पाक के मुस्लिम परस्त और हिंद के बहु’धार्मिक इस बात के लिये दोषी रहेंगे!

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विचार।। कार्तिक सागर समाधिया

इस देश की बात कर लेते हैं, दो मिनट …बस. मैं आहत नहीं हूँ. हमें आदत डालनी होगी. कि हम उधार का जीवन जी रहे हैं. बात इतनी है कि हम आपस में लड़ते देखे जा सकते हैं . जिस वक्त यह बातें लिख रहा हूँ उस समय मेरे पास एक बोर्ड लगा है .जो हिंदी भाषा की जयकार लगा रहा है . लेकिन बाजू में एक बोर्ड लगा है जिसे उधार की भाषा अन्ग्रेजी में चस्पा किया हुआ. हमारा लड़ना यहीं से शुरू होता है. भाषा की पीठ सीधी करती निराशा. कल भोपाल के नादरा बस स्टैंड पर कड़कती ठंड में पसरे वाशिन्दे स्मार्ट होती मध्यप्रदेश की राजधानी में देखे. फोटो शेयर कर रहा हूँ. अभी उज्जैन रास्ते पर हूँ. महाकाल मंदिर में होती धार्मिक आस्था का व्यापार पर पहले लिख चुका हूँ. पुलवामा में हुए आतंकी हमले ने जैसे राष्ट्र को जिन्दा किया हुआ है. लेकिन अफ़सोस हम उधार का जीवन जी रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय ताकत का जोर दो देशों की समस्या को बनाये रखने पर है. क्या हम दो मिनट सोच नहीं सकते भारत पाक को कब्र बनाने में किस किस का हाथ रहा. मूल समस्या को समझने पर वार करने से अच्छा कुछ नहीं हो सकता. आज दोनों देशों की मूल बातें युवाओं को सही रास्ते दिखाना है. पांच साल की बच्ची आक्रोश में पाकिस्तान को चेता रही है. वीडियो वायरल है. देख सकते हैं. 24 साल के जीवन इस देश में इस तरह की परेशानी हजारों दफ़ा पड़ा लेकिन हल सिर्फ जहन की बरीकियो में मिला. उम्मीद कर सकते हैं तो सिर्फ ऐसे वक्त में खुद पर. पाकिस्तान के इस्लाम परस्त एक दिन जरुर जन्नत में अपना हिसाब देंगे. लेकिन भारत में बहु’धार्मिक लोग जरुर इस बात के दोषी रहेंगे, कि पाकिस्तान से संबंध क्यों नहीं सुधर पाये और हम दोषी रहेंगे, दोनों मुल्क के लोग …क्यों प्रकर्तिक रूप से सुहागन कश्मीर को विधवा कर दिया गया..दोनों मुल्क उधार के हथियार पर अपना आगे का सफ़र तलाश रहे हैं , कहीं ये अंतिम न हो ….