Mumbai Terror Attacks 26/11: Jammu and Kashmir: Terrorist attack security personnel in HMT area near Srinagar

आर्टिकल 370 हटने के बाद भी, आतंकवाद और उग्रवाद से जूझ रहा है कश्मीर

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5 अगस्त को आर्टिकल 370 को हटाए हुए पूरा एक साल हो जाएगा, परन्तु अभी भी कश्मीर में हालात सामान्य नहीं हुए है. वर्तमान में भी कश्मीर आतंकी हमलों से जूझ रहा हैं.  पिछले साल गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में आर्टिकल 370 और 35ए को हटाते हुए कहा था कि “जम्मू – कश्मीर में आतंकवाद की जड़ आर्टिकल 370 है, जम्मू – कश्मीर की जनता जम्हूरियत चाहती है. आर्टिकल 370 की वजह से ही जम्मू – कश्मीर का विकास नहीं हुआ”. जबकि स्थानीय कश्मीरी राजनेताओं ने आउटलुक को बयान देते हुए कहा कि “आर्टिकल 370 का हटना मोदी सरकार 2.0 के पहले साल की सबसे बड़ी उपलब्धि है. इसने घाटी को राजनीतिक अनिश्चिता की ओर धकेल दिया है और इससे उग्रवाद और आतंकवाद बढ़ सकता है. “

ओरएफ की स्पेशल रिपोर्ट के मुताबिक 2019 में पत्थरबाजी की घटनाओं की संख्या 1,999 थी, जबकि 2018 में 1,458 और 2017 में 1,412 थी. इंटेलिजेंस ब्यूरो की अगुवाई में काम करने वाली मल्टी एजेंसी सेंटर के हाल ही के अनुमान के मुताबिक, घाटी में 400 उग्रवादी सक्रिय होने की संभावना है, जिससे सीमावर्ती जिलों राजौरी, पुंछ और किश्तवाड़ में उग्रवाद के बढ़ने की संभावना है. 5 अगस्त 2019 के बाद से कश्मीरी लोगों में अपनी पहचान और सांस्कृतिक मुद्दों जैसे धर्म, रीति- रिवाजों और भाषा के बारे में डर और शक की भावना बढ़ रही है.

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इसके अलावा जम्मू – कश्मीर के सिविल सोसाइटी संगठन की बाई- एनुअल रिपोर्ट के हिसाब से, वर्ष 2020, 1 जनवरी से 30 जून तक कश्मीर घाटी में  हिंसा की अलग- अलग घटनाओं में 229 हत्याएं हुई है, जिनमें 32 नागरिकों, 54 सशस्त्र बल और 143 उग्रवादियों की हत्या हुई. इसमें 3 बच्चे और 2 महिलाएं भी शामिल है. इसी समय अंतराल के बीच में  जम्मू – कश्मीर में 107 कार्डन एंड सर्च ऑपरेशन हुए, जिनमें 143 उग्रवादी मारे गए. इन्हीं छह महीनों में सशस्त्र बलों और उग्रवादियों के बीच 57 बार मुठभेड़ हुई.

वहीं गृह मंत्रालय का दावा है कि आर्टिकल 370 के हटने के बाद से कश्मीर में आतंकी घटनाएं कम हो गई है और हालात सामान्यता की ओर अग्रसर है. गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, आर्टिकल 370 के हटने के बाद से घाटी में 36 प्रतिशत आतंक- संबंधी गतिविधियां घट गई है. 2019 में 1 जनवरी से 15 जुलाई तक कश्मीर घाटी में 188 आतंक- संबंधी घटनाएं हुई है, जबकि 2020 में इसी समय अंतराल में यह संख्या घटकर 120 हो गई है.

गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में यह भी उल्लेखित है कि इसी समय अंतराल में 2019 में 126 आतंकवादी , जबकि 2020 में 136 आतंकवादी मारे गए थे. 1 जनवरी 2019 से 25 जुलाई 2019 में, कश्मीर में 51 ग्रेनेड हमले हुए जबकि 2020 में इसी समय के बीच में सिर्फ 21 बार ही ग्रेनेड हमले हुए है. 

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गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के हिसाब से वर्ष 2019 में, 1 जनवरी से 15 जुलाई के बीच में 75 सुरक्षाकर्मी और 23 नागरिकों और वर्ष में इसी समय अंतराल में 35 जवानों और 22 नागरिकों की मारे गए.  वर्ष 2020 में सिर्फ 1 आईइडी हमला हुआ, हालांकि 2019 में 6 आईइडी हमले हुए थे.

सरपंच अजय पंडित की हत्या

8 जून2020 को अनंतनाग जिले में लखीपोरा के लुकाभवन गांव में कांग्रेस सरपंच अजय पंडित की हत्या कर दी गई. अजय पंडित सिर्फ सरपंच ही नहीं था बल्कि जम्मू और दिल्ली में रहने वाले 3 लाख कश्मीरी पंडितों की कश्मीर पुनर्वास की उम्मीद थी. उनका परिवार भी उन परिवारों में से एक था जो 1989-90 के विद्रोह के बाद जम्मू चले गए और वहाँ 6 साल रहने के बाद 1996 में कश्मीर लौट आए थे.  23 मार्च2003 के नंदीमार्ग के नरसंहार के 13 साल बाद किसी कश्मीरी पंडित की हत्या हुई है.  गौरतलब यह है कि 2003 में भी केंद्र में भाजपा की सरकार थी. 

कश्मीर के गायब होते नौजवान 

दक्षिण कश्मीर के कुलगाम जिले के शेर- ए- कश्मीर यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चरल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी से ग्रजुऐट, 21 वर्षीय नदीम 27 मार्च 2020 से गायब है. पुलिस के मुताबिक वह उग्रवादियों के संगठन का हिस्सा बन गया है. उनके रिश्तेदार ने  ग्राउडरिपोर्ट.इन से बातचीत में बताया कि “उसके घर छोड़ते ही हम लोगों ने कई बार उससे संपर्क करने की कोशिश की. लेकिन उसका फोन स्विच ऑफ था और सोशल मीडिया से भी उसके सारे अकांउट डिलीट हो गए है. हमने अपने और रिश्तेदारों से भी बात की, पर कहीं से उसके बारे में पता नहीं चला”. 

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 “पुलिस ने यह नहीं बताया कि वह जैश – ए- मोहम्मद में शामिल हुआ है. हमें ये भी नहीं पता कि वह किसी उग्रवादी संगठन में शामिल हुआ भी है या नहीं. उसे गायब हुए चार महीने हो गए है और इन चार महीनों में एक बार भी उससे कोई संपर्क नहीं हुआ है.”

सरकारी दावों के मुताबिक कश्मीर में लोगों की जीवन-शैली पटरी पर आने लग गई हैं, परन्तु जमीनी हकीकत अभी भी कुछ ओर ही बयां करती है. 

Written By Kirti Rawat, She is Journalism graduate from Indian Institute of Mass Communication New Delhi.

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