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आज देश फिर उस दहलीज पर खड़ा है जहां किसानों के लिए सिर्फ घोषणाएं और वादे हैं…

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परमजीत सिंह –

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 के चुनाव में एक बयान में कहा कि, किसानों की सभी फसलों की लागत का डेढ़ गुना कर दी जाएगी। इस बयान के बाद ऐसा लगा कि मानों देश के सभी किसानों की वर्षों से मांग पूरी हो जाएगी, लेकिन साल दर साल बीतता गया और किसानों की उम्मीद धूमिल होती गई। आज देश फिर उस दहलीज पर खड़ा है जहां केवल घोषणा और वादे किये जा सकते हैं और किसानों के मुद्दे पर चुनाव लड़ मोदी सरकार अगले पांच सालों के लिए एक बार फिर सत्ता में आ सकती है।

इस बीच सरकार के वादे पूरे नहीं होने पर एक नया तरह का वादा कर दिया गया है, जिसकी सभी लोग रट लगा रहे हैं। वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री ने किसानों की फसल का मूल्य लागत डेढ़ गुना करने की जगह अब किसानों की आमदनी दुगना करने का वादा किया है वह भी 2022 तक, लेकिन यह कोई नहीं बताने को तैयार है की किसानों की आज आमदनी कितनी है। इसका वास्तविक कारण यह है की किसानों की आमदनी इतनी कम है कि उसे बताने पर सरकार की फजीहत होगी।

कुछ आंकड़ों के साथ यह बताने की कोशिश है कि आज वर्तमान में किसानों की आमदनी कितनी है। किसानों के लिए कृषि कहने का मतलब यह है की उसके अंदर पशुपालन, मछली पालन, बागवानी, उधानकी लकड़ी इत्यादी काम आते हैं। इसके साथ ही किसानों की मजदूरी भी जोड़ी जाती है। आज आप सभी को अलग-अलग क्षेत्रों में किसानों की आमदनी का ब्योरा जानने की जरूरत है।

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वर्ष 2014 में केंद्र सरकार की ओर से संसद में यह बताया गया था की किसानों की औसत आमदनी जनवरी 2013 से दिसम्बर 2013 तक में 6426 रु./ माह है। इस आमदनी में पशुपालन, मछली पालन, बागवानी, आनाज उत्पादित आमदनी, लकड़ी इत्यादी शामिल है। इसलिए आप को सभी अलग-अलग क्षेत्र में काम कर रहे किसानों की आमदनी मालूम होना चाहिए।

किसानों की कुल आमदनी में 30.7 प्रतिशत पशुपालन का योगदान रहता है, जिसके अन्दर डेयरी के साथ-साथ बकरी, भेड़, मुर्गी, इत्यादी को शामिल किया जाता है। इसके आलवा अनाज से 17.2 प्रतिशत, फल एवं सब्जी से 5.4 प्रतिशत, तिलहन से 3.8 प्रतिशत, रेशा से 3.7 प्रतिशत चीनी से 2.9 प्रतिशत, दलहन से 2.8 प्रतिशत, चटनी और मसाले 11 प्रतिशत, मछली पालन से 5.4 प्रतिशत का योगदान रहता है। अन्य फसलों से 17.3 प्रतिशत की आमदनी होती है।

अगर किसानों की आमदनी में दलहन, तेलहन अनाज फल एवं सब्जी और चीनी को जोड़ दिया जाए तो 33 प्रतिशत होता है। वहीं अगर इन आंकड़ों की रुपये में बात करें तो किसान को मछली पालन से 1972.78 रुपये, अनाज से 1105.27 रुपये, तिलहन से 244.18 रुपये, दलहन से 180 रुपये, चीनी से 186 रुपये, रेशा से 237 रुपये और मत्स्य से 334 रुपया प्रति माह की आमदनी होती है।

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खास बात यह है कि किसानों की आमदनी में किसानों की मजदूरी को शामिल किया गया है। यह मजदूरी अपने खेत में काम करने के अलावा खेती से बचे हुए समय मे शहर या किसी अन्य जगह पर किये गए कामों से हुई आमदनी को जोड़ा गया है। यह आमदनी लगभग 50 प्रतिशत के आसपास होती है। अगर अनाज, चीनी, तिलहन, दलहन, फल एवं सब्जी को एक साथ जोड़ दिया जाए तो किसानों की आमदनी 2120.58 रुपये प्रति माह होती है।

देश में चीनी के कुल किसान लगभग 50 लाख हैं तो कपास के कुल किसानों की संख्या लगभग 80 लाख हैं वहीं ज्यादातर किसान अनाज उत्पादक हैं। इस हिसाब से किसानों की आमदनी दुगनी कर दी जाए तो किसानों की प्रतिमाह आमदनी 4241.16 रुपए होगी। जो वार्षिक 50,893.92 रुपए वार्षिक होगी। इसके अलावा किसानों की लागत को सरकार बहुत कम कर के आंकती हैं जिससे फसल के विक्रय पर आमदनी बढ़ जाता है।

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अगर इसे भी सही मान लिया जाए तो एक किसान परिवार जिसमें 5 से 6 सदस्य होते हैं। इन सभी सदस्य की मासिक आमदनी किसानों की कुल आमदनी 6426 रु में से 1071 रुपए प्रति व्यक्ति से 1285.2 रुपया व्यक्ति मासिक होती है। अगर बात केवल कृषि क्षेत्र की करें तो किसान परिवार की मासिक आय 353.43 रुपए/व्यक्ति से 424.116 रुपए/व्यक्ति मासिक होती है। इसलिए किसानों की आमदनी दुगना कर देने से भी किसानों की आमदनी में कोई सुधार नहीं होगा।

(डिस्क्लेमर : यह लेखक के निजी विचार हैं, लेखक राष्ट्रीय किसान संगठन के महासचिव हैं।)