बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए केरल में RSS के 20,000 कार्यकर्ता सक्रीय

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तिरुवनंतपुरम, 14 अगस्त। केरल में बीते कुछ दिनों से मूसलाधार बारिश और बाढ़ का कहर जारी है। भारी बारिश और बाढ़ से अब तक 39 लोगों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य घायल है। केरल के इतिहास में साल 1924 के बाद आई यह सबसे भीषण बाढ़ है। राज्य के कई इलाकों में प्रकृति कहर जारी है। कई, गांव और कस्बे डूब चुके हैं जबकि कुछ अन्य से कनेक्शन टूट गया है।

इस प्राकृतिक आपदा के बीच एक ओर जहां भारतीय सेना और एनडीआरफ के जवान जान पर खेल लोगों को रेस्क्यू कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता पीड़ितों के बीच राहत सामग्री पहुंचाने और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं।

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सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में देखा जा सकता है कि कैसे आरएसएस के कार्यकर्ता लोगों की मदद कर रहे हैं और उन्हें रेस्क्यू कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रहे हैं। रिपोर्ट्स की माने तो संघ ने करीब 20,000 आरएसएस कार्यकर्ताओं को राज्य में लोगों की मदद के लिए भेजा है।

हांलाकि खास बात यह है कि वर्तमान में यहां मुख्यमंत्री पिनरई विजयन के नेतृत्व में लेफ्ट की सरकार है। विचारधार के आधार पर लेफ्ट और संघ दोनों ही एक दूसरे धुर विरोधी समझे जाते हैं, जिसके चलते यहां बीते कुछ समय कई आरएसएस कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमला भी हो चुका है।

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लोग सोशल मीडिया पर आरएसएस कार्यकर्ताओं मदद करने वाली तस्वीरों को पोस्ट कर उनकी सराहना कर रहे हैं, जबकि विजयन सरकार की जमकर आलोचना हो रही है।

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हांलाकि यह पहला मामला नहीं है जब आरएसएस कार्यकर्ता किसी प्राकृतिक आपदा के दौरान लोगों की मदद कर रहे हैं। इससे पहले साल 2015 में नेपाल में आए भूकंप के दौरान आरएसएस कार्यकर्ता लोगों की मदद करने पहुंचे थे।

बता दें कि, केरल के अन्य जिलों के अलावा बुरी तरह प्रभावित कोझिकोड, इडुक्की, मलप्पुरम, कन्नूर और वायनाड जिलों में राहत और बचाव के लिए सेना के तीनों अंगों के साथ राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) की टीमें लगातार काम कर रही हैं।

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