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सरकार ने बीते 5 वर्षों में कितने शहरों के नाम बदले; देखें पूरी सूची

list of cities renamed in the last 5 years

list of cities renamed in the last 5 years : क्या किसी शहर,गांव या क्षेत्र का नाम बदलने से उसके हालात में बदलाव हो जाता है? इसका सीधा सा जवाब है नहीं। नाम बदलने से ना तो शहर में कोई आर्थिक क्रांति आती है। ना ही किसी परेशानी से मुक्ती मिलती है, ना शहर का विकास होता है, ना ही किसी को रोज़गार मितला है। क्या नाम बदने के पीछे ध्रुवाकरण की राजनीति है या फिर एक समुदाय को खुश करके उसका राजनीतिक इस्तेमाल करना।

क्या किसी गांव का नाम बदल देने से क्या उस गांव की सब परेशानी दूर हो जाती है ? नहीं, नाम बदलने से कुछ नहीं होता। फिर हमारे देश में नाम बदलने की इस मुहिम ने इतना ज़ोर क्यों पकड़ रखा है। संसद में सरकार ने बताया है कि उसने 7 शहरों और कस्बों के नाम बदने को मंज़ूरी प्रदान की है। आइये समझते हैं नाम बदने के पीछे कुछ कारण। list of cities renamed in the last 5 years ।

5 वर्षों में सरकार ने इन शहरों के बदले नाम

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केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय (Union Minister of State for Home Nityanand Rai) ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने बीते 7 सालों में इलाहाबाद (Allahabad) सहित 7 शहरों और कस्बों का नाम बदलने को मंजूरी प्रदान की है। संसद में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार को पश्चिम बंगाल (West Bengal) का नाम तीन भाषाओं में रखने का प्रस्ताव आया था।  राज्य सरकार ने ये प्रस्ताव भेजा था।

पहले 15 दिसंबर, 2018 को इलाहाबाद (Allahabad) का नाम प्रयागराज (Prayagraj) किया गया। मंत्री ने बताया आंध्र प्रदेश के राजमुंदरी (Rajahmundry city in Andhra Pradesh) शहर का नाम राजा महेंद्रवरम, झारखंड में नगर उंटारी (Untari in Jharkhand ) का नाम श्री बंशीधर नगर, मध्य प्रदेश के बीरसिंहपुर पाली (Birshingpur Pali) को मां बिरासिनी धाम, होशंगाबाद (Hoshangabad ) का नाम नर्मदापुरम और बाबई का नाम माखन नगर करने को सरकार ने मंज़ूरी दी है।

क्या मुस्लिम और उर्दू वाले नाम ही बदले जा रहे

list of cities renamed in the last 5 years : जो नाम सबसे अधिक चर्चा में रहा। वो था इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज किया जाना। 17 अक्टूबर 2018 को आधिकारिक रूप से प्रयागराज कर दिया गया। नाम बदलने को लेकल दलील दी गई कि 16वीं सदी में इसको इलाहाबाद किया गया। काफी समय से हिंदू संगठन ये मांग करते आए थे कि इलाहाबाद हिंदू आस्था का केंद्र है। इसका नाम इलाहाबाद से बदलकर प्रयागराज किया जाना चाहिए। सूबे में भाजपा की सरकार बनते ही इस मुहीम ने ज़ोर पकड़ा।

सरकार ने कई शहरों के नाम बदल दिए। सरकार ने जिन 7 शहरों के नाम बदने की मंज़ूरी दी है। उसमें होशंगाबाद भी हिंदू संगठनों की मांग के बाद चर्चा में आया। ये नाम भी मुस्लिम पहचान के चलते सरकार को अखरा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने होशंगाबाद शहर को ‘नर्मदापुरम’ करने की मंज़ूरी दे दी।

देश में लगातार दर्जनों ऐसे शहर-गावं के नाम हैं जिनको मुस्लिम समुदाए से जुड़ा या उर्दू भाषा से जुड़ा होने के चलते बदने की मुहीम जारी है। ताज़ा विवाद हैदराबाद के नाम को लेकर छिड़ा है। पीएम मोदी ने अपने दौरे के समय भाग्यनगर से शहर को पुकारा था। जिसको बाद अब इस बहस ने तेज़ी पकड़ ली है कि हैदराबाद का नाम भाग्यनगर हो जाएगा।

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