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कहीं भोपाल की जनता धर्म के नाम पर अधर्म की जय ना कर जाए..

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विचार- कार्तिक सागर समाधिया

बीजेपी किस बिनाह पर कह रही है कि साध्वी आतंकवादी नहीं है। वो ऐसा कैसे कह सकती है ? आरएसएस के पास क्या अपने बौने राष्ट्रवाद के प्रचार के लिये नेता कम पड़ गये हैं। पिछला इतिहास उठाकर देखेंगे या फिर इंडियन एक्स्प्रेस का 17 तारीख को छपा संपादकीय पढेंगे तो आपको एहसास होगा खासकर उन लोगों या तो किसी न समझ के चलते साध्वी के बारे में जानते नहीं , या फिर किसी पार्टी लाइन के चलते जानना नहीं चाहते। जिनका काम है अंधे राष्ट्रवाद का प्रचार करना।

मालेगाँव बम ब्लास्ट मामूली घटना नहीं थी। अगर मामूली थी तो हमें ये महसूस होना चाहिये कि फिर बंबई अतंकी हमला भी मामूली रहा होगा। खैर जांच में विषय ये है कि कोर्ट ने साध्वी को बरी नहीं किया है वे जमानत पर बाहर हैं। चलो चलते हैं थोड़ी और जमीनी तलाश में। अगर हिंदू आतंकवाद से चिड़ है तो इतना मैं भी कहूँगा हिंदू और हिंदुत्व में अंतर है। मैं भगवा की बात नहीं करता। आप थोड़ा पढ़े और जाने कि वीर सवारकर के हिंदू और गोलवलकर की वैचारिक सोच में कितना मामूली अंतर है। और साध्वी उस बौने राष्ट्रवाद की वैचारिक सोच पर कलंक मात्र के सिवा कुछ नहीं। अगर भाजपा के पास कोई साध्वी है तो उमा भारती हो सकती है। उनके कर्मों से दिखता है। आगे बात करते हैं शहीद हेमंत करकरे की। कौन थे हेमंत करकरे। एक ऐसा भारत माँ का लाल जिसने पहले मालेगाँव का पर्दाफाश किया। फिर ताज होटल में हिन्दुस्तान बचाने शहीद हो गया।

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भाजपा की तारीफ़ करूँगा, साध्वी के विवादित बयान से पार्टी ने पल्ला झाड़ा लेकिन बेहतर होता साध्वी से उम्मीदवारी छीनी होती। आप अपना नेता साध्वी को चुने या दिग्विजय को चुने या फिर नोटा दबा दें, लेकिन इतना जरुर करें कि देश की गरिमा को झुकने न दें। विदेशी अखबारों की हेडलाइन ये न बनने दें कि शहीदों की इज्जत भारत नहीं करता। आप सुने रजत शर्मा का लिया आपकी अदालत में साध्वी का इंटरव्यू लेकिन इतना करें बाकि रिपोर्टस भी पढें। और जानें कि साध्वी अभी सभी आरोपों से बरी नहीं हुई हैं। भावनायें रखनी है तो उनके लिये रखें जो सालों से जेल में बिना किसी जुर्म के सजा काट रहें हैं। सामाज का वकील बनना है तो इतना भला करें समाज को सच बताते चलें। चुनाव आयोग ने कारण बताओ नोटिस दिया है। बेहतर होगा कि आरोपी सांसद प्रत्याशी को चुनाव लड़ने से रोका जाता। बाकि पांडू के भाई के पुत्र राज सिंहासन पाने वाली जानता को ध्रतराष्ट्र बनाकर ना छोड़ दें और धर्म के नाम अधर्म की जय कर जायें।