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Krishna Janmashtami 2018: मामा कंस की इस हरकत ने कृष्ण को बनाया माखन चोर

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फाइल फोटो

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रिपोर्ट- पिंकी कड़वे

पौराणिक मान्यताओं और ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु ने पृथ्वी पर अधर्म के मार्ग पर चल रहे पापियों को धर्म के मार्ग पर लाने, असहाय लोगों की मदद करने के लिए कृष्ण रूप में अवतार लिया था। भाद्रपद माह की मध्यरात्रि को रोहिणी नक्षत्र में देवकी और वासुदेव के पुत्र रूप मे बन्दीग्रह में नटखट कान्हा का जन्म मथुरा में हुआ था।

देश भर में जन्माष्टमी के विभिन्न रंग-रूप
इस दिन संपूर्ण भारतवर्ष में कृष्ण जन्माष्टमी हर्षोल्लास से मनाई जाती है। जन्माष्टमी के विभिन्न रंग-रूप देश में देखने को मिलते है यह त्यौहार विभिन्न रूपों में मनाया जाता है। कहीं श्रीकृष्ण की पालकी सजती है तो कहीं रंगों से होली खेलकर इस दिन को हर्ष उल्लास के साथ मनाते  है, कहीं फूलों और इत्र की महक चारो दिशाओं में  फैली होती है।

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रणछोड़ को सबसे प्रिय है मक्खन
जानकारी के अनुसार, गोविंद को गेंदे के फूल बेहद प्रिय है जो उनकी पूजा अर्चना में उपयोग किए जाते हैं। जब बात जन्माष्टमी की हो तो हांडी फोड़ने का जिक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, मक्खन इस रणछोड़ को अति प्रिय है। इसके लिए वो अपनी मित्र-मंडली के संग मिलकर गोपियों के घर में चुपके से ऊपर रखा दही, मक्खन चुरा कर खाया करते थे और मटकियां फोड़ दिया करते थे।

कंस के पास भेजा जाता था दूध-मक्खन
ऐसे बहुत कम लोग है जो इस माखन की चोरी के पीछे छुपे कारण को जानते हैं। दरसल गोकुल में जितना भी दूध, दही, और मक्खन होता था उसे सारा का सारा मथुरा में कंस के पास पहुंचा दिया जाता था। जिसके चलते गोकुल के ग्वाल-बाल  इससे होने वाले लाभ से वंचित रह जाते थे जो कि गोविंद को स्वीकार नहीं था। इसलिए वे अक्सर अपने मित्रों के साथ मिलकर इस चोरी को अंजाम दिया करते थे।

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गोपियों को भाता था कृष्ण का यह अंदाज
कृष्ण का यह अंदाज गोपियों को बहेद भाता था। यही कारण था कि गोपियां उन्हें प्यार से माखन चोर कहकर पुकारा करती थी। दही हांडी की शुरुआत करने का श्रेय किसी ओर को नहीं बल्कि माँ यशोदा के राजदुलारे को ही जाता है बाकी सब केवल पर्याय है। जन्माष्टमी के आते ही मंदिरों में राधेश्याम के जीवन की मनमोहक झाँकियाँ सजाई जाती हैं।

विदेशों से भी आते हैं लाखों श्रद्धालू
भगवान कृष्ण को झूला झुलाया जाता है और उनकी लीलाओं का वर्णन कथाओं के माध्यम आयोजन भी किया जाता है। जन्माष्टमी के शुभ अवसर के समय भगवान कृष्ण के दर्शनों के लिए दूर-दूर से भक्त उनके मनमोहक रुप को देखने और पूजा में शामिल होने लोगों का जमावड़ा लग जाता हैं। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव को देखने के देश ही नहीं बल्की विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु पंहुचते हैं।

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उनके अभिषेक के लिए हल्दी, दही, घी, तेल, गुलाब जल, मक्खन, केसर, कपूर आदि चढ़ाकर लोग एक दूसरे पर उसका छिड़काव करते हैं। बांकेबिहारी को झूला झुलाया जाता है।

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