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‘हमारा पति मर गए हैं… लाश घर पर ही रखी है… बच्चे रो रहे हैं… घर पहुंचा दीजिए…’

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Ground Report News Desk | New Delhi

देश में लॉकडाउन 4.0 की शुरूआत हो चुकी है लेकिन अब तक प्रवासी मजदूरों को घर तक पहुंचाने का बेहतर बंदोबस्त नहीं हो पाया है। सरकार हर दिन प्रेस कॉफ्रेंस के जरिए प्रवासी मजदूरों को उनके घर तक पहुंचाने की बात तो कर रही है लेकिन जमीनी हकीकत कुछ ओर ही नजर आती है। इन मजदूरों की कई दर्दभरी खबरें आप तक पहुंच चुकी हैं इसी फेहरिस्त में एक अन्य खबर पढ़िए। दिल्ली बॉर्डर पर महिला मजदूर बातों ही बातों में फफक कर रो पड़ी। उसके शब्द थे पति का देहांत हो गया घर पर उनकी लाश है मुझे घर पहुंचा दो।

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इस मामले में जनसत्ता ने समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से खबर दी है कि, दिल्ली बॉर्डर पर अन्य श्रमिकों के साथ सुनीता नाम की एक महिला श्रमिक सर पर झोला उठाए फफककर रो पड़ी और रोते हुए बताया कि वहां सासाराम में उनके पति का देहांत हो चुका है उनकी लाश घर पर ही रखी है। घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं। लड़का बुरी तरह रोता है। ऐसी मजबूरी में उन्हें घर जाना पड़ रहा है लेकिन यूपी गेट के पास दिल्ली-यूपी बॉर्डर क्रॉस नहीं कर दी गई।

सर पर झोले का बोझ ऊपर से पति को अंतिम बार देखने की चाहत। आंखों में आंसू और चेहरे के हावभाव बयां करते घर जाने की तड़प। महिला श्रमिक सुनिता ने अपनी आपबीती बताते हुए कहा, हमारा पति मर गए हैं… बच्चे रो रहे हैं… घर पहुंचा दीजिए…

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर सुनीता शनिवार रात से हैं। वे बस किसी भी तरह अपने घर जाना चाहती हैं। न कोई पानी के लिए पूछने वाला है न खाने के लिए। बस एक ही बात कही हमें किसी भी गाड़ी में बैठा दीजिए। हम चलें जाएंगे। नई दिल्ली रहते हैं। यहां तक पैदल आ गए हैं। पुलिस भी कुछ नहीं बता रही।

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