अब बिरला ने भी कहा ‘रसातल में अर्थव्यवस्था’ सुधरने में लगेंगे 18-20 महीने

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न्यूज़ डेस्क, ग्राउंड रिपोर्ट

भारत की आर्थव्यवस्था नाज़ुक हालात में है। लेकिन सरकार इस बात को स्वीकार करने को तैयार नहीं दिखती। अब कई उद्योगपति जो सरकार के खिलाफ बोलने से बचते हैं, खुलकर सरकार की नीतियों को आइना दिखा रहे हैं। हाल ही में बजाज ग्रुप के चेयरमैन राहुल बजाज ने मोदी सरकार की आलोचना की थी। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए अब बिरला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला ने भी सरकार पर हमला बोला है।

आदित्य बिड़ला ग्रुप के चेयरमैन कुमार मंगलम ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था रसातल के करीब पहुंच गयी है और इसे सुधरने में कम से कम 18-20 महीने लगेंगे। उन्होंने ये बयान हिंदुस्तान टाइम्स के कार्यक्रम हिंदुस्तान टाइम्स लीडरशिप समिट में दिया है। उन्होने यह भी कहा कि सरकार की मदद अब कंपनियों के लिए काफी नहीं है और एक आर्थिक पैकेज देने की जरूरत है।

सरकार दे विशेष आर्थिक पैकेज

आर्थिक सुस्ती को लेकर उन्होंने कहा कि सरकार की मदद के बाद भी अब हालात ऐसे बन गए हैं कि आर्थिक पैकेज जरूरी है। और अर्थव्यवस्था के हालात और सुधारने के लिए स्टिमुलस पैकेज देना चाहिए। उनके मुताबिक सरकार ने कॉरपोरेट टैक्स में जो कटौती की है उससे हुए फायदे के ज्यादातर हिस्से का इस्तेमाल पुराने कर्ज को चुकाने में हो रहा है साथ ही कुछ ऐसे भी लोग हैं जो क्षमता विस्तार कर हैं। ऐसे में सरकार को पूरी अर्थव्यवस्था के लिए पैकेज पर विचार करना चाहिए।

देने चाहिए ज़्यादा बैंकिंग लाइसेंस

पैकेज कैसा हो इसपर पर बिड़ला ने कहा कि जीएसटी को घटाकर 15 फीसदी कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था को 6 से 7 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ाने के लिए ज्यादा क्रेडिट सप्लाई और ज्यादा बैंकिंग लाइसेंस देने की जरुरत है। भारतीय अर्थव्यव्था मौजूदा वित्त वर्ष के दूसरी तिमाही में 4.5 फीसदी की दर से आगे बढ़ रही है।

RCEP से बाहर रहने का फैसला सही

देश के हितों को सुरक्षित करने के लिए सरकार के रिजनल कम्प्रेहेन्सिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप यानि आरसीईपी में शामिल नहीं होने को लेकर कुमार मंगलम बिड़ला ने सरकार का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि आरसीईपी में भारत के खिलाफ कई धाराएं थी।

टेलिकॉम सेक्टर बहुत बुरी हालत में

वोडाफोन आइडिया को डिपार्टमेंट ऑफ टेलिकॉम को 40 हजार करोड़ रुपए देना है। बिड़ला ने कहा कि सरकार को ये अहसास है कि टेलीकॉम सेक्टर बेहद मुश्किल दौर से गुजर रहा है। हालांकि उन्होंने कहा कि इस सेक्टर की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पूरा डिजिटल इंडिया कार्यक्रम इसी पर चल रहा है ऐसे में ये बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र है।

नहीं तो बंद करनी पड़ेगी कंपनी

उन्होंने ये भी कहा कि ये पहले भी सार्वजनिक तौर पर कहा जा चुका है देश में 3 निजी क्षेत्र की और एक सरकारी कंपनी होनी चाहिए। ऐसे में सरकार से स्टिमुलस पैकेज की उम्मीद लगई जा रही है जो इस सेक्टर के जिंदा रहने के लिए बेहद जरूरी है। लेकिन अगर ये मदद नहीं मिली तो कंपनी बंद करनी पड़ेगी। उन्होंने ये भी कहा कि दुनिया में कोई भी कंपनी नहीं होगी जो तीन महीने में इतने बड़े फाइन की धनराशि चुका सके।