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क्या शराब की दुकानें खोलने से बढ़ जाएगी घरेलू हिंसा?

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ग्राउंड रिपोर्ट | न्यूज़ डेस्क

देश में लॉकडाउन का तीसरा चरण (Lockdown 3 India) शुरू हो चुका है। सरकार ने ऑरेंज और ग्रीन ज़ोन के लिए रियायतों का ऐलान किया है। सरकार ने शराब के ठेके भी खोल दिये हैं। सरकार के इस कदम की सोशल मीडिया पर आलोचना हो रही है। लोगों का कहना है कि इस कदम से घरों में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराध और हिंसा (Domestic Violence) में बढ़ोतरी हो जाएगी। देश में लॉकडाउन होने की वजह से लोग घरों में कैद हैं, ऐसे समय में घरेलू हिंसा के मामले दुनिया भर में रिकॉर्ड स्तर पर बढ़े हैं। भारत में भी महिला हेल्पलाइन नंबरों पर आने वाली शिकायतों में इस दौरान बढ़ोतरी देखी गई।

जावेद अख्तर ने इस पर ट्वीट कर कहा कि शराब की दुकान खोलने के भयानक परिणाम हो सकते हैं। कई रिपोर्ट यह बताती हैं कि लॉक डाउन के दौरान महिलाओं के खिलाफ अपराध बढ़े हैं। ऐसे में शराब की दुकानें खोलने से घरेलू हिंसा में और बढ़ोतरी होगी।

हाल ही में जब शराब की दुकान खोली गई तो लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। लाइनों में लड़कियां भी खड़ी दिखाई दी। इस पर फ़िल्म निर्देशक रामगोपाल वर्मा ने ट्वीट किया, देखिए शराब की दुकान के बाहर लगी लाइन में कौन खड़ी हैं? ये वही हैं जो शराबी लोगों का जमकर विरोध करती हैं। वर्मा के इस ट्वीट पर सोनम महापात्रा भड़क गईं और उन्होंने उनकी जमकर क्लास लगाते हुए लिखा, ‘प्रिय मिस्टर राम गोपाल वर्मा, अब वक्त आ गया है कि आप उन लोगों की लाइन में जाकर खड़े हो जाएं जिन्हें असली ज्ञान की सबसे ज्यादा जरूरत है। ताकि आपको पता चले कि ये जो ट्वीट आपने किया है वो महिलाओं से भेदभाव जैसी चीज को तो बढ़ावा दे ही रहा है और समाज के नैतिक मापदंडों से भी सरोकार नहीं रख पा रहा। आपको बता दूं कि महिलाओं को भी पुरुषों की तरह शराब खरीदने और पीने की छूट है। पुरुषों को महिलाओं पर शराब पीकर अत्याचार करने का कोई हक नहीं है।

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कई रिपोर्ट्स यह दावा करती हैं कि घरों में पुरुष शराब पीकर महिलाओं के साथ मार पीट करते हैं। यहां तक कि बच्चे भी इस हिंसा का शिकार होते हैं।

लॉकडाउन में बढ़ी घरेलू हिंसा?

राष्ट्रीय महिला आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 315 शिकायतें ऑनलाइन और वॉट्सऐप पर प्राप्त हुई हैं। पिछले महीने डाक द्वारा कोई शिकायत नहीं मिली थी। इसके बावजूद पिछले वर्ष अगस्त से शिकायतों की संख्या अधिक है। पिछले महीनों के दौरान इन शिकायतों में ऑनलाइन और डाक से मिली शिकायतें शामिल थीं। आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने बताया कि घरेलू हिंसा की अधिक शिकायतों के लिए 25 मार्च से लगाए गए लॉकडाउन को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी जताई चिंता

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने इन हालातों में महिलाओं एवं बालिकाओं के प्रति घरेलू हिंसा के मामले में भयावह बढ़ोतरी दर्ज किए जाने पर चिंता जताते हुए कहा है कि हिंसा महज रणक्षेत्र तक ही सीमित नहीं है और कई महिलाओं तथा बालिकाओं के लिए खतरा सबसे ज्यादा वहां होता है, जहां वे सबसे सुरक्षित होनी चाहिए यानी उनके घरों में। वास्तविकता भी यही है। देश, काल, धर्म, जाति और वर्ग से परे विश्व भर की आधी से अधिक महिलाओं के जीवन का कठोर सच परिवार के पुरुष सदस्य विशेषकर जीवन साथी से प्राप्त हिंसात्मक व्यवहार है।

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क्यों बढ़ रहे घरेलू हिंसा के मामले?

महिलाओं के खिलाफ अपराध सबसे ज़्यादा वहीं होते हैं जिसे सबसे सुरक्षित स्थान माना जाता है यानी घर पर। इसकी मुख्य वजह घरों में महिलाओं का सम्मान न होना है। महिलाओं को पुरुषों से कमतर समझा जाता है। पुरुष अक्सर अपनी नाकामयाबी और अवसाद का गुस्सा महिलाओं पर निकालते हैं। लॉकडाउन में लोगों में आर्थिक तंगी की वजह से अवसाद बढ़ा है। ऐसे में घर की महिलाएं पुरुषों के तनाव का शिकार हो रही हैं।

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