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Kanpur Central: कानपुर रेलवे स्टेशन पर कैसे रोज़ाना हज़ारो लीटर पानी हो रहा है बर्बाद : देखें

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बीते वर्ष 2018 में भारत में पानी के संकट को लेकर नीति आयोग ने अपनी रिपोर्ट जारी की थी. आयोग ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि भारत अपने इतिहास के सबसे गंभीर जल संकट का सामना कर रहा है. देश में करीब 60 करोड़ लोग पानी की गंभीर किल्लत का सामना कर रहे हैं. करीब दो लाख लोग स्वच्छ पानी न मिलने के चलते हर साल अपनी जान गंवा देते हैं.

फ़ोटो साभार- सोशल मीडिया

जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी द्वारा जारी की गई ‘समग्र जल प्रबंधन सूचकांक (सीडब्ल्यूएमआई)’ रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि यह संकट आगे और गंभीर होने जा रहा है. ‘2030 तक देश में पानी की मांग उपलब्ध जल वितरण की दोगुनी हो जाएगी. जिसका मतलब है कि करोड़ों लोगों के लिए पानी का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा और देश की जीडीपी में छह प्रतिशत की कमी देखी जाएगी.’

आज आपको बताते हैं कि कैसे कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर रेलवे की लापरवाही के चलते बर्बाद हो रहा है हज़ारो लीटर स्वच्छ पानी…

कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन जो नार्थ सेंट्रल रेलवे का एक बड़ा रेलवे स्टेशन है. भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के एक बड़े औधोगिक शहर कानपुर में स्थित है. कानपुर सेंट्रल  रेलवे भारत के पांच “सेंट्रल” रेलवे स्टेशनों में से एक है. ट्रेनों की फ्रेकवेंसी के मामले में यह भारत का सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशन है. स्टेशन से रोजाना लगभग 230 से 250  ट्रेनें गुज़रती हैं. यह दुनिया में सबसे बड़ी इंटरलॉकिंग मार्ग प्रणाली का रिकॉर्ड भी रखता है. यह उत्तर मध्य रेलवे का सबसे व्यस्त स्टेशन है, जो 150,000 से अधिक यात्रियों के आवागमन की रिकॉर्डिंग करता है.

‘नाम बढे़ और दर्शन छोटे’ ये बात कानपुर सेंट्रल रेलवे स्टेशन पर बिल्कुल सटीक बैठती है. कानपुर स्टेशन पर दस प्लेटफार्म बने हुए हैं जिनसे रोज़ाना सैकड़ों ट्रेनों की आवाजाही रहती है. ट्रेनों के कोचों में पानी भरने के लिय हर प्लेटफार्म पर एक मुख्य पाइप लाइन बिछी हुई है. प्रत्येक प्लेटफार्मों पर 200 वाटर रीफिल पाईप मुख्य पाइप लाइन से जुड़े हुए हैं. सात प्लेटफार्मों पर लगभग 1400 रीफिल वाटर पाइप लगे हुए हैं जिनकी मदद से स्टेशन से गुज़रने वाली ट्रेनों के कोचों में पानी भरा जाता है.

ट्रेनों के कोचों में पानी भरते समय जितना पानी कोच में लगी पानी की टंकी में नहीं भरता उससे अधिक पानी ज़मीन पर बह कर बर्बाद हो जाता है. पानी भरने वाले 80 प्रतिशत पाइपों से निरंतर पानी बहता रहता है. अधिकतर पाइप ख़राब औऱ लीक करते रहते हैं. रोज़ाना इन पाइपों से हज़ारो लीटर पानी बर्बाद हो जाता है. कानपुर सेंट्रल रेलवे की इस लापरवाही के चलते रोज़ाना हज़ारों लीटर स्वच्छ पानी बर्बाद हो जाया करता है.

ट्रेनों में पानी भरने का ठेका सपोर्ट सर्विस नामक एक प्राइवेट कंपनी के पास है. जब मैंने कंपनी के एक सीनियर अधिकारी से पानी की बर्बादी के विषय में चर्चा की तो उनका साफ़ कहना था, “हमारी टीम का काम ट्रेनों की सभी बोगियों में 5 से 7 मिनट के अंदर पानी भरना है. अधिकतर पाइप ख़राब हैं जिनसे 24 घंटे पानी गिरता रहता है. हम लोगों ने कई बार इसकी शिकायत कर बताया है कि ख़राब और डैमेज लाइन के चलते बोगियों में पूरी तरह से पानी नहीं भरा जा सकता है. मगर जवाब आता है सब ठीक है चलाओ”.

तस्वीर में आप देख सकते हैं कि किस तरह से एक पाइप से पानी नाली में बह कर जा रहा है. इसी तरह के 1400 पाइप सभी प्लेटफार्मों पर लगे हुए हैं जिसमें अधिकतर पाइप ख़राब और डैमेज हैं जिनसे ऐसे ही हर वक्त पानी बह कर बर्बाद होता रहता है. सालों से ये सभी पाइपों से ऐसे ही पानी बह रहा है. अब तक रेलवे की लापरवाही के चलते लाखो लीटर पानी बर्बाद होकर नाली में बह गया.

एक तरफ़ देश में जहां 60 करोड़ भारतीय गंभीर से गंभीरतम जल संकट का सामना कर रहे हैं और दो लाख लोग स्वच्छ पानी तक पर्याप्त पहुंच न होने के चलते हर साल अपनी जान गंवा देते हैं.’वहीं दूसरी तरफ़ लाखो लीटर स्वच्छ पानी की इस तरह से बर्बादी. क्या रेलवे पानी की इस बर्बादी के लिय कोई अहम क़दम उठाएगा? क्या नार्थ सेंट्रल रेलवे का एक बड़ा रेलवे स्टेशन कानपुर पानी की बर्बादी को लेकर सीरियस नहीं? क्या रेलवे के इस बड़ी लापरवाही को अधिकारी यूं ही टालते रहेंगे?

सवाल तो बहुत हैं मगर रेलवे को पानी की इस बर्बादी के लिय जल्द ही कोई ठोस क़दम उठाना ही होगा. स्वतंत्र संस्थाओं द्वारा रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि करीब 70 प्रतिशत प्रदूषित पानी के साथ भारत जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 देशों में 120वें पायदान पर है. देश एक बहुत बड़े पानी सकंट की तरफ़ बढ़ रहा है. सरकार को जल्द से जल्द पानी की समस्या पर ध्यान देना ही होगा. वरना यह समस्या विकराल रूप ले सकती है.

वीडियो रिपोर्ट देखें…

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