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Kargil Vijay Diwas: आज से 22 साल पहले हुआ था कारगिल युद्ध

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Kargil Vijay Diwas: कारगिल हाइलैंड्स के शीर्ष पर पाकिस्तानी सैनिकों की खोज के बाद 60 दिनों तक चलने वाला कारगिल युद्ध 3 मई से 26 जुलाई, 1999 तक चला था। जी हां आपको बता दे कि आज ही के दिन 26 जुलाई को कारगिल के युद्ध में भारत के जवानों ने अपने प्राणों की चिंता न करते हुए देश के लिए अपनी जान दी थी। जिसके चलते आज हम कारगिल विजय दिवस ( kargil Vijay Diwas) सैनिकों के सम्मान में मनाते आ रहें हैं। आज से कारगिल युद्ध के पूरे 22 साल हो चुके हैं। अपने ‘भारत के वीर जवान’ को सम्मानित करने के लिए, हम हर साल 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाते हैं। यह ब्लॉग उन सभी भारतीय सैनिकों को एक छोटी सी श्रद्धांजलि है जो हमारे देश और उसके नागरिकों की रक्षा के लिए दिन-रात बिना किसी डर के सीमा पर लड़ते हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जवानों को ट्वीट कर दी श्रद्धांजलि

कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को ट्वीटर के जरिए युद्ध में शहीद हुए जवानों को श्रद्धांजलि दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( PM Narendra Modi) ने एक ट्वीट में कहा, ‘हम उनके बलिदानों को याद करते हैं। हम उनकी वीरता को याद करते हैं। आज, कारगिल विजय दिवस पर हम उन सभी को श्रद्धांजलि देते हैं जिन्होंने हमारे देश की रक्षा करते हुए कारगिल में अपनी जान गंवाई। उनकी बहादुरी हमें हर दिन प्रेरित करती है। इसके साथ ही “अपने मन की बात रेडियो कार्यक्रम की एक झलक को साझा करते हुए, मोदी ने कहा, “देश के लिए तिरंगा फहराने वाले के लिए भावनाओं से भरा होना स्वाभाविक है। देशभक्ति की यह भावना हम सभी को एकजुट करती है।”

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क्या है कारगिल विजय दिवस ?

कारगिल विजय दिवस ( Kargil Vijay Diwas) 26 जुलाई को कारगिल संघर्ष में अपने प्राणों की आहुति देने वाले सैनिकों के सम्मान में मनाया जाता है। इसके साथ ही कारगिल यह दिन “ऑपरेशन विजय” की सफलता का प्रतीक भी है। अपको बता दें की यह युद्ध 1999 में कारगिल-द्रास क्षेत्र में पाकिस्तानी आक्रमणकारियों द्वारा कब्जा किए गए भारतीय क्षेत्र को पुनः प्राप्त करने के लिए शुरू किया गया था। जिसके चलते कारगिल युद्ध 60 दिनों से अधिक समय तक चला था। आखिर कार 60 दिनों तक चले युद्ध के बाद 26 जुलाई 1999 को यह युद्ध समाप्त हुआ। इस प्रकार इसे कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाने लगा।

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भारतीय सेना द्वारा 2014 में बनाया गया कारगिल युद्ध स्मारक

कारगिल युद्ध स्मारक शहीदों की याद में बनाया गया था। अपको बता दें कि कारगिल युद्ध स्मारक नवंबर 2014 में भारतीय सेना द्वारा बनाया गया था। यह टोलोलिंग हिल की तलहटी में द्रास में स्थित है। वहीं स्मारक के द्वार पर माखनलाल चतुर्वेदी की ‘पुष्प की अभिलाषा’ , जिसका अर्थ है ‘विश ऑफ ए फ्लावर’ नामक कविता लिखी गई है। स्मारक की दीवार पर युद्ध में शहीद हुए सैनिकों के नाम भी अंकित किए गए हैं। ऑपरेशन विजय की जीत का जश्न मनाने के लिए कारगिल युद्ध स्मारक से जुड़ा एक संग्रहालय स्थापित किया गया है। इस संग्रहालय में भारतीय सैनिकों के घरों और परिवार के सदस्यों के साथ-साथ महत्वपूर्ण युद्ध दस्तावेजों और रिकॉर्डिंग, युद्ध उपकरण और गियर, और कारगिल युद्ध से सेना के आधिकारिक प्रतीक के संग्रह भी हैं।

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कांग्रेस प्रमुख नेता राहुल गांधी ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

कांग्रेस प्रमुख नेता राहुल ( Rahul Gandhi) गांधी ने भी शहीदों को श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि देने के लिए उन्होंने माइक्रो-ब्लॉगिंग साइट का सहारा लिया। उन्होंने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि “हमारे तिरंगे की गरिमा की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले प्रत्येक सैनिक को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि। हम इस सर्वोच्च बलिदान को हमेशा याद रखेंगे। ”

देश के उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी दी वीरों को श्रद्धांजलि

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कारगिल विजय दिवस पर उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी ट्वीट कर वीरों को सलामी देते हुए कहा कि, मैं हमारे सशस्त्र बलों की वीरता और वीरता की गाथा को याद करने में राष्ट्र के साथ शामिल होता हूं। मैं कारगिल युद्ध और ऑपरेशन विजय के नायकों को सलाम करता हूं। इसके साथ ही ट्वीट करते हुए उन्होंने कहा कि शहीदों को उनके सर्वोच्च बलिदान के लिए सम्मानजनक श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं, ”

सीआईएससी वाइस एडमिरल अतुल जैन ने दी सैनिकों को श्रद्धांजलि

कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में सेना के प्रमुख जनरल एमएम नरवणे, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया, नौसेना के वाइस चीफ वाइस एडमिरल जी अशोक कुमार और सीआईएससी वाइस एडमिरल अतुल जैन ने भी दिल्ली में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। वहीं मैं एक सैनिक हूं, मैं जहां कहता हूं वहां लड़ता हूं, और जहां मैं लड़ता हूं वहां जीतता हूं।” यह वाक्य हमारे देश भारत के लिए लड़ने वाले भारतीय सैनिकों का आदर्श वाक्य है। वे देश के गौरव, सम्मान और भविष्य को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालकर एक बार भी नहीं सोचते। ऐसे वीर जवानों को हमारा सलाम।

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