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Lockdown Diary: लॉकडाउन डायरी- डरें या डटें!

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Lockdown Diary Coronavirus Pandemic: जीवन के दो पहलू- सुख और दुख। जिनमें सुख की कीमत ज्यादा और दुख की कीमत कम है। बीते 1 साल से हर व्यक्ति उस सुख की तलाश में है, क्योंकि महामारी के कारण जो भी परेशानियां हुई उनसे हर व्यक्ति एक निराशा की ओर जाता हुआ- सा नजर आया है। लॉकडाउन (Lockdown Diary Coronavirus Pandemic) में परिवार एकत्रित हुए लेकिन हर व्यक्ति (परिवार के साथ ही सही) बाहर घूमे बिना अपना मनोरंजन नहीं करना चाहता। महामारी के कारण हुए लॉकडाउन के बहुत बहुत सारी घटनाएं हुई जैसे प्रवासी मजदूरों का पलायन, लोगों को बेरोजगारी और खाने-पीने की कमी, मृत्युवश परिवारों का बिछड़ना, आदि। ऐसे वक्त में लोगों को महामारी से डरने की नहीं बल्कि डटने की जरूरत है। जानते हैं, इन बीते दिनों में हमें क्या पता चला-

  • हम बिना कहीं भी जाए छुट्टियां बिता सकते हैं।
  • हमें कभी अंधविश्वास नहीं करना चाहिए क्योंकि कोई भी पंडित, पूजा या भविष्यवाणी कर्तो हमें स्वस्थ नहीं रख सकता।
  • स्वास्थ्य सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।
  • जब तक तेल इस्तेमाल नहीं होता तब तक उसकी कीमत शून्य के बराबर है।
  • व्यक्ति चाहे तो घर रह कर भी अपना कार्य कर सकते हैं।
  • सिर्फ महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरुष भी खाना बनाना, सफाई करना जैसे कार्य कर सकते हैं।
  • जानवरों को चिड़ियाघर में बंद पिंजरे में कैसा लगता है यह लॉकडाउन ने सबको बता दिया।
  • प्रकृति मानव प्रक्रिया के बिना ही पुनःनिर्मित हो सकती है।
  • हर व्यक्ति फास्ट फूड के बिना भी जी सकता है।
  • अभिनेता असल जिंदगी के हीरो नहीं वह मनोरंजन का एक आधार है बस।
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तो चलिए एक संकल्प लेते हैं बीमार व्यक्ति को संभालने का और संभलने का। किसी भी रूढी वादी प्रक्रिया से बचने का और एकजुट होकर सिर्फ अपनी नहीं, अपने परिवार की नहीं, पुलिस की नहीं, सरकार की मदद करने का, क्योंकि यह सभी एक ही पहलू के बहुत सारे सिक्के है लेकिन पहलू एक है। अगर आपको यह आर्टिकल अच्छा लगा तो हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।

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