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राष्ट्रीय प्रेस दिवस: कश्मीर के वो पत्रकार जिनकी कलम तोड़ दी गई है..

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ग्राउंड रिपोर्ट | न्यूज़ डेस्क

कश्मीर में अब हालात सामान्य होने को है, 90 फीसदी पाबंदियां हटा ली गई हैं। पोस्टपेड मोबाइल सेवा बहाल होने के बाद संचार व्यवस्था भी कश्मीर में थोड़ी पटरी पर आ गई है। लेकिन कश्मीर के स्थानीय पत्रकार अभी भी संचार व्यवस्था को लेकर परेशान है। क्योंकि इंटरनेट सेवा 100 दिनों के बाद भी बहाल नहीं हुई है।

Protest of kashmir Journalists

कश्मीर के अधिकतर पत्रकार देश की किसी न किसी न्यूज़ वेबसाइट या वेब पोर्टल के साथ जुड़े हुए हैं। इन वेबसाइट को खबर भेजकर ये युवा पत्रकार अपना जीवन यापन करते हैं। लेकिन धारा 370 हटने के बाद से बंद इंटरनेट की वजह से इन पत्रकारों की रोज़ी छिन चुकी हैं। अधिकारियों द्वारा केवल मीडिया सेंटर में ही इंटरनेट उपलब्ध करवाया गया है। पहले वहां जाकर स्वतंत्र पत्रकार अपनी रिपोर्ट फ़ाइल कर पा रहे थे लेकिन अब उनसे यह सुविधा छीन ली गई है। अधिकारियों का कहना है कि वेब पोर्टल पर काम करने वाले स्वतंत्र पत्रकारों को इंटरनेट उपलब्ध नहीं होगा। केवल अखबार और न्यूज़ चैनल पत्रकारों को ही यह सुविधा दी जाएगी।

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100 दिन से घाटी में बंद इंटरनेट से सबसे ज़्यादा प्रभावित पत्रकार ही हुए हैं। कश्मीर से चलने वाली अधिकतर न्यूज़ वेबसाइट का परिचालन बंद हो चुका है। आपको बता दें कि देश में डिजीटल मीडिया के विस्तार के बाद से अधिकतर पत्रकारों की यह रोज़ी रोटी का जरिया है। वहां के पत्रकारों ने इसे लेकर विरोध प्रदर्शन भी किया लेकिन उनकी आवाज़ को नहीं सुना गया।

Courtesy: Twitter

आज राष्ट्रीय प्रेस दिवस है और हमारे देश के एक हिस्से में पत्रकारिता सेंसरशिप की शिकार है। इसपर प्रेस आज़ादी पर काम करने वाले तमाम संस्थाएं मौन बैठी है। और खुद मीडिया भी अपने साथियों की आवाज़ नहीं उठा रहा है। एक स्वतंत्र और लोकतांत्रिक देश में मीडिया की आज़ादी उसके नागरिकों की आज़ादी होती है।