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जम्मू-कश्मीर में नागरिकता सर्टिफिकेट किस नियम के तहत मिलता है, क्या है जरूरी दस्तावेज, 5 खास बातें

Central Administrative Tribunal for jammu kashmir
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जम्मू कश्मीर में 66 साल बाद एक गैर कश्मीरी को वहां की नागरिकता दी गई है। आईएएस नवीन चौधरी पहले ऐसे शख्स हैं जो मूल रूप से बिहार से हैं लेकिन उन्हें आधिकारिक तौर पर जम्मू-कश्मीर राज्य की नागरिकता मिली है। नवीन चौधरी जम्मू और कश्मीर के कृषि विभाग में कमिश्नर सचिव के पद पर तैनात हैं। यहां समझें किन लोगों को जम्मू-कश्मीर में नागरिकता मिल सकती है और क्या कहते हैं नियम और क्या है जरूरी दस्तावेज, यहां समझें…

किन लोगों को मिल सकती है नागरिकता
जम्मू-कश्मीर के नियमों के अनुसार जो व्यक्ति 15 वर्ष से अधिक समय से जम्मू कश्मीर में रह रहे हैं या जिन्होंने 10वीं 12वीं के परीक्षा दी हैं या 7 साल से वह जम्मू-कश्मीर में ही पढ़ रहे हैं उन लोगों को यहां की नागरिकता दी जाएगी। सेंट्रल गवर्नमेंट कार्यकर्ता, इंडियन आर्मी फोर्स कार्यकर्ताओं, उनके बच्चे और जो नागरिकता के लिए बनाए गए एलिजिबल क्राइटेरिया को पूरा करता हो उन्हें नागरिकता मिल सकेगी।

देरी होने पर अधिकारी की सैलरी से कटेगा 50,000 रुपये का जुर्माना
डोमिसाइल सर्टिफिकेट 15 दिन के अंदर ही मिल सकेगा। अगर अथॉरिटी सर्टिफिकेट 15 दिन में देने से नाकाम हो जाती है तो जिस भी तहसीलदार या ऑफिसर के तहत यह कार्य होगा उसे 7 दिन के भीतर डोमिसाइल व्यक्ति को देना होगा अन्यथा उसकी तनख्वाह में से ₹50000 का जुर्माना काट लिया जाएगा। जम्मू-कश्मीर ग्रांट डोमिसाइल सर्टिफिकेट प्रोसिजर रूल्स 2020 के नियम 5 के तहत नागरिकता सर्टिफिकेट जारी किया जाता है।

नागरिकता के लिए जरूर दस्तावेज
डोमिसाइल सर्टिफिकेट प्राप्त करने के लिए जम्मू- कश्मीर के परमानेंट रेजिडेंट सर्टिफिकेट, राशन कार्ड की कॉपी, वोटर कार्ड या कोई अन्य आईडेंटिटी कार्ड दिखाकर डोमिसाइल सर्टिफिकेट मिल सकता है। जम्मू- कश्मीर में इससे पहले आर्टिकल 370 व आर्टिकल 35(A) लागू था। इसे हटाने के बाद अब पूरे भारत से कोई भी व्यक्ति जम्मू- कश्मीर में प्रॉपर्टी खरीद या बेच सकता है।

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विरोध के बावजूद केंद्र सरकार ने दी थी इस कानून को मंजूरी
कश्मीर में नागरिकता के लिए नवीन चौधरी ने डोमिसाइल सर्टिफिकेट के लिए तहसीलदार कार्यालय में अप्लाई किया था। उन्हें बाहू तहसील के तहसीलदार ने सर्टिफिकेट दिया। यह सर्टिफिकेट जम्मू-कश्मीर ग्रांट डोमिसाइल सर्टिफिकेट प्रोसिजर रूल्स 2020 के नियम 5 के तहत जारी किया गया है। बता दें कि केन्द्र सरकार ने इस कानून को मंजूरी दी थी और इसका कई संगठनों ने विरोध भी किया था।

नागरिकता मिलने के बाद आगे क्या
केंद्र सरकार द्वारा आर्टिकल 370 हटाए जाने के बाद जम्मू कश्मीर और लद्दाख दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए गए हैं। जम्मू कश्मीर में विधानसभा होगी लेकिन लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी और लेजिसलेटिव असेंबली (सदर-ए-रियासत) और जम्मू- कश्मीर के गवर्नर काउंसिल ऑफ मिनिस्टर की एडवाइस पर ही काम करेंगे। जब आर्टिकल 370 लागू थी तो यहां पर भारत का संविधान लागू नहीं हुआ करता था और ना ही केंद्र राज्य से पूछे बिना किसी भी नियम को वहां लागू कर सकती थी। अब लोग आसानी से जम्मू कश्मीर में नौकरियां भी पा सकेंगे और नागरिकता लेने के साथ वहां के नियमों का लाभ भी उठा सकेंगे।