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खाप पंचायतें: 400 लोगों के सामने महिला को नंगा करने वाला समाज

खाप पंचायतें
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जिस देश में कानून का राज होना चाहिए वहां लोगों की ज़िंदगी के फैसले खाप जैसी रुढ़ीवादी पंचायतें ले रही हैं। खाप पंचायतें खुलेआम लोगों की ज़िंदगी से खिलवाड़ कर रही हैं और कानून यह सब होते देख रहा है। विश्वगुरु बनेंगे, महिलाओं को सुरक्षा देंगे, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र, गर्व, राष्ट्रवाद, महिलाओं की पूजा… यह सब शब्द जब हम सुनते हैं तो लगता है हमारा देश कितना सुंदर है, कितना महान है लेकिन इस दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में जिस तरह महिलाओं का तिरस्कार, उसका चरित्र हनन किया जाता है उससे यह सब कुछ खोखला सा नज़र आने लगता है।

चाची-भतीजे को 400 लोगों के सामने नंगा कर नहलाया गया

मामला है राजस्थान के सीकर जिले में खाप पंचायत के एक शर्मनाक आदेश का। खाप पंचायत के आदेश में चाची और भतीजे को अमानवीयता से गुजरना पड़ा। पंचायत ने दोनों के कपड़े उतरवाए और करीब 400 लोगों के सामने नंगे नहलाया गया। इससे भी शर्मनाक बात यह है कि पुलिस को घटना के बारे में 11 दिन बाद उस समय पता चला, जब अखिल राजस्थान सांसी समाज सुधार एवं विकास न्यास के प्रदेश अध्यक्ष सवाई सिंह मालावत ने सीकर के एएसपी को इसकी लिखित शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

सीकर जिले की नेछवा ग्राम पंचायत के सोला गांव के सांसी समाज से जुड़े और रिश्ते में चाची-भतीजा लगने वाले युवक-युवती का एक वीडियो वायरल हो गया था। वीडियो सामने आने पर खाप पंचायत के लोग इकट्ठे हुए और शुद्धीकरण के नाम पर युवक-युवती को बिना कपड़ों के सभी के सामने नहलाने का फरमान सुनाया। सजा सुनाने वाली खाप पंचायत के पंचों ने दोनों के परिवारों पर जुर्माना भी लगाया। युवक से 31 हजार रुपए और युवती के परिवार से 22 हजार रुपए वसूले गए। 21 अगस्त को गांव में हुई इस खाप पंचायत में सीकर, चूरू, झुंझुनूं और बीकानेर से पंच इकट्ठा हुए थे। सजा सुनाने वाले पंचों में से एक सरकारी नौकरी से रिटायर्ड है और एक सरकारी कर्मचारी है।सीकर के एएसपी डॉक्टर देवेंद्र शर्मा का कहना है कि पीड़ितों के परिवार की सहमति से युवक और युवती को नहलाया गया है।

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खाप पंचायतें आजतक कैसे चल रही हैं?

तो दंबंगों के हाथ में कानून है, 70 साल का लोकतंत्र आज भी कानून अपने हाथ में लेने वालों को सज़ा नहीं दे पाता। समाज और धर्म के कानून आज भी लोकतांत्रिक मूल्यों से उपर माने जा रहे हैं। देश के किसी कोने में इस तरह खुलेआम महिला के साथ अभद्र व्यवहार होता है और पुलिस 10 दिन बाद जागती है। और तो और वहां के लोग खुलेआम कानून की धज्जियां उड़ते देखते हैं और पुलिस को शिकायत तक करना ज़रुरी नहीं समझते। विश्वगुरु बनेंगे हम और दुनिया को यह सब उदाहरण देकर बताएंगे देखो कितनी तरक्की करली है हमने। हमारे यहां औरत की ऐसे की जाती है इज़्जत।

खाप पंचायतों में प्रभावशाली लोगों या गोत्र का दबदबा रहता है। साथ ही औरतें इसमें शामिल नहीं होती हैं, न उनका प्रतिनिधि होता है। ये केवल पुरुषों की पंचायत होती है और वहीं फ़ैसले लेते हैं। खाप पंचायतों की मौजूदगी उत्तर भारत में अधिक होती है।

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खाप पंचायतों को प्रशासन का संरक्षण

नौकरी की तलाश में जब गांव के युवा शहर जाने लगे तो खाप के नियमों को तोड़ने लगे ऐसे में खाप पंचायतों को अपने अस्तित्व पर संकट नज़र आने लगा है। खाप पंचायतों को पुलिस और प्रशासन की ओर से संरक्षण मिलता है इसमें कोई दोराय नहीं है क्योंकि प्रशासन और सरकार में वहीं लोग बैठे हैं जो इसी समाज में पैदा और पले-बढ़े हैं। वे समझते हैं कि उनके सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को औरत को नियंत्रण में रखकर ही आगे बढ़ाया जा सकता है इसलिए वे इन पंचायतों का विरोध नहीं करते।

इन पंचायतों का शिकार अधिकतर महिलाएं और दलित होते हैं। रुढ़ीवादी विचारों वाली ये पंचायतें महिलाओं और दलितों के प्रति क्रूर व्यवहार करती आई हैं।

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