सावधान ! झटपट लोन देने वाले ऐप्स का पूरा सच जान लें, ऐसा कर फंस जाते हैं आप

ऑनलाइन लोन
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लॉकडाउन के बाद से भारत में ऑनलाइन लोन देने वालों की भरमार हो गई। सैकड़ों ऐसी ऐप्स हैं जो मिनटों में लोन दे कर लोगों को अपने जाल में फंसा रही हैं। मिनटों में लोन देने वाले ऐप्स के झांसे में आकर लोग बर्बाद हो रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक बार-बार चेता रहा है, फिर भी लोग इनके जाल में फंस रहे हैं। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना जैसे दक्षिण भारत के राज्यों में कई लोगों ने सुसाइड कर लिया है।

झटपट घर बैठे ऑनलाइन ऐप्स से मिलने वाले ये लोन जानलेवा साबित हो रहे हैं। आइए जानते हैं कि ये ऐप्स किस तरह से लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं और इनसे किस तरह से बचना चाहिए?

यह असल में पूरा एक रैकेट है, जो सोशल मीडिया पर प्रचार कर नौजवानों को लालच लोन का लालच दिखा कर अपने जाल में फंसा रहा है।  इनमें ज्यादा अनाधिकृत लोग लगे हैं जिन्हें रिजर्व बैंक जैसे नियामक से लोन देने का अधिकार नहीं मिला है। हालत यह है कि कई लोग इन्हीं लोन के चलते अपनी जान गंवा चुके है।

क्या होता है इंस्टैंट या फटाफट लोन

इसमें अक्सर ग्राहक से तीन महीने का बैंक स्टेटमेंट, आधार कार्ड या पैन कार्ड की कॉपी लेकर तुरंत यानी कुछ मिनटों में ही लोन दे दिया जाता है। कई बार ऐसे कागजात न रहने पर भी लोन दे दिया जाता है।

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लोग इन ऐप्स का ऐड देखकर प्रभावित होते हैं और फिर गूगल प्ले स्टोर से ऐसे ऐप डाउनलोड करते हैं। तब ही ऐप्स ज्वारा यह शर्त स्वीकार कराई जाती है कि ऐप को उनकी पर्सनल डिटेल (जैसे फोटो गैलरी) और कॉन्टैक्ट लिस्ट साझा की जा रही है। लोग बिना सोचे समझे सब हां करता जाता है।

जब कोई ग्राहक इस ऐप को डाउनलोड कर जरूरी दस्तावेज अपलोड करता है तो उसके कुछ मिनटों के बाद ही उसके बैंक एकाउंट में रकम डाल दी जाती है। इसके बाद शुरू होता है असली खेल।

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ऑनलाइन लोन के ऐसे ऐप 30 से 35 फीसदी का सालाना ब्याज तो लेते ही हैं। उससे ज्यादा भयावह बात यह है कि वे ड्यू डेट पर लोन न मिलने पर प्रति दिन 3,000 रुपये तक की पेनाल्टी लगा देते हैं। इसकी वजह से ही कई ग्राहक दूसरे ऐप से लोन लेने के झांसे में फंस जाते हैं।

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ऐसे कर देते हैं लोगों का जीना मुहाल

डयू डेट के कुछ दिन पहले से ही ये लोग पैसे समय पर चुकाने के लिय कहते रहते हैं। अगर कोई डयू डेट पर पैसा नहीं लौटा पाता तो इसके बाद इनके टेलीकॉलर और रिकवरी एजेंट इस तरह से लोगों को प्रताड़ित करते हैं कि उनका जीना हराम हो जाता है। यहां तक कि ये कंपनियां लोन लेने वाले लोगों के पर्सनल डिटेल सोशल मीडिया पर शेयर कर उन्हें डिफॉल्टर घोषित कर देती हैं।

फोन कर धमकाया जाता है और गालियां दी जाती हैं। इसके बाद भी अगर कोई लोन नहीं चुका पाता तो उसके कॉन्टैक्ट लिस्ट के लोगों, दोस्तों को फोन कर, उन्हें व्हाट्सऐप मैसेज भेजकर ग्राहक को अपमानित किया जाता है।

बचने के लिय बरते यें सावधानियां

रिजर्व बैंक ने कहा है कि किसी भी ऐसे ऐप या अनाधिकृत व्यक्ति को अपनी केवाईसी के दस्तावेज न दें। केंद्रीय बैंक ने कहा है कि सभी डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्मों को उस बैंक या एनबीएफसी का खुलासा ग्राहकों के सामने करना चाहिए, जिनके माध्यम से वे लोन देने का वादे करते हैं।

रिजर्व बैंक की वेबसाइट में पंजीकृत एनबीएफसी का नाम और पता जाना जा सकता है और पोर्टल के माध्यम से इकाइयों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

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रिजर्व बैंक ने कहा है, ‘ग्राहकों को कभी भी केवाईसी दस्तावेजों की प्रति बगैर पहचान वाले व्यक्ति, अपुष्ट/अनाधिकृत ऐप को नहीं देना चाहिए और ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराने के लिए इस तरह के ऐप और बैंक खाते की सूचना सचेत पोर्टल के माध्यम से संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को देनी चाहिए।’

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