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‘कांशीराम के साथ ही खत्म हो गई थी BSP, मायावती की पार्टी में VIP कल्चर हावी’

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विचार- विकास दयाल, (पत्रकार-सामाजिक कार्यकर्ता)

9 अक्टूबर। एक सूझबूझ से चलकर देश में बहुजनो को एक नया मकाम़ देने वाले महापुरुष साहेब कांशिराम का महापरिनिर्वाण दिवस है। साहेब कांशिराम ने हमेशा दलितों, पिछडों, आदिवासियों या यूं कहें तो बहुतायत में रह रहे लोगों को अपनी शैली से जोड़कर मूलनिवासी पहचान देने का काम किया साथ ही कुछ जबरदस्त माहौल बना सकने वाले नारे देकर {15%-85%} को एकत्र करने का काम भी साहेब ने किया।

उनका नारा “तिलक तराजु और तलवार इनको मारो जूते चार” व बहुजन समाज के “लिये एक वोट एक नोट “जैसे अभियान चलाकर न केवल अच्छी पैंठ बनाई बल्कि आज की बहुजन समाजवादी पार्टी देश की तीसरी सबसे बड़ी राजनैतिक पार्टी कहलाने वाली पार्टी केवल और केवल साहेब की वजह से संभव हुआ और बहुजन समाज की पहली पंसद बन रही हैं।

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लेकिन साहेब की बसपा में और मायावती की बसपा में जमीं आसमान का अन्तर रह गया है। साहेब के समय लोग साथ चलकर पैदल या साईकिल लेकर जागरुकता अभियान चलाते थे और अपने इस कठिन परिश्रम की बदोलत बसपा का ग्राफ बढ़ा, लेकिन आज की बसपा में वीआईपी कल्चर और सबसे बढ़ी पिछड़ी पार्टी के रुप में जानी जा रही है।

साहेब के कहे गये विचारों से परे है बसपा, बहन जी का बहुजन समाज पार्टी काल बन रहा है मैं बहन जी के शासन पर ऊगंली नहीं ऊठा रहा बस सोचने के लिये कह रहा हूं दलितो की पार्टी में ही vip कल्चर जिन्दा है।

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यदि ये हालात नहीं सुधरे और बसपा मुख्य धारा में नही आति और अपने पिछड़ेपन का ठीकरा EVM आदि मामलों पर डालकर फोड़ती हैं तो माफ करना आप साहेब कांशीराम को बसपा में लेकर नहीं चल रहे जिसका खामियाजा खुद 2 अप्रेल के मामले में देख ही चुके हैं कि किस तरह से बहुजनों को निशाना बनाया गया लेकिन आज की बसपा को ये सब देखना और भुगतना पड़ेगा। साहेब को बहुजनों और देश की ओर से विनम्र श्रध्दांजली और नमन।

NOTE: इस लेख में व्यक्त विचार पूरी तरह से लेखक के निजी विचार हैं। ग्राउंड रिपोर्ट द्वारा इस लेख में किसी तरह का कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। हम अभिव्यक्ति की आज़ादी को सर्वोपरि मानते हैं।

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