"कश्मीर गांधी के भारत में शामिल हुआ था, न कि मोदी के भारत में।"

“कश्मीर गांधी के भारत में शामिल हुआ था, न कि मोदी के भारत में”

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने बुधवार को एक साक्षात्कार में कहा कि वर्तमान समय में कश्मीर के लोग ख़ुद को भारतीय नहीं मान रहे हैं। आज वे चाहते हैं कि चीन उन पर शासन करें।

‘द वायर’ को दिए इंटरव्यू में जब पत्रकार करन थापर ने उनसे कश्मीर के लोगों के मूड के बारे में पूछा, तो फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ‘ईमानदारी से कहूं तो मुझे हैरानी होगी अगर उन्हें (सरकार) वहां कोई ऐसा शख्स मिल जाता है जो खुद को भारतीय बोले। अब्दुल्ला ने आगे कहा, ‘आप जाइए और वहां किसी से भी बात कीजिए.. वे खुद को भारतीय नहीं मानते हैं और न ही पाकिस्तानी.. मैं यह आपको स्पष्ट कर दूं। पिछले साल 5 अगस्त को उन्होंने (मोदी सरकार ने) जो किया, वह ताबूत में आखिरी कील था।’

This blind man from Kashmir mesmerizes people with his melodious voice

आगे बोलते फारूक अब्दुल्ला कहा, ‘आज दूसरी तरफ से चीन आगे बढ़ रहा है। अगर आप कश्मीरियों से बात करें तो कई लोग चाहेंगे कि चीन भारत में आ जाए। जबकि उन्हें पता है कि चीन ने मुस्लिमों के साथ क्या किया है।’ अब्दुल्ला ने कहा, ‘मैं इस पर बहुत गंभीर नहीं हूं लेकिन मैं ईमानदारी से कह रहा जिसे लोग सुनना नहीं चाहते।’

केंद्र पर निशाना साधते हुए फारूक अब्दुल्ला ने दावा किया कि अगर वे घाटी में कही भी भारत के बारे में कुछ बोलते हैं तो कोई उन्हें सुनने वाला कोई नहीं होता है। उन्होंने कहा, ‘वहां हर गली में एके 47 लिए हुए सुरक्षाकर्मी खड़ा है। आजादी कहां है?’

Last year’s Aug-05 decision still ‘haunts’ people of Ladakh: Former Minister

अब्दुल्ला ने आगे कहा, ‘आप जाइए और वहां किसी से भी बात कीजिए। वे खुद को भारतीय नहीं मानते हैं और न ही पाकिस्तानी। उन्होंने धारा 370 को हटाया जाना गलत बताया। विभाजन के वक्त घाटी के लोगों को पाकिस्तान जाना था लेकिन तब उन्होंने गांधी के भारत को चुना था, मोदी के भारत को नहीं।

बता दें कि फारूक अब्दुल्ला को बीते 4 अगस्त 2019 की रात को नजरबंद किया गया था। अगले ही दिन जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटा लिया गया था। 15 सितंबर से उन्हें पब्लिक सेफ्टी एक्ट के तहत हिरासत में रखा गया था। उनकी हिरासत अवधि तीन-तीन महीने बढ़ाने के आदेश तीन बार जारी हुए। पिछला आदेश 11 मार्च को ही जारी हुआ था। इसे सरकार ने वापस ले लिया है।

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