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आत्मनिर्भर या कर्ज़निर्भर भारत?

loan scheme launch for street vendors
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Ground Report | News Desk

70 दिन के लॉकडाउन में देश में तमाम लोगों की आजीविका खतरे में आ गई। अब धीरे-धीरे लॉकडाउन खोलने की कोशिश की जा रही है। लेकिन इस लॉकडाउन से सबसे अधिक प्रभावित हुए स्ट्रीट वेंडर्स (Loan Street Vendors) अभी भी अपनी जीविका को पटरी पर ला पाने में नाकाम है। कोरोना का संकट अभी थमा नहीं है। लोगों में संक्रमण का भय बना हुआ है। सड़क के किनारे सामान बेचने वाले लोगों से खरीददारी करने से लोग कतरा रहे हैं। स्थिति को पहले जैसा होने में काफी समय लगेगा ऐसे में रेहड़ी पटरी वालों को नए रोज़गार तलाशने होंगे। सरकार ने ऐसे रेहड़ी पटरी वालों को राहत देने के लिए आसान कर्ज़ मुहैया कराने की योजना बनाई है। अब पीएम स्व निधि स्कीम के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को 10 हजार का कर्ज दिया जाएगा। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने नई दिल्ली में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 1 जून को हुई केंद्रीय कैबिनट की बैठक में ‘आत्मनिर्भर भारत योजना’ को मंजूरी दे दी गई।

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कोरोना संकट से बिगड़ी देश की अर्थव्यवस्था को ठीक करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ की शुरुआत की थी। इसके तहत 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया गया था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बीते 14 मई को बताया था कि रेहड़ी-पटरी और ठेले पर समान बेचने वाले 50 लाख लोगों को लोन देने के लिए 5 हजार करोड़ रुपए की व्यवस्था आर्थिक पैकेज के तहत की गई है। इस स्कीम में प्रति व्यक्ति अधिकतम 10 हजार रुपए का लोन मिलेगा।

कैसे मिलेगा कर्ज़?

24 मार्च तक सड़क किनारे रेहड़ी लगाने वाले, ठेला चलाने वाले, वेंडर्स और हॉकर्स को इस योजना का लाभ मिलेगा। सरकार इन लोगों को 10 हज़ार तक का कर्ज़ उपलब्ध कराएगी जिससे की वे दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो सकें। यह कर्ज 1 साल की अवधी में मासिक किश्तों में चुकाना होगा। जल्दी कर्ज चुकाने वाले वेंंडर्स को सरकार 7 प्रतिशत ब्याज़ डायरेक्ट अकाउंट में ट्रांस्फर करेगी। जल्दी कर्ज चुकाने वाले वेंडर्स से कोई अतिरिक्त चार्च नहीं लिया जाएगा साथ ही उन्हें क्रेडिट स्कोर दिया जाएगा जिसके सहारे वे भविष्य में 20 हज़ार तक का कर्ज लेने के पात्र होंगे। सरकार का उद्देश्य रेहड़ी पटरी वालों को आत्मनिर्भर बनाना है। सरकार का मानना है कि असंगठित क्षेत्र से कई बार ये लोग कर्ज लेते हैं जिसमें उन्हें 100 फीसदी तक कर्ज़ चुकाना पड़ता है। इस योजना से छोटे कामगारों को मदद मिलेगी।

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