जिस अस्पताल में बच्चे दम तोड़ रहे हैं, वहां मंत्री के स्वागत में कार्पेट बिछाने का क्या तुक है?

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विचार | पल्लव जैन

राजस्थान के कोटा में पिछले एक महीने में 100 से ज़्यादा बच्चे दम तोड़ चुके हैं। ऐसी ही खबर राजस्थान के बाड़मेर से भी आ रही है। NDTV की खबर के मुताबिक बाड़मेर के सरकारी अस्पताल में 2019 में 6 फीसदी बच्चों की मौत हुई, करीब 200 बच्चे। NDTV की टीम ने जब अस्पताल का मुआयना किया तो पाया कि अस्पताल के हालत बहुत खराब है। मरीजों के देखरेख का कोई इंतजाम नहीं है। वार्डों में हीटिंग की कोई व्यवस्था नहीं है। ठंड के समय में बच्चों के साथ आने वाले परिजन भी बीमार पड़ रहे हैं। खिड़कियों को पर्दों और गत्तों से ढका गया है।

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कोटा के जिस अस्पताल में बच्चों की मौत हुई वहां से राजधानी जयपुर महज़ 4 घंटे की दूरी पर है। पर प्रदेश के स्वास्थ मंत्री रघु शर्मा ने इतने दिनों तक वहां जाने की ज़हमत तक नहीं उठाई। जब पहुंचे तो जिस अस्पताल में हर दिन बच्चों की लाशें उठ रही थी वहां मंत्री जी के स्वागत के लिए ग्रीन कार्पेट बिछा दिया गया। रंग रोगन करवाया गया और बेड पर नई चादरें बिछा दी गई। लेकिन मंत्री के निरीक्षण के तुरंत बाद एक और बच्चे की मौत हो गयी।

ऐसा है हमारा देश, जहाँ 100-200 मासूमों के मरने के बाद भी प्रशासन शर्म से मरता नहीं। वह बेशर्मी की हदें पार करता जाता है। वह मरीजों को कड़ाके ठंड में मरने को छोड़ देता है और चंद मिनट के लिए आए मंत्री के लिए ग्रीन कार्पेट बिछा देता है। प्रियंका गांधी जिनकी सरकार है राजस्थान में वो उन बच्चों के परिजनों से मिलने नहीं जाती। वो हर बार कहती हैं मैं एक माँ हूँ, और भावुक हो जाती हैं। लेकिन कोटा जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाती..