किसान मुक्ति मार्च: आखिर क्यों हर बार सड़कों पर आने को मजबूर हैं देश के अन्नदाता

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नई दिल्ली, 30 नवंबर। किसान मुक्ति मार्च के बैनर तले देश भर के हजारों किसान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंचे हैं। मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ लामबंद किसान मार्च कर संसद का घेराव करेंगे। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर क्यों देश का अन्नदाता अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरता है।

दरअसल, सरकार की वादाखिलाफी के चलते हर बार किसानों को अपनी आवाज़ बुलंद करने के लिए सड़कों पर उतरना पड़ता है बावजूद इसके उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिलता है। किसानों की मुख्य मांग कर्जमाफी और फसलों की लागत का डेढ़ गुना समर्थन मूल्य मिलना है।

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इसके अलावा कई अन्य मांगों को लेकर भी किसान देश के अन्य राज्यों से दिल्ली के रामलीला मैदान पहुंचे हैं। दो दिवसीय किसान मुक्ति मार्च का आज आखिरी दिन है। किसान अपनी मांगों को लेकर संसद तक मार्च करने की तैयारी में है ताकि आगामी संसद सत्र में उनकी विशेष मांग को स्वीकृती मिल सके।

किसानों ने सरकार और प्रशासन को चेताते हुए है कि अगर उन्हें संसद की ओर जाने से रोका गया तो फिर वे निर्वस्त्र (न्यूड) प्रदर्शन करेंगे। किसान इस बार सिर्फ दो ही प्रमुख मांगों को लेकर यह आंदोलन कर रहे हैं। उनकी पहली मांग है कर्ज से पूरी तरह मुक्ति और दूसरी मांग में फसलों की लागत का डेढ़ गुना मुआवजा।