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प्रवासी मज़दूरों की मौत का आंकड़ा हमारे पास नहीं: मोदी सरकार

सरकार के पास प्रवासी मज़दूर की मौत के आंकड़े नहीं है
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देश में कोरोना महामारी के बीच संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है। विपक्ष की ओर से सरकार से प्रवासी मज़दूरों की मौत पर सवाल किया गया। इस पर सरकार की ओर से हैरान करने वाला जवाब आया है। विपक्ष ने सरकार से पूछा कि कोरोनावायरस लॉकडाउन में अपने परिवारों तक पहुंचने की कोशिश में जान गंवाने वाले प्रवासी मजदूरों के परिवारों को क्या मुआवजा दिया गया है? श्रम मंत्रालय ने इस सवाल पर लिखत जवाब में कहा कि ‘सरकार के पास आंकड़ा नहीं है, ऐसे में मुआवजा देने का ‘सवाल नहीं उठता है’

बड़ी बातें-

मंत्रालय से पूछा गया था कि क्या सरकार के पास अपने गृहराज्यों में लौटने वाले प्रवासी मजदूरों का कोई आंकड़ा है? क्या सरकार को इस बात की जानकारी है कि इस दौरान कई मजदूरों की जान चली गई और क्या उनके बारे में सरकार के पास कोई डिटेल है? क्या ऐसे परिवारों को आर्थिक सहायता या मुआवजा दिया गया है?

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विपक्ष के सवाल पर सरकार का लिखित जवाब

 
‘ऐसा कोई आंकड़ा मेंटेन नहीं किया गया है। ऐसे में इसपर कोई सवाल नहीं उठता है’

-केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार

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केंद्र सरकार के बयान पर विपक्ष हुआ लाल

सरकार के जवाब पर विपक्ष की ओर से खूब आलोचना और हंगामा हुआ। श्रम मंत्रालय ने माना है कि लॉकडाउन के दौरान 1 करोड़ से ज्यादा प्रवासी मजदूर देशभर के कोनों से अपने गृह राज्य पहुंचे हैं।


यह हैरानजनक है कि श्रम मंत्रालय कह रहा है कि उसके पास प्रवासी मजदूरों की मौत पर कोई डेटा नहीं है, ऐसे में मुआवजे का कोई सवाल नहीं उठता है। कभी-कभी मुझे लगता है कि या तो हम सब अंधे हैं या फिर सरकार को लगता है कि वो सबका फायदा उठा सकती है।’

-कांग्रेस नेता दिग्विजिय सिंह

सरकार के इस बयान पर राहुल गांधी ने भी ट्वीट कर निशाना साधा-


‘मोदी सरकार नहीं जानती कि लॉकडाउन में कितने प्रवासी मज़दूर मरे और कितनी नौकरियां गयीं। तुमने ना गिना तो क्या मौत ना हुई? हां मगर दुख है सरकार पर असर ना हुई, उनका मरना देखा ज़माने ने, एक मोदी सरकार है जिसे ख़बर ना हुई’

-राहुल गांधी

आपको बता दें कि कोरोनावायरस की वजह से हुए लॉकडाउन की वजह से करोड़ों प्रवासी मज़दूर शहर छोड़ अपने-अपने गांव को लौटे, कोई पैदल चला तो कोई साईकिल से हज़ारों किलोमीटर की यात्रा पर निकल पड़ा। इस दौरान भूख प्यास से कई मज़दूरों ने अपने जान गवां दी। कोई ट्रेन में मरा मिला तो कोई पटरी पर कटा मिला। अब सरकार कह रही है कि उन्हें नहीं पता की कितने मज़दूरों की मौत हुई उनके पास आंकड़े नहीं है। न बेरोज़गारी के आंकड़े हैं न मज़दूरों के पलायन के न उनकी मौत के। जो आंकड़े हमारी सरकार के पास हैं उन्हें वह दिखाती नहीं। एक तरह से सरकार इस मुद्दे से पल्ला झाड़ती हुई दिखाई दे रही हैं।

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