Kerala Internet Law: भारी आलोचनाओं के बाद विवादित कानून पर लगाई केरल सरकार ने रोक

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केरल में सीपीएम की लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (L.D.F.) सरकार ने सोमवार को विवादित पुलिस एक्ट के अधिनियम(Kerala Internet Law) पर रोक लगा दी है। इस अधिनयम की हर तरफ आलोचना हो रही थी। सचिवालय की बैठक के बाद, मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन(P. Viajayan) ने कहा कि उनकी सरकार अब संशोधन अधिनियम को लागू करने के फैसले को पीछे ले रही है। लोकतंत्र की रक्षा के लिए खड़े होने वाले और एल.डी.एफ़. के समर्थकों ने भी इस अधिनियम पे चिंता ज़ाहिर की थी।

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उन्होंने एक बयान में कहा, “हम संशोधित केरल पुलिस अधिनियम(Kerala Internet Law) को लागू करने का इरादा नहीं कर रहे हैं। राज्य विधानसभा में इस संबंध में विस्तृत चर्चा की जाएगी और हर सियासी पहलू को ध्यान में रखने के बाद ही आगे के कदम उठाए जाएंगे।”

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सीपीएम के कई नेताओं के हस्तक्षेप के बाद ये बड़ा बदलाव देखने को मिला। इसके अलावा, अन्य वामपंथी दलों, विशेष रूप से सीपीआई, ने भी इस नियम(Kerala Internet Law) का को “ड्रेकोनियन” कहा। इससे पहले सोमवार को, सीपीएम महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि केरल पुलिस अधिनियम संशोधन अध्यादेश का “पुनर्विचार” होगा। जब उनसे पूछा गया कि क्या “पुनर्विचार” का मतलब अध्यादेश को रद्द करना हो सकता है, तो उन्होंने संकेत दिया कि इसका मतलब है कि अध्यादेश को हटा दिया जाएगा।

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मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाली एलडीएफ सरकार ने यह भी कहा कि संशोधन का उद्देश्य महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों को कम करना है। रविवार को, मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक बयान में कहा कि केरल पुलिस अधिनियम में संशोधन “किसी भी तरह से स्वतंत्र भाषण या निष्पक्ष पत्रकारिता के ख़िलाफ़ नहीं किया जाएगा”।

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केरल मंत्रिमंडल ने पिछले महीने धारा 118-ए को जोड़ने की सिफारिश कर पुलिस अधिनियम को अधिक अधिकार देने का फैसला किया था। यह या तो पांच साल तक की कैद या 10,000 रुपये तक का जुर्माना या दोनों का उपयोग करता है। जो सोशल मीडिया पर किसी भी व्यक्ति को डराने, अपमान करने या बदनाम करने के इरादे से संचार के किसी भी माध्यम से सामग्री का उत्पादन, प्रकाशन या प्रसार करते हैं।

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