एनसीपी का गठबंधन हो जाता है तो महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना अपनी ज़मीन गवां बैठेंगी। 2019 चुनावों के लिए जहां विपक्ष की सभी पार्टियां एकजुट होती दिखाई दे रही हैं, वहीं भाजपा नीत एनडीए का कुनबा छोटा होता जा रहा है।

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एनडीए में अगर लोकसभा सीटों के आधार पर देखा जाए तो भाजपा के बाद शिवसेना, टीडीपी और अकाली दल ही बड़ी पार्टियां हैं। इसमें से टीडीपी पहले ही भाजपा का दामन छोड़ चुकी है। शिवसेना के जाने के बाद एनडीए में केवल छोटे सहयोगी ही रह जाएंगे।