कोटा में नवजात बच्चों की मौत

कोटा: 8 घंटे में 9 नवजातों की मौत, क्या संसद के आधुनिक हो जाने के बाद अस्पतालों में हीटर लगेंगे?

Sharing is Important
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

राजस्थान का जेके लोन अस्पताल फिर चर्चाओं में है। पिछले साल कोटा का यह अस्पताल 48 घंटे के अंदर 10 नवजातों बच्चों की मौत की वजह से सुर्खियों में था। इस साल फिर इसी अस्पताल में स्टाफ की लापरवाही सामने आई है। जेके लोन अस्पताल में बुधवार रात 2 बजे से गुरुवार सुबह 10:30 बजे के बीच महज 8 घंटे के अंदर 9 नवजातों में दम तोड़ दिया। ये सभी नवजात 4 से 5 दिन के थे। परिजनों का आरोप है कि बच्चों की हालत बिगड़ने पर हम मदद के लिए गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन नाइट ड्यूटी स्टॉफ सोता रहा। बार-बार बुलाने पर भी डॉक्टर नहीं आए और उल्टा हमें डांटकर भगा दिया गया।

क्या है बच्चों की मौत की वजह?

चिकित्सा मंत्री रघु शर्मा के अनुसार 3 बच्चे मृत ही लाए गए थे, 3 बच्चों को जन्मजात बीमारी थी और 3 बच्चों की मौत फेफड़ों में दूध जाने के कारण हुई है। सीएमओ और हैल्थ मिनिस्टर ने पूरे मामले पर रिपोर्ट मांग ली। अस्पताल सूत्रों ने बताया कि रात का तापमान 12 डिग्री के आसपास पहुंच गया है। यहां 98 नवजात भर्ती हैं और 71 वॉर्मर हैं। ऐसे में लगभग हर बच्चे को वॉर्मर की जरूरत है लेकिन उपलब्धता के बावजूद 11 वॉर्मर खराब पड़े हैं। पिछले साल भी वॉर्मर की कमी उजागर हुई थी। 10 दिसंबर की सभी मौतें तड़के तेज सर्दी के समय ही हुई हैं। इस समय 24 घंटे का सबसे कम तापमान होता है। हिंदुस्ताल लाईव के अनुसार यहां नेबुलाइजर भी 56 की संख्या में आए थे, लेकिन 20 खराब हैं। इंफ्यूजन पंप का हाल भी जुदा नहीं है। 89 में से 25 अनुपयोगी हैं। सात बच्चे अस्पताल में ही जन्मे थे, दो रेफर हुए थे मृत नवजातों में 7 बच्चों का जन्म अस्पताल में हुआ। 2 बच्चे बूंदी से रेफर होकर आए थे। सभी बच्चे 1 से 7 दिन के थे।

READ:  International Tiger Day: A look into India’s Tiger Population

ALSO READ: मॉं अपने नवजात बच्चों के शव देख बिलख रही हैं, शिवराज मामा सो रहे हैं

मध्यप्रदेश में भी मौत का तांडव

ऐसा ही कुछ हाल मध्यप्रदेश का है। मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में 6 दिनों में 12 बच्चों की मौत हो गई है। दूसरे जिलों से भी नवजात बच्चों की मौत की खबर आ रही है। आदिवासी बहुल अनूपपुर, मंडला और सागर में नवजातों ने दम तोड़ दिया है। इन बच्चों की मौत का कारण सांस लेन में दिक्कत और निमोनिया बताया जा रहा है। शिवराज सरकार ने जांच के आदेश तो दे दिए हैं लेकिन वो जागे हैं तब जब कई घरों के चिराग बुझ चुके हैं।

READ:  क्या मौसम में बदलाव के बाद खत्म हो जाएगा कोरोनावायरस?

बड़ा सवाल

हमारे देश की संसद को आधुनिक बनाया जा रहा है, यह काम रिकॉर्ड समय में पूरा हो जाएगा। हमारे नेता इतनी ही प्रतिबद्धता आम जनता की सुविधाओं में क्यों नहीं दिखाते। हमारे अस्पतालों में कभी हीटर नहीं होता, तो कभी ऑक्सीज़न खत्म हो जाती है। कभी डॉक्टर नहीं होते तो कभी एंबुलेंस समय पर नहीं पहुंचती। घटना होती है मीडिया दिखाती है राजनीतिक भ्रमण शुरु हो जाते हैं। बीजेपी शासित राज्य में हो तो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी पहुंच जाते हैं खबर लेने। कांग्रेस शासित राज्य में हो तो योगी पहुंच जाते हैं। 2 चार दिन का ड्रामा होता है। आश्वसान दिया जाता है, जांच होती है, डॉक्टर सस्पेंड हो जाते हैं। फिर नया साल आता है वही लापरवाही दोहराई जाती है। पिसता रहता है आम आदमी, बुझते रहते हैं नये भारत के नए चिराग। कब सबक लेगा यह सिस्टम?

READ:  मॉं अपने नवजात बच्चों के शव देख बिलख रही हैं, शिवराज मामा सो रहे हैं

Ground Report के साथ फेसबुकट्विटर और वॉट्सएप के माध्यम से जुड़ सकते हैं और अपनी राय हमें [email protected] पर मेल कर सकते हैं।