Lakshadweep

Lakshadweep: भूमि अधिग्रहण से परेशान लक्षद्वीप के स्थानीय लोग, बोले- नए कानून से हमारे अधिकार कम हों जाएंगे

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

Lakshadweep: पिछले साल बने लक्ष्यद्वीप( Lakshadweep) के नए प्रशासक प्रफुल्ल पटेल से स्थानीय लोग काफी नाखुश हैं। लक्षद्वीप (Lakshadweep) भारत का सबसे छोटा केंद्र शासित राज्य है। लक्षद्वीप एक द्वीपसमूह है, जिस पर 36 द्वीप हैं। इसे भारत का मालदीव भी कहा जाता है। इस केंद्रशासित प्रदेश में विकास के नाम पर भूमि अधिग्रहण हो रहा है। स्थानीय लोगों की पुराने समय से चली आ रही परंपराओं और संस्कृति को बदलने के लिए नए कानून लाये गए हैं जिसकी वजह से वहां के लोग संग विपक्ष पार्टियां भी विरोध कर रहीं हैं।

कौन हैं प्रफुल्ल पटेल

गुजरात के पूर्व मंत्री प्रफुल्ल पटेल को दिसंबर 2020 में लक्षद्वीप का प्रशासक बनाया गया था। पूर्व  प्रशासक दिनेश्वर शर्मा के निधन बाद उन्हें जिम्मेदारी सौंपी गई थी। दिनेश्वर शर्मा इस द्वीपसमूह के 34वें प्रशासक नियुक्त किए गए थे। 2020 में फेफड़ों की समस्या के चलते उनका निधन हो गया था ।

#SaveLakshadweep: लक्षद्वीप के प्रशासक प्रफुल्ल पटेल के खिलाफ लोगों में आक्रोश क्यों?

क्यों हो रहा है विरोध

नए प्रशासक के कानूनों से लोग स्थानीय लोग काफी परेशान हो चुके हैं। लक्षद्वीप में कुछ दिनों से बीफ बैन, दो बच्चों से ज्यादा वालों के पंचायत चुनाव लड़ने पर पाबंदी, बिना कारण बताए गिरफ्तारी और भूमि अधिग्रहण से जुड़े नियमों का स्थानीय लोग और विपक्ष पार्टी मिलकर  विरोध कर रहे हैं। 

क्या कहते हैं नए नियम

विकास के नाम पर जो नए नियम लागू किये गए हैं उनमें पहले कोच्चि से यहां आने वालों को आठ दिन क्वारंटाइन होना पड़ता था। लेकिन अब  48 घंटे पहले की RTPCR निगेटिव रिपोर्ट देने का नियम बना दिया गया है। आरोप है कि इससे यहां कोविड मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ गयी है।

READ:  10 Indian women activists who have created change

दूसरा 29 जनवरी 2021 को एक एंटी सोशल एक्टिविटी रेग्युलेशन ड्राफ्ट लाया गया था जिसके तहत कानून-व्यवस्था के नाम पर किसी व्यक्ति को एक साल तक बिना ट्रायल हिरासत में रखा जा सकता है।

तीसरा 25 फरवरी 2021 को नोटिफिकेशन के जरिए बीफ बैन कर दिया गया, जबकि यहां की 96 फीसदी आबादी मुस्लिम है।

चौथा लोगों से विकास के नाम पर पर्यटन बढ़ाने और रोड चौड़ी करने के लिए स्थानीय लोगों से उनकी जमीनें ले ली जाएंगी।

बेलगाम हो रहे पर्यटन

28 मार्च को एक ड्राफ्ट जारी किया गया। इसके तहत प्रशासन विकास कार्यों के लिए किसी जगह को प्लानिंग एरिया घोषित कर दिया जाएगा। यह किसी को संपत्ति से हटाने, स्थानांतरित करने, अधिग्रहण और नियंत्रण का हक देता है। इनका मकसद खनन, राष्ट्रीय राजमार्गों को बनाना, रेलवे, ट्रामवे को बनाना है। लोगों को डर है कि ऐसी बेलगाम गतिविधियों से द्वीपों के पारिस्थितिकी तंत्र पर बुरा असर पड़ेगा।

लक्षद्वीप के आदिवासी खतरे में क्यों? #save_lakshadweep कैंपेन का कारण क्या है?

क्या कहना है एमएच सैयद का

एंड्रोट द्वीप के एमएच सैयद का कहना है कि इस द्वीप में इंसान 7वीं सदी से रह रहे हैं। तब से ही भोजन और व्यापार दोनों का आधार मछली पकड़ना और नारियल की खेती ही रह है। नए बदलावों से काम पर बहुत असर पड़ा है। उन इलाकों में मछली पकड़ने, नाव और जाल रखने से वंचित किया जा रहा है, जहां पारंपरिक रूप से ऐसा होता आया है।

READ:  West Bengal: Bodies found in river Ganga raised concern

शिक्षाविद स्मिता पी कुमार का क्या कहना है

शिक्षाविद् स्मिता पी कुमार कहती हैं कि प्रशासक का उद्देश्य निजी निवेश बढ़ाकर पर्यटन को बढ़ाना है। लेकिन समुद्र तटों पर निर्माण, बड़े जहाजों के परिवहन और अंधाधुंध मछली पकड़ने से स्थानीय समुदाय की आजीविका का दबाव बढ़ेगा। ऐसे संवेदनशील द्वीपों में जिम्मेदार पर्यटन की जरूरत होती है, जो स्थानीय समुदाय के हितों को ध्यान में रखकर काम करें ।

Ground Report के साथ फेसबुकट्विटर और वॉट्सएप के माध्यम से जुड़ सकते हैं और अपनी राय हमें Greport2018@Gmail.Com पर मेल कर सकते हैं।

%d bloggers like this: