कोरोना योद्धाओं की तरह पीपल बाबा के ‘पर्यावरण योद्धा’ दिन-रात कर रहे हैं पर्यावरण संवर्धन का काम

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Ground Report News Desk | New Delhi

• Give me Trees Trust के संस्थापक मिस्टर प्रेम परिवर्तन (पीपल बाबा ) का कहना है कि कोरोना महामारी के दौर में लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कर रहे हैं इस महामारी से बचने के लिए यह काफी महत्वपूर्ण है लेकिन इस समय हर एक नागरिक अगर सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो करते हुए अगर एक-एक पेड़ लगाये और कुछ दिनों तक देखभाल करे (कुछ दिन बाद बरसात भी शुरू हो जाएगी, इस समय पेड़ लगाया गया तो वो पेड़ आसानी से पकड लेगा तो आने वाले समय में भारत को स्वच्छ पर्यावरण देनें के दिशा में एक बड़ी पूजी का निर्माण हो सकता है।

• कोरोना योद्धाओं की तरह ही Give me Trees Trust के पर्यावरण योद्धा भी कर रहे हैं निरंतर काम।

• लॉक डाउन लागू होनें से औधोगिक गतिविधियाँ कम या नहीं हो पा रही हैं इस वजह से प्रदुषण का स्तर भी कम हो रहा है अगर इस समय हम पेड़ लगाकर अगर अपने पर्यावरण को हरा भरा बना लेते हैं तो आनें वाले समय में औधोगिक गतिविधियों के शुरू होने पर भी पर्यावरण स्वच्छ मिलेगा क्युकि तैयार वृक्ष पर्यावरण की गंदगी को सोखकर वातावरण को शुद्ध कर देते हैं – इस संकट की घड़ी को पेड़ लगाकर एक अवसर में तब्दील कर लेना चाहिए।

• स्वच्छ भारत मिशन में स्वच्छ पर्यावरण की भी हिस्सेदारी हो।

• मनरेगा के तहत पेड़ लगाओ अभियान को गति दिया जा सकता है।

• कोरोना के दौर में जहाँ सारे उद्योग और कारोबार ठप्प हैं, पीपल बाबा का पर्यावरण सुधार कार्यक्रम निरंतर जारी है।

आज सारा संसार जहाँ कोरोना महामारी के दौर से गुजर रही है | इस महामारी का प्रकोप दुनियां के 187 देशों तक फ़ैल चुका है, किसी को इससे निकलने के लिए कोई रास्ता नहीं सूझ रहा। देश अस्थिर है सभी लोग खुद को बचानें के लिए खुद को सामाजिक सरोकारों से अलग किये हुए हैं वहीँ देश ने नामी पर्यावरणकर्मी प्रेम परिवर्तन (जिन्हें पूरी दुनियां पीपल बाबा के नाम से जानती है) “अपने पर्यावरण संवर्धन अभियान में लगे हुए हैं”।

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1977 से पेड़ लगाओ अभियान की शुरुआत करने वाले पीपल बाबा का सफ़र निर्बाध रूप से जारी है | कोरोना जैसी महामारी में सभी लोग जहाँ पर खुद को अलग करते हुए अपने घरों की चाहरदिवारियों में कैद हैं वहीँ पीपल बाबा और उनकी टीम सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो करते हुए अपने पेड़ लगाओ अभियान में जुटी हुई है | पीपल बाबा बताते हैं कि जिंदगी का एक एक दिन अमूल्य है हमें ईश्वर ने पेड़ लगनें और देश के पर्यावरण को बचानें की जिम्मेदारी दी है मैं अपना कार्य करने अपनी जिम्मेदारी को निभाना चाहता हूँ आगे वे कहते हैं कि इस महामारी में हमें पहले खुद को सुरक्षित करना है, खुद को सुरक्षित रखते हुए देश को सुरक्षित रखेने की जिम्मेदारी हर इंसान को निभानी है लेकिन धरती पर बढ़ रहे ग्लोबल वार्मिंग और प्रदुषण से बचाने के लिए पेड़ लगाने का अभियान भी हमे जरी रखना है इन्होने अपने स्वयंसेवकों के साथ कोरोना से बचनें के लिए सभी जरूरतों का पालन करते हुए काम को जारी रखा है।


पीपल बाबा कहते हैं कि जैसे कोरोना योद्धा (डाक्टर, सफाईकर्मी, पुलिस कर्मी, प्रशासन और सामाजिक व राजनीतिक संस्थाओं के लोगों ने अपना योगदान दे रहे हैं ) वैसे ही हमारे पर्यावरण योद्धाओं नें अपने कार्य को जारी रखनें की सहमती मांगी हम सबनें आपस में मीटिंग की सभी नें सर्वसम्मति से इस कार्य को निरंतर जारी रखनें का कार्य किया है | मेरे एक-एक स्वयं सेवक अपने दिन की शुरुआत पेड़ों के बीच रहकर वर्षों से कर रहे हैं तो घरों में बैठनें के वजाय सोशल डिस्टेंसिंग को फॉलो करते हुए इसे जारी रखने का फैसला लिया था और अब तक हमारे सभी पर्यावरण योद्धा अपने कार्य में जुटे हुए हैं।

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कोरोना से लड़ने में पेड़ कैसे हैं सहायक

पीपल बाबा बताते हैं कि “पेड़ अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं” पेड़ लकड़ी, फल, फूल, औषधि, उधोगों के लिए कच्चे माल का जरिया हैं | इसके साथ-साथ पेड़ अपने जीवन काल में करोड़ों की ऑक्सीजन देते हैं | उधोगों से हमारे वातावरण में जो गंदगी (CO2) आती है उसे पेड़ अवशोषित करके बदले में ऑक्सीजन होते हैं ये पेड़ भगवान शिव के साक्षात प्रतिबिम्ब हैं जो सृष्टि को बचानें के लिए बिष (जहर ) का बमन करते हैं।


पीपल बाबा कोरोना के संदर्भ में पेड़ों के उपयोगिता की बात करते हुए कहते हैं कि कोरोना से वह व्यक्ति आसानी से जीत सकता है जिसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी हो और रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास शुद्ध वातावरण में ही होता है और शुद्ध वातावरण की परिकल्पना पेड़ों के बिना अधूरी है।

कोरोना के दौर में किस प्रकार की आ रही है बाधाएं , प्रशासन से कैसे मिल रहा है मदद

देश के 202 जिलों और 18 राज्यों में 2 करोड़ से ज्यादे पेड़ लगा चुके पीपल बाबा की टीम का कोरोना महामारी के आने के बाद भी वृक्षारोपण का कार्य निरंतर जारी था लेकिन बीच में पेड़ों की सैप्लिंग समाप्त होने पर कार्य रुकने की सम्भावना बढने लगी थी चुकि उनके ट्रस्ट के पेड़ों की सैप्लिंग हरिद्वार में है और इस समय उनके स्वयं सेवक दिल्ली एन सी आर में पेड़ लगाओ अभियान चला रहे हैं। पर लॉक डाउन 2.0 में पेड़ों की सैप्लिंग समाप्त होने पर हमनें प्रशासन से हरिद्वार जाने की अनुमति मांगी पर प्रशासन ने शुरू में अनुमति देनें से मना किया था लेकिन पीपल बाबा नहीं रुके और अपनी बात को बड़े अधिकारियों तक ले गए अंततः अपनी बातों को बेबाक तौर पर रखनें में माहिर पीपल बाबा नें अधिकारियों को यह समझानें में कामयाबी हासिल कर ली कि पेड़ लगानें का कार्य भी मानव के रक्षा के लिए ही है अगर यह कार्य रुका तो पर्यावरण संकट के गहराने का खतरा बढ़ जाएगा।

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पीपल बाबा बातो ही बातों में कहते हैं इस समय पूरे देश में काम बंद है या शिथिल है इस समय देश के हर नागरिकों को एक-एक पेड़ जरूर लगा देना चाहिए। इस प्रयास से कोरोना के कारण हमारी अर्थव्यवस्था में आने वाली सामयिक गिरावट की भरपाई आने वाले समय में पर्यावरण समवर्धन के माध्यम से की जा सकती है। पीपल बाबा भारत सरकार और देश के सभी प्रदेश सरकारों के लिए भी एक सुझाव देते हुए कहते हैं कि “महात्मा गाँधी राष्ट्रीय रोजगार कार्यक्रम के तहत ज्यादे से ज्यादे पेड़ लगाकर श्रमिकों को रोजगार सृजन का राश्ता खोलें और आने वाले समय में भारत के पर्यावरण को स्वच्छ बनाया जा सकेगा | स्वच्छ भारत मिशन में स्वच्छ पर्यावरण की भी हिस्सेदारी होनी चाहिए और इसे पेड़ लगाकर ही सुनिश्चित किया जा सकता है।

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