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Lockdown 4.0: आख़िर मोदी सरकार 20 लाख करोड़ लाएगी कहां से?

PM Modi Address to nation lockdown extension
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Ground Report News Desk | New Delhi

भारत में अब तक दुनिया का सबसे कठोर लॉकडाउन रहा है और इस दौरान अर्थव्यवस्था के कमजोर वर्ग की मदद करने के लिए सरकार ने नाममात्र की ही आर्थिक सहायता दी थी। बीते मंगलवार को पीएम मोदी ने जब रात 8 बजे देश को संबोधित करना शुरू किया तो सब राहत पैकेज की उम्मीद कर रहे थे। लेकिन यह किसी को अंदाजा नहीं था कि पीएम 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज का ऐलान करेंगे। यह देश की GDP का 10 फीसदी है। ऐसा पहली बार हुआ है जब देश में इतना बड़ा राहत पैकेज दिया गया है।

पीएम ने कहा, “कोरोना संकट का सामना करते हुए, नए संकल्प के साथ मैं आज एक विशेष आर्थिक पैकेज की घोषणा कर रहा हूं। ये आर्थिक पैकेज, “आत्मनिर्भर भारत अभियान” की अहम कड़ी के तौर पर काम करेगा।” ये पैकेज भारत की GDP का करीब-करीब 10 प्रतिशत है। इन सबके जरिए देश के विभिन्न वर्गों को, आर्थिक व्यवस्था की कड़ियों को, 20 लाख करोड़ रुपए का सपोर्ट मिलेगा।

पैकेज की भारी-भरकम राशि देखकर लगता है कि सरकार उन चीजों की भरपाई करना चाहती है जो पिछले कुछ हफ्तों में बहुत बुरी तरह से गलत हो गए हैं- विशेष रूप से प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों की भयानक दुर्दशा, जिन्हें राज्यों ने लावारिस छोड़ दिया है। पैकेज के विवरण से पता चलेगा कि वास्तव में गरीब और असंगठित श्रमिक वर्ग के लिए कितना प्रावधान किया गया है।

हालांकि विदेशों में जिस तरह से लोगों के हाथ में पैसे मिले हैं, वैसा भारत में नहीं होने वाला है। यहां सरकार हाथ में पैसे नहीं देगी। सरकार लेबर, लैंड, लॉ में सुधार करेगी और लिक्विडिटी को सपोर्ट करेगी। वास्तविक पैकेज 13 लाख करोड़ रुपए का है। पहले तो यह समझिए कि जो पैकेज घोषित हुआ है, वह 20 लाख करोड़ पहले के सभी पैकेज को मिलाकर किया गया है। आरबीआई ने अब तक 5 लाख करोड़ रुपए का पैकेज दिया है। 1.70 लाख करोड़ सरकार ने दिया है। कुल मिलाकर 6.70 लाख करोड़ रुपए तो यही हो गए। अब 20 लाख करोड़ में से 6.70 को हटा दें तो सरकार 13 लाख करोड़ रुपए का है पैकेज ।

प्रधानमंत्री मोदी ने जिस पैकेज का ऐलान किया है, वह भारत की कुल जीडीपी का दस फीसदी हिस्सा है। भारत से आगे सिर्फ जापान, अमेरिका, स्वीडन, जर्मनी ही हैं । इतना ही नहीं, भारत ने जिस पैकेज का ऐलान किया है वह UK से लगभग दोगुना और चीन से लगभग तीन गुना जीडीपी का हिस्सा है। ग्राफिक्स की मदद से समझिए कि अबतक किस देश ने अपनी GDP का कितना हिस्सा राहत पैकेज के लिए दिया है

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आख़िर सरकार 20 लाख करोड़ कहां से लाएगी?
सरकार ने कोविड-19 संकट के चलते चालू वित्त वर्ष के उधार में बढ़ोतरी कर दी है। अब सरकार ने वित्त वर्ष 2021 के लिए 12 लाख करोड़ रुपए उधार लेने का फैसला किया है। यह राशि बजट में पहले से तय उधारी के लक्ष्य 7.80 लाख करोड़ रुपए से 4.20 लाख करोड़ रुपए ज्यादा होगी। बीते दिनों सरकार की ओर से कहा गया था कि कोरोना संकट के कारण कर्ज के लक्ष्‍य को बढ़ाना जरूरी हो गया था। पहली छमाही में 6 लाख करोड़ रुपये मार्केट गिल्ट (बॉन्ड) के रास्ते से जुटाई जाएगी। सरकार उधार को और बढ़ा सकती है। या इसे रिच लोगों पर टैक्स लगाकर कुछ हासिल कर सकती है।

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20 लाख करोड़ रुपये के पैकेज का महत्व इससे है कि सरकार गरीबों के हाथ में कितनी राशि देगी । मुख्य रूप से यह देखने की जरूरत है कि समाज के सबसे ज्यादा जरूरतमंद तबके को कितनी नकदी तुरंत पहुंचाई जाएगी। इस तरह के एक अभूतपूर्व आर्थिक संकट में कुल कार्यबल का लगभग 25 फीसदी बेरोजगार और 25 फीसदी को ये विश्वास नहीं है कि वे वापस नौकरी पर जा पाएंगे या नहीं। सरकार को सिर्फ इस बात पर ध्यान देना है कि अर्थव्यवस्था को वापस सामान्य स्थिति में लौटने तक भारत का 50 फीसदी कार्यबल कैसे अपना घर चलाएगा।

भारत में मजदूरों की कुल संख्या 50 करोड़ है और मोदी के पैकेज को इस बात से आंका जाना चाहिए कि यह भारत के आधे श्रमिकों (यानी 25 करोड़) का किस तरह मदद किया जाएगा, जो या तो बेरोजगार हैं या फिर सब कुछ सामान्य हो जाने के बाद काम पर वापस जाने का इंतजार कर रहे हैं। इसलिए पैकेज का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि लोगों को तत्काल नकद सहयोग दिया जाए।