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कश्मीर: क्या सच में पटरी पर लौटने लगी है ज़िंदगी?

Hindus living in Kashmir are not all 'Kashmiri Pandits': High court
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ग्राउंड रिपोर्ट । न्यूज़ डेस्क

जम्मू कश्मीर से 5 अगस्त को धारा 370 हटा दी गई और पूरे राज्य में धारा 144 लगा दी गई। सुरक्षा की दृष्टि से यह कदम उठाया गया । संचार व्यवस्थाएं पूरी तरह बंद कर दी गईं। इंटरनेट, लैंडलाईन, केबल टीवी और तमाम सैल्यूलर सेवाएं भी। लोग अपने घरों में कैद होकर रह गए न उनके पास दूसरे राज्यों में रह रहे अपने बच्चों से बात करने का कोई ज़रिया था न ही बाहरी दुनिया में घट रही घटनाओं को जानने का कोई साधन। ईद के दिन कर्फ्यू में ढील दी गई ताकि लोग ईद के मौके पर नमाज़ अदा कर सकें और एक दूसरे को मुबारकबाद दे सकें। सरकार की ओर से ईद के मौके पर बाधाई देते और नमाज़ अदा करते लोगों की तस्वीरें जारी की गई थीं। ईद के तुरंत बाद कर्फ्यू फिर से सख़्त कर दिया गया । लेकिन अंतर्ऱाष्टट्रीय मीडिया द्वार कश्मीर में तनाव का वीडिया जारी हो गया। जिसे सरकार ने सिरे से नकारते हुए कहा की राज्य में हालात सामान्य है। अफवाहों पर ध्यान न दें।

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शुक्रवार 16 अगस्त को सरकार ने कई इलाकों से कर्फ्यू हटाने और संचार व्यवस्था बहाल करने की घोषणा कर दी। और सोमवार से स्कूल और सरकारी दफ्तरों को सुचारु रुप से चालू करने की भी घोषणा कर दी। यह वाकई राहत की खबर है। राज्य के मुख्य सचिव बी. आर. सुब्रमण्यम ने यह जानकारी दी। उन्होने यह भी बताया की घाटी में आतंकवाद के खतरे को देखते हुए सरकार ज़रुरी कदम उठा रही है। फिलहाल कश्मीर में हालात सामान्य बने हुए हैं, किसी भी तरह की कोई अप्रिय घटना घटित नहीं हुई है।

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मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि 12 जिलों में सामान्य रुप से कामकाज हो रहा है जबकि मात्र 5 जिलों में सीमित पाबंदियां लगाई गई हैं। उन्होने उम्मीद जताई की धीरे-धीरे सारी पाबंदियां हटा ली जाएंगी और जनजीवन फिर से सामान्य हो जाएगा। सड़कों पर सार्वजनिक वाहन दिखने लगे हैं। दफ्तरों का काम शुरु हो गया है।