कानपुर के इस हीरा कारोबारी ने डुबो दिए 14 बैंकों के 3635 करोड़ रुपये!

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उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी कानपुर के एक बड़े हीरा कारोबारी उदय देसाई ने 14 बैंकों के 3635 करोड़ रुपये डुबो दिए . इन बैंकों में इनकी आधा दर्जन कंपनियों के दर्जन भर से अधिक खाते एनपीए हो गए. बैंकों की रक़म डुबोने का कानपुर से यह दूसरा सबसे बड़ा मामला है. एनपीए में कोठारी इंडस्ट्रीज के बाद यह कानपुर में दूसरा बड़ा मामला है.

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उदय देसाई ने 2003 में बैंक ऑफ इंडिया की बिरहाना रोड शाखा से 400 करोड़ रुपये का व्यवसायिक लोन लिया था. कई वर्ष तक इनके खाते दुरुस्त रहे लेकिन दो वर्ष से किस्तें नियमित तौर पर जमा नहीं हो रही थीं. इस पर इन्हें कई बार चेताया गया. इसके बाद बीच-बीच में किस्तें जमा हुईं लेकिन मई 2018 से कर्ज की रकम बिलकुल भी वापस नहीं आ रही थी. इस पर इनके खातों को एनपीए घोषित कर दिया गया था.

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वर्तमान में इनके 14 बैंकों में इतने ही खाते एनपीए हो चुके हैं. लगातार डिमांड नोटिस जारी करने के बाद भी इनकी कंपनियों से लोन की रकम वापस नहीं हुई तो बैंकों ने सख्ती शुरू की. अब बैंक ऑफ इंडिया ने मुंबई, कानपुर और गुड़गांव स्थित संपत्तियों को कब्जे में ले लिया है. कई संपत्तियां अभी जब्त होने की स्थिति में हैं और कई नीलामी की प्रक्रिया में चल रही हैं.

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मुंबई में बांद्रा-कुरले कॉम्प्लेक्स स्थित सी विग बिल्डिंग-1 के सातवें खंड में इसका ऑफिस है. बैंक ने सातवें खंड समेत (यूनिट संख्या 709) बेसमेंट में इस खंड के हिस्से आईं पांच कार पार्किंगों को कब्जे में ले लिया है. बैंक की ओर से यह पूरा एरिया 7057 वर्ग फीट बताया गया है. मैसर्स फ्रॉस्ट इंटरनेशनल लिमिटेड की शुरुआत 1995 में विकास नगर निवासी उदय देसाई ने की थी. मुंबई में अन्य संपत्तियों को भी बैंक अपने कब्जे़ में ले चुकी है.

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