‘खाने को नहीं मिला तो 1000 किलोमीटर चलकर जाएंगे घर फिर चाहे पुलिस क्यों न मारे’

Daily Wage Labours Stranded in Pune
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Ground Report | News Desk

पुणे पुलिस नें मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ के 150 मज़दूरों को आज रास्ते में ही रोक दिया ये लोग पैदल चलकर घर जाने को निकले थे। इनका कहना है कि यहां काम बंद हो चुका है हमारे रहने खाने की अब कोई व्यवस्था नहीं है तो यहां क्यों रहें। इन मज़दूरों को पुलिस ने पहले ही रोक दिया और कहा कि अपने किराये के घरों में लौट जाएं या फिर सरकार के बनाए शेल्टर होम में रहें।

मज़दूरों का कहना है कि वे अपने गांव से यहां कमाने के लिए आए थे, उन्हें लगा था 14 अप्रैल को लॉकडाउन खत्म हो जाएगा। उनकी मज़दूरी खत्म हो चुकी है उन्होंने जो भी कुछ कमाया था वह सब खत्म हो चुका है। अब उनके पास घर जाने का किराया तक नहीं है। लॉकडाउन कब खत्म होगा पता नहीं। समाजसेवियों द्वारा खाना जो दिया जाता है वह पर्याप्त नहीं है उतने में किसी बच्चे का भी पेट नहीं भरे। हम कब तक ऐसे ही लोगों की दया के भरोसे यहां रहेंगे। सरकार की तरफ से उन्हें कोई सुविधा नहीं दी जा रही है न ही खाना। मज़दूरों का कहना है कि अगर उन्हें पर्याप्त खाना नहीं मिलेगा तो वे 1000 किलोमीटर पैदल ही चलकर गांव जाएंगे। उन्होंने अनुमान लगाया है कि अगर रात-रात में भी चलें तो 15 दिनों में पहुंच जाएंगे।

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मज़दूरों का कहना है कि अब वे नहीं मानेंगे चाहे पुलिस की लाठी क्यों न खानी पड़े। आपको बता दें कि महाराष्ट्र कोरोनावायरस से सबसे ज़्यादा प्रभावित राज्य है। मंगलवार को मुंबई के बांद्रा में हज़ारों मज़दूरों की भीड़ अचानक जमा हो गई थी। जिन्हें प्रशासन ने समझा कर वापस भेजा। इन मज़दूरों को लगा था कि लॉकडाउन 14 अप्रैल को खत्म हो जाएगा और वे घर जा पाएंगे। सरकार और समाजसेवी संगठन दिहाड़ी मज़दूरों की मदद के लिए प्रयासरत हैं लेकिन लगता है कि इसका लाभ मज़दूरों को पूरी तरह नहीं मिल पा रहा है।

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